द फ्रीलान्स की टीम लगातार सोशल मीडिया पर चल रहे उन ट्रेंड्स की पड़ताल कर रही है जिन पर आम जनता के बीच भारी भ्रम फैला हुआ है। पिछले कुछ दिनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह सवाल बहुत तेजी से उछल रहा है कि मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी के पास भारतीय पासपोर्ट होने के बावजूद वे लंबे समय से जर्मनी में कैसे रह पा रहे हैं। इस सवाल को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं और लोग उनकी नागरिकता को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। हमने इस मामले की तह तक जाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रवास कानूनों और जर्मनी के वीजा नियमों की पूरी पड़ताल की है ताकि पाठकों के सामने साफ तस्वीर आ सके।
किसी भी देश की नागरिकता लेना और उस देश में कानूनी रूप से निवास करना दो बिल्कुल अलग बातें होती हैं। भारत जैसे देशों में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है इसलिए यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में बसता है, तो वह आमतौर पर अपना भारतीय पासपोर्ट ही अपने पास रखता है। ध्रुव राठी के मामले में भी यही स्थिति सामने आई है जहाँ उन्होंने खुद अपना भारतीय पासपोर्ट सार्वजनिक रूप से दिखाकर यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने अभी तक विदेशी नागरिकता नहीं ली है। इसके बावजूद वे कानूनी रूप से जर्मनी में रह रहे हैं क्योंकि आधुनिक दुनिया में निवास करने के लिए सिर्फ नागरिकता ही एकमात्र जरिया नहीं होता है बल्कि वैध वीजा और वर्क परमिट भी इसकी अनुमति देते हैं।
जर्मनी में बिना नागरिकता लंबे समय तक रहने के कानूनी रास्ते
विदेशी नागरिकों के लिए जर्मनी में लंबे समय तक रहने के कई कानूनी और वैध रास्ते मौजूद हैं जिनके तहत वे बिना वहां की नागरिकता हासिल किए बरसों-बरस निवास कर सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख माध्यम रोजगार वीजा, विशेष पेशेवर वीजा, उच्च शिक्षा से जुड़े छात्र वीजा और फ्रीलांस या बिजनेस वीजा होते हैं। जर्मनी की सरकार उन कुशल पेशेवरों और जानकारों को अपने यहाँ रहने की अनुमति देती है जो वहां की अर्थव्यवस्था या तकनीकी क्षेत्र में योगदान देते हैं। इसके अलावा जर्मनी में लंबे समय तक रहने के बाद लोगों को स्थायी निवास यानी परमानेंट रेजीडेंसी कार्ड भी मिल जाता है जिसके तहत नागरिकता बदले बिना भी वहां अनिश्चितकाल तक रहा जा सकता है।
प्रवास विशेषज्ञों के अनुसार यूरोपीय देशों में वर्क वीजा या बिजनेस वीजा के आधार पर रहना एक आम प्रक्रिया है और इसके लिए स्थानीय पासपोर्ट होना अनिवार्य नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपने देश के वैध पासपोर्ट पर ही विदेशी वीजा लगवाकर दूसरे देशों में सालों तक काम कर सकता है, टैक्स भर सकता है और मकान किराए पर ले सकता है। ध्रुव राठी एक स्वतंत्र डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और यूट्यूबर हैं जो अपने ऑनलाइन काम के सिलसिले में लंबे समय से जर्मनी में बसे हुए हैं। उनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट होने के साथ-साथ संभवतः जर्मन कानूनों के अनुसार कोई वैध दीर्घकालिक निवास अनुमति या वर्क वीजा होगा जो उन्हें वहां रहने की कानूनी वैधता देता है।
विदेशी धरती से राजनीतिक टिप्पणियां और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
इस पूरे विवाद का दूसरा पहलू यह भी है कि क्या कोई विदेशी नागरिक किसी अन्य देश में बैठकर भारत की राजनीति पर खुलकर बोल सकता है या प्रदर्शन कर सकता है। भारतीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में रहकर अपने देश के राजनीतिक हालात पर राय रखता है, तो उस पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं होता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार हर नागरिक को मिलता है भले ही वह अपने देश की सीमा के भीतर हो या फिर दुनिया के किसी भी दूसरे कोने में बैठा हो। जर्मनी जैसे लोकतांत्रिक देशों में अभिव्यक्ति की आजादी को बहुत उच्च स्थान दिया गया है, जहां लोग अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र माने जाते हैं।
द फ्रीलान्स की इस जमीनी और कानूनी पड़ताल से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि ध्रुव राठी के जर्मनी में रहने को लेकर जो असमंजस फैलाया जा रहा है, वह अधूरा ज्ञान और नियमों की गलत समझ का परिणाम है। उनके पास भारतीय पासपोर्ट का होना और जर्मनी में निवास करना दोनों बातें कानूनी रूप से पूरी तरह संभव हैं क्योंकि दुनिया भर के देश कुशल प्रवासियों और डिजिटल कामगारों को विशेष वीजा के जरिए रहने की छूट देते हैं। सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की जांच किए किसी की नागरिकता पर सवाल उठाना सिर्फ सनसनी फैलाने का एक तरीका मात्र है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे मामलों में केवल स्थापित और कानूनी दस्तावेजों पर ही भरोसा करें।






