पटना ब्यूरो — बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक बार फिर निराशा भरी खबर सामने आई है। आयोग ने 72वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को एक बार फिर से स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया है। ताजा अपडेट के अनुसार, अब यह परीक्षा तय तारीख यानी 25 अक्टूबर को भी आयोजित नहीं की जाएगी। इस अचानक आए फैसले से पूरे राज्य के छात्र असमंजस में हैं और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपनी नाराजगी जता रहे हैं। परीक्षा की तारीख बार-बार आगे बढ़ने से छात्रों की पूरी योजना और मानसिक तैयारी पर भारी असर पड़ रहा है।
इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले छात्र लंबे समय से दिन-रात एक करके तैयारी में जुटे हुए थे। पहले आयोग ने परीक्षा की जो तारीख तय की थी, उस पर छात्रों ने अपनी पढ़ाई का पूरा शेड्यूल सेट कर लिया था। लेकिन अब परीक्षा टलने से छात्रों का सब्र का बांध टूटने लगा है। कई छात्र संगठनों ने आयोग के इस रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों का कहना है कि बार-बार परीक्षा टलने से न सिर्फ उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से भी बहुत ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। पटना और अन्य शहरों में रहकर तैयारी कर रहे किराए के कमरों के छात्रों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
छात्रों को नई तारीख का इंतजार, अगले हफ्ते आ सकता है आयोग का नया आदेश
परीक्षा टलने की खबर सामने आने के बाद से ही छात्र लगातार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए हुए हैं। हर कोई यही जानना चाहता है कि अब आखिरकार परीक्षा किस तारीख को होगी। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, बिहार लोक सेवा आयोग अगले सप्ताह इस मामले में एक नया आधिकारिक नोटिस जारी कर सकता है। इस नोटिस में परीक्षा की नई संभावित तारीख का ऐलान किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, छात्र इस बात से भी डरे हुए हैं कि कहीं नई तारीख भी आगे चलकर न बदल दी जाए, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में परीक्षाओं की तिथियों में लगातार बदलाव देखने को मिला है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब पटना के बोरिंग रोड और मुसल्लहपुर हाट जैसे इलाकों में जाकर छात्रों से बात की, तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण दिखा। लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ाई कर रहे छात्रों का कहना था कि वे अब मानसिक रूप से थक चुके हैं। एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसने पिछले छह महीने से घर जाना छोड़ रखा है और सिर्फ परीक्षा की तैयारी कर रहा था। बार-बार परीक्षा की तारीख आगे बढ़ने से अब उसका आत्मविश्वास भी डगमगाने लगा है। कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों का भी यही मानना है कि इस तरह बार-बार परीक्षा टलने से छात्रों की पढ़ाई की लय टूट जाती है और वे डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं।
प्रशासनिक कारणों और व्यवस्थाओं का हवाला दे रहा है आयोग
सूत्रों के अनुसार, परीक्षा को इस तरह अचानक रोके जाने के पीछे कुछ बड़े प्रशासनिक और इंतजाम से जुड़े कारण बताए जा रहे हैं। आयोग के उच्च अधिकारी इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। पेपर लीक जैसी पुरानी घटनाओं से सबक लेते हुए आयोग इस बार कोई भी जोखिम मोल नहीं लेना चाहता है। इसी वजह से परीक्षा केंद्रों के चयन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद किया जा रहा है, जिसमें थोड़ा अतिरिक्त समय लग रहा है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि तैयारियां पूरी नहीं थीं, तो पहले परीक्षा की तारीख घोषित ही क्यों की गई थी? यही वह सवाल है जो आज हर परीक्षוार्थी की जुबान पर है। प्रशासनिक अमले की इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर उन गरीब और मध्यम वर्ग के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है जो अपनी मेहनत के दम पर अफसर बनने का सपना देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि अगले सप्ताह आयोग जो नई तारीख घोषित करता है, क्या उस दिन शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षा संपन्न हो पाती है या नहीं।
परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए आगे की क्या है राह
फिलहाल स्थिति यह है कि 25 अक्टूबर को होने वाली परीक्षा रद्द हो चुकी है और छात्रों को एक बार फिर से नई तारीख का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे समय में विशेषज्ञों की सलाह है कि छात्र अपना हौसला बिल्कुल न खोएं और अपनी पढ़ाई जारी रखें। परीक्षा चाहे जब भी हो, आपकी तैयारी ही आपको सफलता दिलाएगी। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इस बात की सख्त जरूरत है कि परीक्षाओं का कैलेंडर पूरी पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ लागू किया जाए ताकि छात्रों का सिस्टम से भरोसा न उठे।



