नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले इन दिनों राजनीति के गलियारों में सबसे चर्चा में रहने वाले चेहरों में से एक हैं। कभी संसद के अंदर तीखे तेवर तो कभी सड़क पर आम लोगों के बीच उनकी मौजूदगी उन्हें हमेशा सुर्खियों में रखती है। हाल के दिनों में उनके बयानों और राजनीतिक कदमों ने राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। चाहे शिवसेना की असली पहचान का मामला हो या फिर केंद्र सरकार के किसी अहम बिल पर रुख साफ करने की बात हो, सुप्रिया सुले हर जगह बेहद सधे हुए राजनीतिक अंदाज में नजर आ रही हैं।
कुछ दिन पहले ही सुप्रिया सुले की बेटी के रिसेप्शन का एक बड़ा कार्यक्रम दिल्ली में हुआ था। इस हाई-प्रोफाइल रिसेप्शन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत सत्ता और विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता पहुंचे थे। इस कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा बटोरी क्योंकि इसमें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर नेताओं का जमावड़ा देखने को मिला था। राजनीतिक विश्लेषक इसे व्यक्तिगत संबंधों और राजनीतिक शिष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण मान रहे हैं।
शिवसेना विवाद और परिसीमन बिल पर क्या बोलीं सुप्रिया सुले
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना किसकी है, इस सवाल पर सुप्रिया सुले का बयान काफी चर्चा में रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए। इसके साथ ही, आने वाले दिनों में संसद में आने वाले परिसीमन बिल को लेकर भी उन्होंने बड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि उनकी पार्टी देश हित के मुद्दों पर सरकार का समर्थन करने से पीछे नहीं हटेगी, हालांकि उन्होंने एनडीए में शामिल होने की किसी भी संभावना से साफ इंकार किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुप्रिया सुले का यह रुख बहुत ही नपा-तुला है। वह विपक्ष की एकता का हिस्सा रहते हुए भी जनहित या विकास के मुद्दों पर सरकार के साथ संवाद का रास्ता खुला रखना चाहती हैं। शरद पवार की पार्टी का यह रुख आने वाले संसद सत्र में काफी अहम माना जा रहा है। दिल्ली में हुई एक ऑल पार्टी मीटिंग के दौरान जब सुप्रिया सुले ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैर छुए, तो उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया। इस वीडियो को लेकर लोगों ने भारतीय संस्कृति और राजनीतिक शिष्टाचार की जमकर तारीफ की।
सड़क हादसे से लेकर दिल्ली की बैठकों तक का सफर
राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच सुप्रिया सुले के साथ हाल ही में एक और घटना जुड़ी जब एक्सप्रेसवे पर उनकी कार का मामूली एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में उन्हें कोई चोट नहीं आई, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी दिखाते हुए टक्कर मारने वाली गाड़ी का नंबर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया ताकि प्रशासन उचित कार्रवाई कर सके। इस घटना ने भी मीडिया का खूब ध्यान खींचा और समर्थकों ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
कुल मिलाकर देखा जाए तो सुप्रिया सुले इस समय केवल महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बनी हुई हैं। चाहे संसद के अंदर नीतिगत फैसले हों या फिर जमीन पर जनता से जुड़े मुद्दे, उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड रिपोर्ट से साफ है कि आने वाले दिनों में उनकी हर एक चाल और बयान पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर रहने वाली है, जो राज्य और केंद्र दोनों की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।






