नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में एक बार फिर से बड़ी हलचल तेज होती दिख रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने देश के तमाम विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को एक सख्त और स्पष्ट संदेश जारी किया है। उन्होंने सभी सहयोगियों से कहा है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए खुद को तैयार रखें। राहुल गांधी के इस निर्देश के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी खेमा आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ किसी बड़े देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इसके लिए सभी नेताओं को सिर्फ चौबीस घंटे का नोटिस मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह है कि विपक्ष अब किसी भी मुद्दे पर ढिलाई बरतने के मूड में बिल्कुल नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों से संसद से लेकर सड़क तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी के कामकाज के तरीके को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोला था। विपक्षी दलों का यह पक्का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बचाने के लिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का समय आ गया है। इसी रणनीति के तहत जंतर-मंतर पर एक बड़ा साझा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
सड़क से लेकर अदालत तक CEC के खिलाफ साझा जंग
विपक्षी दलों की हालिया बैठकों में यह साफ तय हो गया है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी आवाज को और तेज करेंगे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग के फैसले निष्पक्ष नहीं रहे हैं और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर भी उतरा जाएगा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल धरना प्रदर्शन की तैयारी अंतिम चरण में है। इस साझा अभियान में कांग्रेस के अलावा कई अन्य क्षेत्रीय दल भी खुलकर हिस्सा ले रहे हैं। प्रदर्शन की तारीख तय करने को लेकर पुलिस प्रशासन और नागरिक मंचों के बीच बातचीत का दौर भी लगातार जारी है।
दूसरी तरफ, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला था। अमित शाह ने करीब चौदह विपक्षी दलों का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी केवल थोड़ी सी भीड़ जुटाकर देश की असली आवाज नहीं बन सकते हैं। भाजपा का यह साफ कहना है कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। वे केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं और बेवजह का राजनीतिक माहौल खराब कर रहे हैं।
विपक्षी खेमे में आपसी खींचतान और बयानबाजी
महज राजनीतिक दलों का आपसी टकराव ही नहीं, बल्कि विपक्ष के भीतर भी तालमेल को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था। उस वीडियो के जरिए आप पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि जैसी कांग्रेस है, वैसी ही भाजपा भी है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई मुद्दों पर क्षेत्रीय दल अपने बलबूते पर फैसले ले रहे हैं, जिससे साझा रणनीति में अक्सर अड़चनें पैदा हो जाती हैं।
इसके बावजूद, ताजा हालात को देखते हुए राहुल गांधी ने सभी दलों को अपनी आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने की सलाह दी है। उनका यह संदेश साफ संकेत देता है कि आने वाले चौबीस से अड़तालीस घंटे देश की राजनीति के लिहाज से बहुत भारी हो सकते हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने भी दिल्ली में संभावित प्रदर्शनों के मद्देनजर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीजेपी जैसे संगठनों ने भी दिल्ली पुलिस को अल्टीमेटम दिया है कि वे जल्द से जल्द प्रदर्शन की तारीख और जगह तय करें ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
आगामी राजनीतिक रणनीति और जनता का मूड
देश की राजधानी में इस समय राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंच चुका है। एक तरफ जहां विपक्षी दल केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरने के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष भी हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी में है। आम जनता के बीच भी इस सियासी रस्साकशी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग यह देखना चाहते हैं कि राहुल गांधी का यह चौबीस घंटे वाला अलर्ट वास्तव में किस बड़े राजनीतिक भूचाल का संकेत है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और पल-पल की सटीक जानकारी आप तक पहुंचाती रहेगी।






