इस्लामाबाद/नई दिल्ली — पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के परिवार पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। हाल ही में आधी रात को पुलिस बल ने इमरान खान के घर पर धावा बोला और उनके परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद देश की राजनीति में हड़कंप मच गया है और विपक्षी दल सरकार पर तानाशाही का आरोप लगा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई में पुलिस के करीब दो सौ जवान शामिल थे। आगामी राजनीतिक मार्च और प्रदर्शनों से पहले सरकार किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। पुलिस ने इमरान खान की तीनों बहनों को हिरासत में ले लिया है ताकि विरोध प्रदर्शनों की धार को कमजोर किया जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि ये कदम कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए हैं।
जेल के भीतर और बाहर लगातार बढ़ रहा संघर्ष
एक तरफ जहां इमरान खान पिछले तीन साल से जेल की सजा काट रहे हैं, वहीं उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। पाकिस्तान सरकार के तमाम राजनीतिक दांव अब तक फेल साबित हुए हैं। जेल से ही इमरान खान अपने समर्थकों को लगातार संदेश भेज रहे हैं। जानकारों का मानना है कि सरकार की इन सख्ती भरी कार्रवाइयों से इमरान खान की राजनीतिक स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।
बीते दिनों तब और नाटक देखने को मिला जब अचानक तबियत बिगड़ने पर इमरान खान को अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, महज कुछ ही घंटों के भीतर उनका इलाज पूरा कर उन्हें वापस जेल की अंधेरी कोठरी में भेज दिया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार के इस कदम की चौतरफा आलोचना हो रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार इमरान खान की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है।
विपक्षी दलों की बयानबाजी और क्षेत्रीय राजनीति
इस पूरे घटनाक्रम के बीच देश के अन्य हिस्सों में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने देश की कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
दूसरी ओर, मनोरंजन जगत से भी एक दिलचस्प खबर सामने आई है। अभिनेता इरफान खान की फिल्म 'द लास्ट टेनेंट' लंबे इंतजार के बाद चर्चा में है। हालांकि इसका पाकिस्तान के राजनीतिक घटनाक्रम से कोई सीधा ताल्लुक नहीं है, लेकिन मीडिया गलियारों में यह विषय भी काफी सुर्खियां बटोर रहा है। सांस्कृतिक और राजनीतिक खबरें इन दिनों सोशल मीडिया पर एक साथ ट्रेंड कर रही हैं।
प्रशासनिक तैयारियां और जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय स्तर पर आम जनता इन घटनाओं को बहुत करीब से देख रही है। पाकिस्तान के कई शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। बाजार में इस राजनीतिक उथल-पुथल का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। आम लोग महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से पहले ही परेशान हैं, और अब इस नए विवाद ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान का राजनीतिक संकट और गहरा सकता है। इमरान खान के समर्थकों ने सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। पुलिस और प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान की सियासत किस करवट बैठती है।



