नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट जगत में इन दिनों सुनील गावस्कर का एक बयान बहुत चर्चा में है। भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने कहा है कि सीनियर खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में उतरना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बड़े खिलाड़ियों को भी रणजी ट्रॉफी जैसे मैच खेलने चाहिए। इससे खराब फॉर्म से जूझ रहे खिलाड़ियों को अपनी तकनीक सुधारने का पूरा मौका मिलता है। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय मैचों में इन दोनों खिलाड़ियों का बल्ला उस तरह नहीं चला है जैसी उनसे उम्मीद की जाती है। इस वजह से खेल प्रेमियों और जानकारों के बीच लगातार चर्चा हो रही है कि इन्हें अपनी पुरानी लय कैसे वापस मिलेगी।
हमारे खेल संवाददाताओं ने जब इस मामले पर गहराई से पड़ताल की तो कई अहम बातें सामने आईं। पिछले कुछ महीनों में भारतीय टीम का प्रदर्शन टेस्ट मैचों में उतना अच्छा नहीं रहा है। विदेशों में और देश में भी टीम के मुख्य बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष करते दिखे हैं। सोशल मीडिया पर भी फैंस इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या अब समय आ गया है कि सीनियर खिलाड़ी घरेलू सर्किट में वापसी करें। सुनील गावस्कर ने अपने एक साक्षात्कार में इसी बात पर जोर दिया है। उनका मानना है कि सिर्फ नेट पर अभ्यास करने से वह मैच का दबाव नहीं बनता है जो असली मैदान पर खेलने से मिलता है।
घरेलू क्रिकेट से क्यों सुधरती है खिलाड़ियों की तकनीक?
क्रिकेट के जानकारों का हमेशा से यह मानना रहा है कि लाल गेंद से खेले जाने वाला घरेलू क्रिकेट असली परीक्षा होती है। जब कोई बड़ा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रन नहीं बना पाता है, तो उसे घरेलू मैचों में खेलना चाहिए। वहां गेंदबाजों का सामना करने से आंखें सेट होती हैं और क्रीज पर टिकने का आत्मविश्वास लौटता है। सुनील गावस्कर ने भी यही तर्क दिया है कि घरेलू पिचों पर लंबे समय तक बल्लेबाजी करने से मानसिक मजबूती मिलती है। पहले के समय में भी महान खिलाड़ी खराब फॉर्म से निकलने के लिए रणजी या दलीप ट्रॉफी के मैच खेला करते थे। इससे उन्हें अपनी कमियों को दूर करने का पूरा समय और शांत माहौल मिलता है।
वर्तमान में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई भी इस बात पर विचार कर रहा है। बोर्ड के अधिकारी यह चाहते हैं कि जब भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खाली हों, वे अपने-अपने राज्यों की टीमों के लिए घरेलू मैच खेलें। इससे घरेलू टूर्नामेंट का मान भी बढ़ता है और युवा खिलाड़ियों को दिग्गज साठियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका मिलता है। हालांकि, आधुनिक समय के व्यस्त क्रिकेट कैलेंडर और वर्कलोड मैनेजमेंट के कारण खिलाड़ियों के लिए सभी मैच खेलना आसान नहीं होता है। लगातार यात्रा करने और लगातार मैच खेलने से शरीर पर बहुत असर पड़ता है, जिसके कारण खिलाड़ी आराम करना पसंद करते हैं।
प्रशंसकों और खेल पंडितों की क्या है इस पर राय?
सुनील गावस्कर के इस सुझाव पर खेल प्रेमियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां बहुत से फैंस का कहना है कि गावस्कर की बात बिल्कुल सही है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सीनियर खिलाड़ियों को आराम की भी जरूरत होती है। सोशल मीडिया पर खेल प्रेमियों का एक वर्ग यह कह रहा है कि अगर बड़े खिलाड़ी घरेलू मैच खेलेंगे तो स्टेडियम में दर्शकों की संख्या बढ़ेगी। इससे स्थानीय टूर्नामेंट को भी वह पहचान मिलेगी जिसकी उन्हें अक्सर कमी खलती है। मैदान पर रोहित और विराट जैसे सितारों को खेलते देखना युवा खिलाड़ियों के लिए भी किसी बड़े सबक से कम नहीं होगा।
दूसरी ओर, कुछ पूर्व क्रिकेटरों का यह भी कहना है कि इन खिलाड़ियों ने देश के लिए बहुत मैच जिताए हैं। उन्हें अपनी फिटनेस और जरूरत के हिसाब से फैसले लेने की पूरी आजादी होनी चाहिए। उन पर घरेलू मैच खेलने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि उनका मुख्य लक्ष्य देश के लिए बड़े टूर्नामेंट जीतना है। गावस्कर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब टीम इंडिया आगामी सीरीज की तैयारी कर रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चयनकर्ता और खिलाड़ी इस सलाह पर कोई गंभीर कदम उठाते हैं या नहीं।
आगामी सीरीज और टीम इंडिया की आगे की रणनीति
भारतीय टीम के सामने आने वाले महीनों में कई अहम मुकाबले हैं। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप और अन्य बड़ी सीरीज को ध्यान में रखते हुए टीम प्रबंधन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है। हर खिलाड़ी से यह उम्मीद की जा रही है कि वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में रहे। सुनील गावस्कर की यह सलाह केवल एक सुझाव नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट के भले के लिए दिया गया एक गंभीर संदेश है। हमारी ग्राउंड टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस पर कोई आधिकारिक फैसला या खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया सामने आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।




