काठमांडू/गोरखा — नेपाल की पहाड़ियों में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने एक बार फिर निचले इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। नेपाल के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। इस फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से करीब एक सौ से ज्यादा घर पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों ने फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर चार हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है। अचानक आए इस सैलाब ने दर्जनों कच्चे घरों और छोटे पुलों को पूरी तरह बहा दिया है, जिससे पहाड़ी बस्तियों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है।
नेपाल में मची इस तबाही का सीधा असर अब भारत के मैदानी इलाकों पर दिखने लगा है। गंडक नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने वाल्मीकि नगर बराज से जुड़े इलाकों में विशेष चौकसी बरतने के निर्देश जारी किए हैं। नेपाल के मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी कर दी थी, लेकिन पानी के अचानक तेज बहाव के कारण लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
गोरखा और बूढ़ी गंडकी में तबाही की पूरी दास्तान
गोरखा जिले के ऊपरी इलाकों में हुई भारी मानसूनी बारिश के बाद बूढ़ी गंडकी नदी का रूप बेहद भयानक हो गया है। नदी का जलस्तर कुछ ही घंटों में खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, जिससे तटवर्ती गांवों में अफरा-तफरी मच गई। पानी के तेज बहाव के आगे कई मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इतनी तेजी से पानी का स्तर बढ़ते हुए पहले कभी नहीं देखा था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कम से कम एक सौ घर पानी में डूब चुके हैं और दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे शरण लेने को मजबूर हैं। नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने और घायलों को चिकित्सीय सहायता देने के लिए अपने विशेष विमानों और हेलीकॉप्टरों को काम पर लगाया है।
इस आपदा के बाद नेपाल की नदियों के पानी पर निर्भर रहने वाले भारत के उत्तरी राज्यों में भी धड़कनें तेज हो गई हैं। बिहार के पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के तटबंधों पर विशेष नजर रखी जा रही है। अभियंत्रण विभाग के अधिकारी लगातार जलस्तर की ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि नेपाल में जब भी इस तरह की अचानक बाढ़ आती है, तो भारत के तटीय इलाकों को संभलने के लिए बहुत कम वक्त मिलता है। यही वजह है कि नेपाल और भारत के बीच जल प्रबंधन और बाढ़ की अग्रिम चेतावनी प्रणाली को और ज्यादा मजबूत करने की मांग लगातार उठ रही है।
भारत के गंडक बेसिन पर बाढ़ का मंडराता खतरा
नेपाल से आ रहे पानी के सैलाब के कारण गंडक नदी का डिस्चार्ज लगातार बढ़ रहा है। उत्तर बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को चेतावनी दी है कि वे जलस्तर बढ़ने पर तुरंत ऊंचे स्थानों पर चले जाएं। नेपाल की तरफ से आ रही इस जलप्रलय ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को रेखांकित किया है। जल विशेषज्ञ मानते हैं कि पहाड़ों पर होने वाली मूसलाधार बारिश और बांधों से अचानक पानी छोड़े जाने की सूचना समय पर मिलने से भारत में होने वाले जान-माल के नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता है।
फिलहाल जमीनी स्तर पर राहत और बचाव का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। नेपाल के प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना और पुलिस के जवान लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। भारत के सीमावर्ती जिलों में भी आपदा प्रबंधन की टीमों को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिससे गंडक और अन्य नदियों का जलस्तर अभी कुछ और दिन तक उच्च स्तर पर बना रहेगा। आम जनता से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
आपदा से सबक और भविष्य की सुरक्षा रणनीति
बार-बार आने वाले इन फ्लैश फ्लड ने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक बाढ़ नियंत्रण के तरीके अब नाकाफी साबित हो रहे हैं। नेपाल और भारत दोनों देशों को मिलकर आधुनिक तकनीक पर आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम को और ज्यादा प्रभावी बनाना होगा। सैटेलाइट इमेजिंग और रियल-टाइम वेदर डेटा शेयरिंग से समय रहते निचले इलाकों में अलर्ट भेजा जा सकेगा। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो हर साल मानसूनी सीजन में इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं भारी तबाही मचाती रहेंगी। प्रशासनिक अमला और विशेषज्ञ अब इसी बात पर जोर दे रहे हैं कि सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए ताकि इंसानी जिंदगियों को सुरक्षित बचाया जा सके।












