बेंगलुरु/शृंगेरी ग्राउंड ब्यूरो — कर्नाटक के ऐतिहासिक शृंगेरी मठ और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बड़ा झूठ तेजी से फैलाया जा रहा है। इंटरनेट पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया गया कि शृंगेरी मठ के सीअर ने राहुल गांधी को आशीर्वाद देने से साफ मना कर दिया था। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल और स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वायरल दावा पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत है। इस वीडियो को गलत संदर्भ के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर राजनीतिक फायदे के लिए शेयर किया जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे इस वीडियो की जब गहराई से जांच की गई, तो पता चला कि यह सच से कोसों दूर है। मीडिया रिपोर्ट्स और फैक्ट चेक एजेंसी 'बूम' की पड़ताल में यह बात साफ हो चुकी है कि शृंगेरी मठ के सीअर ने ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया था और न ही आशीर्वाद देने से इनकार किया था। राजनीतिक नफरत फैलाने वाले कुछ तत्वों ने पुराने या अलग संदर्भ के वीडियो को एडिट करके इंटरनेट पर अपलोड कर दिया ताकि आम जनता को भ्रमित किया जा सके।
वायरल वीडियो और सच की असली कहानी
शृंगेरी मठ हमेशा से देश भर में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस तरह के धार्मिक संस्थानों के नाम का इस्तेमाल करके राजनीतिक प्रोपेगंडा चलाना बेहद गंभीर मामला है। जब इस वीडियो की असलियत खंगाली गई, तो सामने आया कि राहुल गांधी की कर्नाटक यात्रा के दौरान की तस्वीरों और वीडियो क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई थी। वीडियो में जिसे आशीर्वाद न देने की घटना बताया जा रहा है, असल में वहां ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था।
स्थानीय पत्रकारों और मठ के करीबियों ने भी इस वायरल दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मठ सभी का सम्मान करता है और वहां आने वाले हर व्यक्ति के साथ पारंपरिक मर्यादा के अनुसार ही व्यवहार किया जाता है। सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे इस तरह की फर्जी खबरों को फॉरवर्ड करने वाले लोग समाज में भ्रम और नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। पुलिस और साइबर सेल अब ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने इस झूठे दावे को सबसे पहले हवा दी थी।
राजनीतिक गलियारों और चुनावों में शृंगेरी की चर्चा
शृंगेरी का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है, खासकर कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान यहां की सीट पर सबकी नजरें टिकी थीं। साल 2023 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार टी. डी. राजेडोगड़ा ने शृंगेरी सीट पर शानदार जीत दर्ज की थी। राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने के कारण इस इलाके पर हमेशा से विभिन्न राजनीतिक दलों की पैनी नजर रहती है। यही वजह है कि चुनावी मौसम हो या आम दिन, शृंगेरी से जुड़े मुद्दों को अक्सर सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है।
आम जनता और पाठकों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। इंटरनेट पर दिखने वाली हर वीडियो क्लिप सच नहीं होती, उसके पीछे अक्सर किसी न किसी का राजनीतिक एजेंडा छिपा होता है। 'द फ्रीलान्स' अपने पाठकों से अपील करता है कि ऐसी किसी भी सनसनीखेज खबर को आगे बढ़ाने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर कर लें। सच की तह तक पहुंचना ही एक जिम्मेदार नागरिक और सच्चे पत्रकार का पहला कर्तव्य होता है।
फर्जी खबरों से कैसे बचें और क्या है प्रशासन का रुख
देशभर में लगातार बढ़ रहे सोशल मीडिया प्रोपेगंडा को रोकने के लिए अब प्रशासनिक स्तर पर भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। भ्रामक और फर्जी खबरें फैलाने वाले अकाउंट्स की पहचान के लिए साइबर पुलिस लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर बनाए रखती है। शृंगेरी मठ के नाम पर वायरल हुए इस वीडियो मामले में भी स्थानीय प्रशासन ने संज्ञान लिया है और दोषियों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पत्रकारिता के बुनियादी उसूलों के तहत यह जरूरी है कि जनता तक केवल तथ्यात्मक और सही खबरें ही पहुंचाई जाएं। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी और डिजिटल पड़ताल से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि शृंगेरी मठ के सीअर और राहुल गांधी के बीच किसी भी तरह के अपमान या इनकार की कोई घटना नहीं घटी थी। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी अफवाहों से सावधान रहें और हमेशा प्रमाणित समाचार स्रोतों पर ही भरोसा करें।









