नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के अन्नदाता एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर किसानों ने मोर्चा संभाल लिया है। हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ महीनों की शांति के बाद अचानक से आंदोलन की सुगबुगाहट तेज होने से राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। किसान संगठनों का कहना है कि उनकी कई मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं और सरकार को हमारी अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
जमीनी हकीकत यह है कि युवा पीढ़ी के बाद अब किसान वर्ग भी पूरी ताकत के साथ सीमा पर डट रहा है। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक इस आंदोलन की गूंज सुनाई देने लगी है। हाल ही में ट्रेड डील और अन्य नीतियों को लेकर किसानों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से सीमावर्ती इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आने-जाने वाले वाहनों की कड़ी जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके और कानून व्यवस्था बनी रहे।
यह तो महज शुरुआत है, सरकार हमारी मांगें माने
सीमा पर डटे किसान नेताओं ने मीडिया के सामने दो टूक कह दिया है कि मौजूदा विरोध प्रदर्शन केवल एक ट्रेलर है। अगर सरकार ने जल्दबाजी में किसानों के हितों के खिलाफ कोई कदम उठाया या वादे पूरे नहीं किए, तो आंदोलन को पूरे देश में फैला दिया जाएगा। नेताओं का साफ कहना है कि बातचीत के नाम पर सिर्फ समय बर्बाद किया जा रहा है। अब किसानों के पास सड़कों पर उतरने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। ग्रामीण इलाकों से भी लगातार समर्थन का सिलसिला जारी है और जत्थों के रूप में लोग सीमा की ओर कूच कर रहे हैं।
एक तरफ जहां सीमा पर टकराव की स्थिति बन रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को खेती की नई तकनीक सिखा रहे हैं। हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर और स्थानीय संस्थानों ने गांवों में विशेष शिविर लगाए हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना है कि वे पारंपरिक खेती से हटकर वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पारंपरिक रूप से अत्यधिक रासायनिक खादों का इस्तेमाल करने से जमीन की उपजाऊ शक्ति लगातार कम हो रही है, जिससे अंत में किसानों को ही भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
कम लागत और ज्यादा मुनाफे के लिए मिट्टी की जांच जरूरी
विभिन्न जिलों में आयोजित जागरूकता अभियानों के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण किट के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सोचे-समझे यूरिया और अन्य उर्वरक डालने से जमीन बंजर होने लगती है। यदि किसान खेत की मिट्टी की जांच करा लें, तो उन्हें पता चल जाएगा कि असल में किस पोषक तत्व की कमी है। इससे बेवजह का खर्च बचेगा और फसलों की पैदावार में भी शानदार बढ़ोतरी होगी। सरकार चाहती है कि किसान आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की तरफ आगे बढ़ें ताकि उनकी आय दोगुनी हो सके।
हालांकि, इन सबके बीच ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा से जुड़ी अन्य समस्याएं भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। हाल ही में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां बैंक से पैसे निकालकर लौट रहे एक किसान का पीछा कर शातिर चोरों ने दो लाख रुपये उड़ा लिए। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुरक्षा और किसानों के पैसों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि चोरों तक पहुंचा जा सके।
मैदान से लेकर खेतों तक चौतरफा संघर्ष की स्थिति
एक तरफ जहां नीतिगत मामलों को लेकर सड़कों पर संघर्ष छिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ आम किसान अपने रोजमर्रा के जीवन और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। बैंक से चोरी की घटनाएं और कर्ज का बोझ किसानों की कमर तोड़ रहा है। स्थानीय पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों में सतर्कता बरतने की बात कह रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खुलती नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार को न सिर्फ सीमा पर चल रहे विवादों का समाधान निकालना चाहिए, बल्कि गांवों में सुरक्षा और वित्तीय सहायता के पुख्ता इंतजाम भी करने होंगे।







