चेन्नई से लेकर तमिलनाडु के तमाम जिलों में इन दिनों दूध की कीमतों और इसकी गुणवत्ता को लेकर आम आदमी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ताजा घटनाक्रम में प्राइवेट डेयरी कंपनियों ने दूध के दाम में सीधे चार रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है, जिसे तुरंत प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है। महंगाई के इस दौर में दूध जैसी बुनियादी जरूरत के दाम बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। लोग पहले से ही बढ़ती कीमतों से परेशान थे और अब इस बढ़ोतरी ने उनकी जेब पर और भारी बोझ डाल दिया है।
एक तरफ जहां निजी दूध के दाम बढ़ चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य के सरकारी सहकारिता ब्रांड 'आवीन' की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय खबरों के जरिए हाल ही में यह बात सामने आई कि कई जगहों पर आवीन के पैकेट वाले दूध से अजीब सी दवा जैसी गंध आ रही है। इस तरह की गंध आने से उपभोक्ताओं में हड़कंप मच गया है और लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या वे जो दूध अपने बच्चों को पिला रहे हैं, वह सुरक्षित भी है या नहीं। खाद्य सुरक्षा और जन स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
आवीन के दूध में अजीब गंध आने से उपभोक्ताओं में चिंता
दूध जैसी जरूरी खाद्य वस्तु में दवा की गंध आने की घटना को बहुत हल्के में नहीं लिया जा सकता है। ग्राहकों का कहना है कि अगर सरकारी ब्रांड ही इस तरह की लापरवाही दिखाएगा, तो वे किस पर भरोसा करेंगे। इस मामले के सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का यह भी कहना है कि दूध के नमूनों की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि बाजार में बिकने वाले हर पैकेट की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिल सके। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण इस शिकायत को लेकर जनता में काफी गुस्सा है।
इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तमिलनाडु भाजपा के प्रमुख नैनाार नागेंद्रन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि आवीन की व्यवस्था को कमजोर करना तुरंत बंद किया जाए। उनका कहना है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करके दूध के उत्पादन और उसके वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाना चाहिए ताकि आम लोगों को सही समय पर और अच्छी गुणवत्ता वाला दूध मिल सके। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकारी कुप्रबंधन की वजह से आवीन जैसी बड़ी संस्था की साख गिर रही है।
कृषि बजट में पशुपालकों के लिए की गई नई घोषणाएं
इन तमाम विवादों और समस्याओं के बीच तमिलनाडु के आगामी कृषि बजट 2026 में पशुपालकों और किसानों के लिए कुछ राहत भरी घोषणाएं भी की गई हैं। सरकार ने पशुपालन को बढ़ावा देने और डेयरी किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई नई योजनाओं का खाका खींचा है। जानकारों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को ईमानदारी से जमीन पर उतारा जाए, तो दूध का उत्पादन बढ़ सकता है और किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में कीमतों के बढ़ने और गुणवत्ता की शिकायतों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
चेन्नई के स्थानीय बाजारों का हाल देखें तो वहां 99 साल पुरानी ऐतिहासिक दुकानें जैसे जेम एंड कंपनी और कलाथी शॉप आज भी अपनी पुरानी साख के साथ टिकी हुई हैं, जो यह सिखाती हैं कि कोई भी व्यवसाय अपनी गुणवत्ता और भरोसे के दम पर समय की मार झेल सकता है। लेकिन आज की आधुनिक डेयरी इंडस्ट्री में गुणवत्ता से हो रहा समझौता उपभोक्ताओं का भरोसा तोड़ रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी पड़ताल में यह साफ हुआ है कि सरकार और कंपनियों दोनों को ही दामों को नियंत्रित करने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा के मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
दूध खरीद और वितरण व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत
फिलहाल आम जनता यही चाहती है कि सरकार दूध की बढ़ी हुई कीमतों पर लगाम लगाए और आवीन के दूध की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच हो। जब तक प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक उपभोक्ताओं का डर और गुस्सा शांत होने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाती है और क्या वाकई उपभोक्ताओं को शुद्ध और किफायती दूध मिल पाएगा या नहीं।



