चेन्नई/ग्राउंड ब्यूरो — तमिलनाडु में इन दिनों उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए छात्रों और उनके परिवारों के बीच एजुकेशन लोन यानी लेने की होड़ सी मची है। कॉलेज की भारी फीस भरने के लिए मध्यम वर्गीय परिवार अब बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स पर भी इस तमिल शब्द को लेकर पिछले चौबीस घंटों में भारी हलचल देखने को मिली है। हर साल लाखों छात्र स्कूल की पढ़ाई पूरी करके कॉलेज में दाखिला लेते हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग, मेडिकल और कला जैसे कोर्स की फीस भरना आम परिवार के लिए बहुत कठिन हो गया है।
बैंक अधिकारियों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार लोन के कागजात जमा कराने वालों की कतार लंबी हो गई है। छात्र और उनके माता-पिता बैंक अधिकारियों से मिलकर लोन पास कराने की गुहार लगा रहे हैं। सरकार की तरफ से भी छात्रों को बिना किसी बड़ी रुकावट के लोन देने के निर्देश दिए गए हैं। कई निजी और सरकारी बैंक अब ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी आवेदन स्वीकार कर रहे हैं। इससे छात्रों का समय बच रहा है और वे बिना कॉलेज की लाइन में लगे घर बैठे अपनी अर्जी दे पा रहे हैं।
बैंकों में बढ़ रही है लोन के लिए छात्रों की भीड़
राजधानी चेन्नई से लेकर मदुरै और कोयंबटूर तक के राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं में इन दिनों युवाओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। हर कोई अपने सपनों की डिग्री पूरी करने के लिए बैंक के लोन मैनेजर से बात करना चाहता है। कई छात्रों का कहना है कि उनके माता-पिता के पास एक मुश्त लाख रुपये देने की ताकत नहीं है। ऐसे हालात में बैंक का यह लोन उनके लिए एक बड़े सहारे की तरह सामने आया है। बैंक भी कागजी कार्रवाई को आसान बनाने का दावा कर रहे हैं ताकि जरूरतमंद छात्रों को समय पर पैसा मिल सके।
हालांकि लोन मिलने की इस प्रक्रिया में कई बार छात्रों को लंबी कागजी कानूनी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। बैंक मैनेजर छात्रों से आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, कॉलेज का दाखिला पत्र और पिछले अंकों की सूची मांगते हैं। कई बार दस्तावेज पूरे न होने पर छात्रों को कई दिनों तक बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस परेशानी को दूर करने के लिए कुछ जिलों में विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में एक ही छत के नीचे सभी औपचारिकताएं पूरी करके लोन को मंजूरी दी जा रही है।
सरकार की योजनाओं से मिल रही है बड़ी राहत
तमिलनाडु सरकार और केंद्र सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जो छात्रों को लोन पर ब्याज की छूट देती हैं। इन योजनाओं की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण इलाकों के छात्र भी आगे आ रहे हैं। पहले के मुकाबले अब गांवों के युवा भी डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना देखने लगे हैं। वे बैंक लोन की मदद से बड़े शहरों के नामी कॉलेजों में दाखिला ले रहे हैं। शिक्षा के प्रति इस बढ़ती जागरूकता ने राज्य की तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर लोन मिलने से न केवल छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर पाते हैं बल्कि उनका भविष्य भी सुरक्षित हो जाता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद जब वे नौकरी लगते हैं तो धीरे-धीरे बैंक का पैसा वापस चुका देते हैं। यह चक्र देश की अर्थव्यवस्था और शिक्षा के स्तर दोनों को मजबूत कर रहा है। द फ्रीलान्स की टीम ने जब जमीनी स्तर पर पड़ताल की तो पाया कि बैंक कर्मचारियों का रवैया भी अब पहले से ज्यादा मददगार हुआ है।
समय पर भुगतान और भविष्य की नई उम्मीदें
एजुकेशन लोन लेने वाले छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी पाने की होती है। बैंक भी छात्रों को छह महीने से एक साल का समय देते हैं ताकि वे नौकरी ढूंढ सकें। जैसे ही छात्र की नौकरी लगती है, उसकी किस्तें कटनी शुरू हो जाती हैं। जिन युवाओं को सही समय पर लोन मिल गया है वे अपनी कक्षाओं में मन लगाकर पढ़ रहे हैं। वे अपने माता-पिता के कंधों से पैसों का बोझ कम करने में कामयाब हो रहे हैं।






