नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में राजनीति और न्याय की मांग तेज होती जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने एक बार फिर इस मामले को उठाते हुए राज्य सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधा सवाल पूछा है कि इस सनसनीखेज मामले में आखिर सरकार किसे बचाना चाहती है और कार्रवाई में इतनी लीपापोती क्यों की जा रही है।
पवन खेड़ा ने अपने बयान में कहा कि मामले की जांच और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने में जिस तरह की सुस्ती और कोताही बरती गई है, वह कई तरह के संदेह पैदा करती है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन थोड़ा इंतज़ार कर लेता और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होने देता, तो जनता के मन में यह अविश्वास पैदा नहीं होता कि अपराधियों को बचाने की कोशिश हो रही है।
उत्तराखंड की न्याय व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाया था। एक रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट की हत्या और उसके बाद सबूत मिटाने के लिए रिसॉर्ट पर बुलडोज़र चलाए जाने की घटना ने शुरुआत से ही जनता का गुस्सा भड़का दिया था। जनता और पीड़ित परिवार लगातार यही मांग कर रहे हैं कि इस मामले के असली और बड़े चेहरों को बेनकाब किया जाए, जो पर्दे के पीछे से आरोपियों को संरक्षण दे रहे थे।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस मामले से जुड़े कई गवाहों और बयानों को लेकर राजनीतिक दलों में खींचतान मची हुई है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है ताकि कुछ रसूखदार लोगों के नाम सामने न आ सकें। पीड़ित परिवार ने भी कई बार जांच की दिशा पर असंतोष जताया है और उच्च स्तरीय निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग दोहराई है।
सबूत मिटाने और जल्दबाजी पर राजनीतिक बयानबाजी
घटना के शुरुआती दिनों से ही यह आरोप लगता रहा है कि रिसॉर्ट पर बुलडोज़र चलाकर अहम सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी। पवन खेड़ा ने इसी बात को आधार बनाते हुए कहा कि जब मुख्य आरोपी का नाम सामने आया, तो प्रशासन को बहुत सावधानी से कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन इसके विपरीत जल्दबाजी में ऐसी कार्रवाई की गई जिससे जांच प्रभावित हो सकती थी। उन्होंने कहा कि न्याय सिर्फ मिलना नहीं चाहिए, बल्कि मिलना हुआ दिखना भी चाहिए।
मैदान से लेकर सोशल मीडिया तक इस मामले को लेकर आम नागरिकों में भारी रोष है। लोग लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अंकिता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं और दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग कर रहे हैं। इस मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर लगातार उठ रहे सवालों के बाद सरकार के सामने भी अपनी साख बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे की राह
द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस मामले के जमीनी हालात का जायजा लिया, तो यह पाया कि स्थानीय लोग आज भी उस दर्दनाक रात को भूले नहीं हैं। लोगों का कहना है कि जब तक इस पूरे षड्यंत्र में शामिल हर एक बड़े चेहरे का पर्दाफाश नहीं होता, तब तक पीड़ित परिवार और समाज को शांति नहीं मिलेगी। राजनीतिक दलों की बयानबाजी के बीच आम जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस मामले में क्या और कब कड़ा फैसला सुनाती है।




