नई दिल्ली/रियाद — मध्य पूर्व एशिया में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद और तटीय शहर यानबू पर नए सिरे से मिसाइल हमले हुए हैं। हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सऊदी सुरक्षा बलों ने कुछ हमलों को हवा में ही नाकाम करने का दावा किया है। इसके बावजूद आम नागरिकों में डर का माहौल बना हुआ है और लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। रियाद के आसमान में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जिससे साफ है कि सऊदी अरब अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
इन हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव बहुत खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी के पास ईरान के एक तेल टैंकर पर हमला किया है। खार्ग द्वीप के नजदीक अमेरिकी कार्रवाई में कई मिसाइलें गिराई जाने की खबर सामने आई है। इसके जवाब में ईरान समर्थित समूहों ने सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों और दूतावासों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। रियाद स्थित अमेरिकी राजनयिक मिशन के पास एक ड्रोन अटैक की पुष्टि हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि उनका सबसे बड़ा हमला अभी बाकी है।
मक्का के पास हमले का अलर्ट और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा
इस ताजा संघर्ष में सबसे चौंकाने वाली बात पवित्र शहर मक्का के पास हमले का अलर्ट जारी होना है। इतिहास में पहली बार मक्का के आसपास सुरक्षा का ऐसा गंभीर अलर्ट मिलने से पूरी इस्लामिक दुनिया में चिंता फैल गई है। सऊदी अरब के भीतर और बाहर के कई प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने हूती विद्रोहियों के इन हमलों की कड़ी निंदा की है। धार्मिक स्थलों को युद्ध की राजनीति में घसीटे जाने पर आम मुसलमानों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने मक्का और मदीना के आसपास सुरक्षा कवच को और ज्यादा मजबूत कर दिया है। सऊदी सरकार किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पूरी तरह चौकस है और आसमान में निगरानी बढ़ा दी गई है।
हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए अमेरिका ने अपनी सामरिक स्थिति मजबूत कर ली है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक बी-वन बॉम्बर विमान भेजे हैं। ये खतरनाक बमवर्षक विमान किसी भी वक्त बड़े और सटीक हमले करने की क्षमता रखते हैं। पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि वे अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। अमेरिका के इस कदम से युद्ध के बादल और ज्यादा गहरे हो गए हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं रुका, तो यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
कच्चे तेल की आपूर्ति और वैश्विक बाजार पर मंडराता संकट
सऊदी अरब और ईरान के बीच चल रहे इस टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ रहा है। यानबू और रियाद पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बहुत चिंताजनक है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं। तेल टैंकरों पर हमलों के कारण समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार खतरे में पड़ गया है। बीमा कंपनियों ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों का प्रीमियम बहुत बढ़ा दिया है। इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
जमीनी हालात यह बता रहे हैं कि कूटनीति के रास्ते फिलहाल बंद होते नजर आ रहे हैं। सऊदी अरब की सरकार अपनी सुरक्षा को लेकर कड़े फैसले ले रही है और सैन्य मोर्चे पर तैयारी बढ़ा दी गई है। हूती विद्रोही भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और लगातार ड्रोन तथा मिसाइल दाग रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, रियाद की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग केवल जरूरी कामों के लिए ही बाहर निकल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है, लेकिन जमीन पर गोलीबारी और धमाके जारी हैं। आने वाले कुछ दिन मध्य पूर्व और पूरी दुनिया के लिए बहुत संवेदनशील साबित हो सकते हैं।






