अहमदाबाद और गांधीनगर से हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात की राजनीति में इस समय हलचल बहुत तेज है। हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय उपचुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपनी ताकत साबित कर दी है। गांधीनगर नगर निगम के चुनाव में कुल 44 सीटें थीं। इनमें से 38 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों ने बड़ी जीत दर्ज की है। इस शानदार प्रदर्शन से पार्टी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है और विपक्षी दल एक बार फिर सकते में आ गए हैं।
चुनावी मैदान में इस बार मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा था। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी अपनी जमीन बचाने की कोशिश में जुटी थी, वहीं आम आदमी पार्टी भी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा कर रही थी। लेकिन चुनावी नतीजों ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। गांधीनगर में कांग्रेस पार्टी दूसरे स्थान पर रही, लेकिन सीटों का अंतर बहुत ज्यादा था। वहीं, आम आदमी पार्टी इस बार भी अपना खाता खोलने में पूरी तरह नाकामयाब साबित हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी इलाकों में जनता का भरोसा अभी भी सत्ताधारी पार्टी के साथ मजबूती से बना हुआ है।
गांधीनगर नगर निगम में बीजेपी का दबदबा और आप की विफलता
मतदान के दौरान कई जगहों पर छिटपुट घटनाएं भी देखने को मिलीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान मुद्दों की बजाय राजनीतिक दलों के बीच तीखे जुबानी हमले ज्यादा देखने को मिले। इसके बावजूद मतदाताओं ने विकास के नाम पर अपना फैसला सुनाया। गांधीनगर निगम की इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर भी विपक्षी दल बीजेपी के मजबूत सांगठनिक ढांचे को मात देने में असफल साबित हो रहे हैं। कांग्रेस और अन्य दलों के नेता अब इन कमियों की समीक्षा करने की बात कह रहे हैं, लेकिन जमीन पर उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती दिख रही है।
राजनीतिक उठापटक के बीच राज्य में कानूनी मोर्चे पर भी बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। कांग्रेस पार्टी के चर्चित विधायक जिग्नेश मेवाणी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, गांधीनगर में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ पिछले चौबीस घंटों के भीतर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उनकी किसी बात को लेकर स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी बहस हो गई थी। पुलिस का कहना है कि ड्यूटी में बाधा डालने और नियमों का उल्लंघन करने के मामले में यह कार्रवाई की गई है।
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी पर 24 घंटे में दो एफआईआर
विधायक जिग्नेश मेवाणी और उनके समर्थकों का हालांकि यह आरोप है कि पुलिस सत्ता के दबाव में आकर विपक्ष के चुनिंदा नेताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने इस कानूनी कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया है और इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है। पुलिस थानों के बाहर दिनभर राजनीतिक गहमागहमी का माहौल बना रहा। कांग्रेस पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी अपने विधायक के समर्थन में मैदान में उतर आए हैं और राज्य सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों से बात की, तो उन्होंने मिलाजुला रिएक्शन दिया। आम जनता का एक बड़ा वर्ग महंगाई और स्थानीय विकास के मुद्दों पर बात करना चाहता है, लेकिन राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान इस समय चुनावी जीत-हार और कानूनी मामलों पर ही केंद्रित है। पुलिस और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
राजनीतिक हलचल और पुलिस-प्रशासन की कड़ी चौकसी
आने वाले दिनों में गुजरात की राजनीति में इन दोनों घटनाओं का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। एक तरफ बीजेपी अपनी इस जीत को भुनाने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी जिग्नेश मेवाणी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगा और आपको आगे भी हर बारीक अपडेट जमीन से सीधे पहुंचाता रहेगा।












