नई दिल्ली और हनुमानगढ़ से हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, किसान आंदोलन एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने राजस्थान के हनुमानगढ़ में एक बड़ी किसान पंचायत को संबोधित किया। अपने इस भाषण के दौरान उन्होंने किसानों को एकजुट होने का आह्वान किया और ट्रैक्टरों को लेकर एक खास सलाह दी। टिकैत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि किसान संगठन आने वाले दिनों में कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं।
अपनी इस सभा में राकेश टिकैत ने किसानों से दो टूक कहा कि वे अपने ट्रैक्टरों के बंपर हमेशा मजबूत रखें। उनका इशारा साफ था कि सरकार के साथ चल रहे लंबे संघर्ष और अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसानों को फिर से सड़कों पर उतरना पड़ सकता है। इस दौरान उन्होंने सीजेपी और दिल्ली मार्च से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर बात की। किसानों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
हनुमानगढ़ में राकेश टिकैत का तीखा तेवर
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में हुई इस किसान महापंचायत में हजारों की संख्या में किसान जुटे थे। राकेश टिकैत ने मंच से सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों की अनदेखी करना सरकार को भारी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता अपनी हक की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार बैठा है। पिछले कुछ महीनों में किसानों के कई मुद्दों पर सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कई मामलों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।
इसी सिलसिले में हाल ही में जंतर-मंतर पर भी सीजेपी के बैनर तले विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था। इस प्रदर्शन में राकेश टिकैत के साथ-साथ मराठा आरक्षण आंदोलन के बड़े नेता मनोज जरांगे पाटिल की एंट्री ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी थी। देश के अलग-अलग कोनों से आ रहे किसान नेताओं का यह मेलजोल इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में बड़ा संयुक्त आंदोलन खड़ा किया जा सकता है।
संसद मार्च स्थगित होने के बाद नई रणनीति
आपको बता दें कि इससे पहले किसानों ने 29 नवंबर को ट्रैक्टरों के साथ संसद मार्च निकालने का ऐलान किया था। हालांकि, बाद की बैठकों में आपसी सहमति और प्रशासनिक सुरक्षा इंतजामों को देखते हुए इस संसद मार्च को फिलहाल स्थगित कर दिया गया था। मार्च स्थगित होने के बावजूद किसानों के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। संगठन के नेता लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं और किसानों को एकजुट कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कड़ा फैसला लिया जा सके।
जमीनी स्तर पर हमारे संवाददाताओं ने पाया कि किसानों में सरकार के प्रति अब भी नाराजगी बरकरार है। एमएसपी गारंटी कानून समेत कर्ज माफी जैसे मुद्दों पर किसान लगातार मुखर हैं। टिकैत का यह बयान कि 'ट्रैक्टर के बंपर मजबूत रखो' इस बात का प्रमाण है कि किसान संगठन अपनी ताकत को कम नहीं होने देना चाहते और किसी भी आपात स्थिति के लिए वे पूरी तैयारी के साथ मैदान में डटे रहना चाहते हैं।
आगामी बैठकों और आंदोलन की रूपरेखा
किसान नेताओं की मानें तो आने वाले हफ्तों में देश भर के कई राज्यों में महापंचायतों का दौर फिर से शुरू होगा। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के किसान मुख्य रूप से शामिल होंगे। स्थानीय प्रशासन भी किसानों की इन गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि कानून और व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी आपको पल-पल की सटीक ग्राउंड रिपोर्ट देती रहेगी।





