नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़ा एक बड़ा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर हाल ही में हुई एक घटना में एक गर्भवती महिला रिपोर्टर को धक्का देने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस पूरे मामले की आंच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी तक पहुंच गई है और उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई की बेंच ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और मामले की निष्पक्ष जांच कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
घटना के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर राहुल गांधी और उनके समर्थकों पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी के प्रवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि देश के सबसे बड़े न्यायालय परिसर में इस तरह का भीड़तंत्र और गुंडागर्दी कतई स्वीकार नहीं की जा सकती है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी की मौजूदगी में उनके समर्थकों ने नियम-कानून को ताक पर रख दिया और मीडिया कर्मियों के साथ अभद्रता की, जो सरासर अराजकता का प्रतीक है।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में सुरक्षा और मीडिया अधिकारों पर बड़ा सवाल
इस पूरी घटना ने न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और वहां काम करने वाले पत्रकारों के अधिकारों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत के भीतर इस तरह की धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण माहौल बनने से मीडिया बिरादरी में भारी रोष है। महिला पत्रकारों के संगठनों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। सीजेआई की बेंच द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस मामले में किसी भी पक्ष को आसानी से छूट मिलने वाली नहीं है।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के बीच अन्य राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। एक तरफ जहां संसद और अदालतों के बाहर राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस छिड़ गई है। महिला पत्रकारों और प्रेस क्लब के प्रतिनिधियों का कहना है कि रिपोर्टिंग करना पत्रकारों का अधिकार है और उनके साथ इस तरह की हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अब अदालत के निर्देशों के मुताबिक अपनी अगली कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज और बीजेपी का तीखा हमला
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी ने प्रेस कांफ्रेंस और बयानों के जरिए राहुल गांधी को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। पार्टी का कहना है कि देश के संविधान और कानून का सम्मान करने का दावा करने वाले लोग ही जब न्यायालय परिसर में ऐसा आचरण करेंगे, तो आम जनता क्या सीखेगी। बीजेपी नेताओं ने मांग की है कि इस घटना के वीडियो फुटेज की गहन जांच की जाए और जो भी व्यक्ति इस धक्का-मुक्की में शामिल था, उस पर तुरंत कानूनी शिकंजा कसा जाए।
ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी इस घटना को लेकर आम लोगों के बीच चर्चाएं गर्म हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर ऐसी स्थिति कैसे बन गई। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की हर एक कड़ी को बारीकी से खंगाल रही है और यह देखने की कोशिश कर रही है कि जांच एजेंसियों को शुरुआती दौर में कौन-से अहम सबूत हाथ लगे हैं। आने वाले दिनों में इस कानूनी लड़ाई और राजनीतिक ड्रामे के और अधिक बढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
जांच के बाद कानूनी कार्रवाई और आगे की दिशा
मुख्य न्यायाधीश की बेंच के निर्देश के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट में क्या खुलासे करती है। यदि राहुल गांधी या उनके सहयोगियों की सीधी संलिप्तता इस धक्का-मुक्की में पाई जाती है, तो उनकी कानूनी मुश्किलें आने वाले समय में और अधिक बढ़ सकती हैं। कोर्ट के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि न्याय के मंदिर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। द फ्रीलान्स इस मामले से जुड़े हर एक अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आपको सच से रूबरू कराता रहेगा।






