चेन्नई के कई निचले इलाकों में मानसून और भारी बारिश के बाद पानी भरने की समस्या लगातार बनी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर तमिलनाडु के मंत्री ने मीडिया के सामने आकर हालात पर अपनी सफाई दी है। पल्लीकरनई और मडिपाक्कम जैसे इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या से स्थानीय लोग बहुत परेशान हैं। मंत्री ने दावा किया है कि सरकार पानी की निकासी के लिए तेजी से काम कर रही है और आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह सुधर जाएगी।
लेकिन इस बीच मंत्री एक अलग ही सियासी विवाद में उलझते नजर आए। वह हाल ही में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही नर्सों के बीच उनका समर्थन करने पहुंचे थे। मंत्री का मकसद वहां जाकर सरकार की तरफ से उनकी बातें सुनने का भरोसा देना था। लेकिन मंच पर पहुंचते ही माहौल अचानक बदल गया और वहां मौजूद नर्सों ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के खिलाफ जोरदार नारे लगाने शुरू कर दिए।
पल्लीकरनई और मडिपाक्कम में जलभराव क्यों बना बड़ा सिरदर्द
चेन्नई के पल्लीकरनई और मडिपाक्कम इलाकों में जरा सी बारिश होने पर भी सड़कें तालाब बन जाती हैं। पानी लोगों के घरों के अंदर तक घुस जाता है जिससे जनजीवन पूरी तरह ठप हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई सालों से जल निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। मंत्री ने इन शिकायतों पर बोलते हुए कहा कि पिछली सरकारों के समय की गलत प्लानिंग के कारण यह समस्या आज विकराल रूप ले चुकी है।
मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा कि मौजूदा सरकार ने इन इलाकों में पानी की निकासी के लिए नए ड्रेनेज प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन लोगों की तकलीफों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। हालांकि जमीन पर उतरे लोगों का मानना है कि केवल वादों से काम नहीं चलेगा बल्कि धरातल पर ठोस और तुरंत कदम उठाने की सख्त जरूरत है।
नर्सों के विरोध प्रदर्शन के बीच अचानक असहज हुए मंत्री
दूसरी तरफ, राजधानी चेन्नई में नर्सों का यह विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती बन गया है। जब मंत्री प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे तो उन्हें लगा था कि वे आसानी से नर्सों से बातचीत कर मामला सुलझा लेंगे। लेकिन प्रदर्शनकारी नर्सें अपनी मांगों को लेकर इतनी गुस्से में थीं कि उन्होंने मंत्री के सामने ही मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
अचानक लगे इन नारों से मंत्री महोदय कुछ पलों के लिए पूरी तरह सन्न रह गए और समझ नहीं पाए कि क्या प्रतिक्रिया दें। कैमरे के सामने हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। विपक्षी दल इस मौके का पूरा फायदा उठाकर सत्तारूढ़ डीएमके सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार आम जनता और कर्मचारियों के गुस्से को दबाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ रही हलचल और आगे की राह
इन दोनों घटनाओं ने तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर गर्मी पैदा कर दी है। एक तरफ शहरी बुनियादी ढांचे की बदहाली जनता के बीच बड़ा गुस्सा बन रही है तो दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारी भी सड़कों पर उतर रहे हैं। मंत्री के सामने अब इन दोनों मोर्चों पर खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है। जनता अब सिर्फ आश्वासनों पर भरोसा करने के मूड में बिल्कुल नहीं दिख रही है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि अगर समय रहते इन समस्याओं का पक्का समाधान नहीं निकाला गया तो राजनीतिक नुकसान और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन जलभराव की समस्या से कैसे निपटता है और नाराज कर्मचारियों को कैसे शांत करता है। जनता की निगाहें अब पूरी तरह सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।



