नई दिल्ली/मुंबई — आज डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केवल एक ही शब्द सबसे ज्यादा खोजा जा रहा है और वह है 'वीडियो'। सुबह से ही गूगल ट्रेंड्स में वीडियो से जुड़े कई अलग-अलग मामले छाए हुए हैं। एक तरफ जहां हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के आखिरी दिनों के वीडियो ने हर किसी को भावुक कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली की सड़कों पर हुए राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान बने वीडियो कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने इन तमाम वायरल हो रहे वीडियो की तह तक जाने के लिए डिजिटल फुटेज, पुलिस के बयानों और चश्मदीदों से बात करके पूरी स्थिति की जमीनी पड़ताल की है।
सबसे पहले बात करते हैं उस वीडियो की जिसने देश के कला जगत और उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से महज चार दिन पहले का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह ड्रम बजाते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में वह हंसते-मुस्कुराते हुए कहते दिखते हैं कि 'कल रहूं या नहीं'। उनका यह आखिरी वीडियो अब सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। उनके निधन के बाद से राजनेताओं और फिल्मी हस्तियों ने सोशल मीडिया पर अपने पुराने संस्मरण साझा किए हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी भावुक होकर लिखा कि वह अपने दादा जैसी शख्सियत को कभी नहीं भूलेंगी और उन्हें हमेशा याद रखेंगी।
दिल्ली पुलिस की सख्ती और महिला पुलिसकर्मियों से बदसलूकी के वीडियो
राजधानी दिल्ली में राजनीतिक दलों के प्रदर्शनों के दौरान तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी के एक बड़े प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की किए जाने के मामले सामने आए हैं। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर कई वीडियो सार्वजनिक किए हैं। इन वीडियो क्लिप्स में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन वीडियो साक्ष्यों के आधार पर ही उन सभी लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने कानून को हाथ में लेने की कोशिश की थी।
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और झड़पों के दौरान भी कई ऐसे वीडियो रिकॉर्ड हुए जिन्होंने पुलिस बल की कार्यशैली पर चर्चा छेड़ दी है। मारपीट और हंगामे वाले इन वीडियो के सामने आने के बाद ड्यूटी पर तैनात एक हेड कांस्टेबल ने मीडिया के सामने खुलकर अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि वर्दी पर इस तरह का हमला और उनके साथियों के साथ मारपीट बहुत बड़ी बेइज्जती है। पुलिस महकमे के भीतर इन वीडियो को लेकर भारी रोष देखा जा रहा है। अधिकारी अब एक-एक वीडियो को बहुत बारीकी से फ्रेम दर फ्रेम खंगाल रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जा सके।
सीजेपी प्रोटेस्ट और सार्वजनिक मंचों पर उठ रहे तीखे सवाल
वीडियो के जरिए राजनीति और विरोध प्रदर्शनों की आग केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। हाल ही में हुए सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान वक्ताओं और कार्यकर्ताओं के तीखे भाषणों के वीडियो भी इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इस दौरान नेहा बोरा द्वारा बीजेपी और आरएसएस की नीतियों पर दिए गए बयानों के वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इन तमाम वीडियो फुटेज से यह साफ जाहिर होता है कि आज के दौर में विरोध जताने और अपनी बात कहने का सबसे बड़ा हथियार डिजिटल वीडियो बन चुका है। चाहे वह मनोरंजन जगत की कोई दुखद विदाई हो या फिर सड़क पर होने वाले राजनीतिक संघर्ष, हर जगह कैमरे की नजर सब कुछ रिकॉर्ड कर रही है।
आम जनता और डिजिटल यूजर्स इन तमाम वीडियो को बहुत सावधानी से देख रहे हैं और अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। पुलिस प्रशासन भी अब किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए वीडियोग्राफी को अपना सबसे बड़ा सबूत मान रहा है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह स्पष्ट हो जाता है कि वीडियो के माध्यम से सूचनाएं जितनी तेजी से फैलती हैं, उतनी ही जल्दी सच और झूठ की परतें भी उधड़ने लगती हैं। आने वाले दिनों में इन वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कई बड़े कानूनी कदम उठाए जाने की पूरी संभावना बनी हुई है, जिस पर हमारी पैनी नजर लगातार बनी रहेगी।





