वाशिंगटन और नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — अमेरिका की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटबारी में इस समय हलचल बहुत तेज है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता के नियम को पूरी तरह से बरकरार रखा है। इस अदालत के फैसले से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। ट्रंप लंबे समय से इस नियम में बदलाव करने की मांग कर रहे थे। अदालत के इस साफ रुख के बाद अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों को पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही नागरिकता मिलती रहेगी।
इस बीच अमेरिकी राजनीति के गलियारों से भारत के लिए भी एक नई चर्चा सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। हालांकि, अपने ही बयान में उन्होंने यह भी जोड़ा कि शायद उन्हें ऐसा करने की जरूरत ही न पड़े। भारत सरकार इस पूरे मामले पर बहुत बारीकी से नजर बनाए हुए है। अमेरिकी बयानों का भारतीय व्यापार और आयात पर क्या असर होगा, इस पर विशेषज्ञों की नजर टिकी है।
जन्मजात नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अमेरिकी न्यायपालिका के इस फैसले को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बड़ी जीत बताया है। ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल के दौरान अवैध प्रवासियों के बच्चों को मिलने वाली नागरिकता पर रोक लगाने की पूरी कोशिश की थी। कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उन सभी परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो अमेरिका में बस चुके हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अमेरिकी संविधान की मूल भावना को मजबूत बल मिला है।
भारतीय संदर्भ में बात करें तो अमेरिकी नीतियों का असर सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट पर पड़ता है। ट्रंप के टैरिफ वाले बयान ने भारतीय तेल आयातकों के बीच हलचल बढ़ा दी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है। अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने हमेशा अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में अमेरिका की तरफ से इस मोर्चे पर क्या नए कदम उठाए जाते हैं।
तिरुपति में इस्लामिक यूनिवर्सिटी को लेकर बढ़ता विवाद
अंतरराष्ट्रीय खबरों के बीच देश के भीतर भी एक बड़ा धार्मिक और सामाजिक मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है। आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध शहर तिरुपति में एक इस्लामिक यूनिवर्सिटी को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। विभिन्न स्थानीय संगठन और राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आमने-सामने आ रहे हैं। इस विवाद के कारण इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक चौकसी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अशांति न फैले।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासन को पहले ही स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। विश्वविद्यालय की स्थापना और उससे जुड़े नियमों को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी स्थिति को शांत करने के लिए लगातार स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर स्थानीय अदालत या सरकार की तरफ से क्या नया निर्देश आता है, इस पर सभी की नजर है।
भारत-अमेरिका रिश्तों और घरेलू राजनीति पर असर
अमेरिका में अदालती फैसलों और चुनावी बयानों का दौर ऐसे समय में चल रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। डोनाल्ड ट्रंप के तेवर हमेशा से आक्रामक रहे हैं। भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों पर उनके नए बयान ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि देश के हित सर्वोपरि हैं और ऊर्जा आयात पर फैसले राष्ट्रीय जरूरतों के आधार पर लिए जाएंगे।
दूसरी तरफ तिरुपति का मामला क्षेत्रीय राजनीति में तूल पकड़ता जा रहा है। कुल मिलाकर, चाहे अमेरिका का नागरिकता कानून हो या भारत के किसी शहर का स्थानीय विवाद, दोनों ही मुद्दे आम जनता के बीच मुख्य चर्चा का विषय बने हुए हैं। 'द फ्रीलान्स' की टीम इन सभी घटनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है और जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।




