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धर्मपढ़ने में समय: 4 मिनट

एनएमसी का बड़ा फैसला: एमबीबीएस छात्रों को फर्स्ट ईयर पास करने के लिए मिला मर्सी अटेम्प्ट और 10 साल का समय

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग यानी एनएमसी ने एमबीबीएस के छात्रों को बड़ी राहत दी है। अब छात्रों को फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त यानी पांचवां मौका मिलेगा। इसके साथ ही पूरा कोर्स करने की समय सीमा भी बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है। इस फैसले से उन हजारों छात्रों को नई उम्मीद मिली है जो नियमों के फेर में अपनी पढ़ाई छोड़ने की कगार पर थे।
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धर्म एवं संस्कृति डेस्क, द फ्रीलांस
संस्कृति व विरासत डेस्क•16 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•35
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एनएमसी का बड़ा फैसला: एमबीबीएस छात्रों को फर्स्ट ईयर पास करने के लिए मिला मर्सी अटेम्प्ट और 10 साल का समय
📷 एनएमसी का बड़ा फैसला: एमबीबीएस छात्रों को फर्स्ट ईयर पास करने के लिए मिला मर्सी अटेम्प्ट और 10 साल का समय — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग यानी एनएमसी ने एमबीबीएस के छात्रों को बड़ी राहत दी है। अब छात्रों को फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त यानी पांचवां मौका मिलेगा। इसके साथ ही पूरा कोर्स करने की समय सीमा भी बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है। इस फैसले से उन हजारों छात्रों को नई उम्मीद मिली है जो नियमों के फेर में अपनी पढ़ाई छोड़ने की कगार पर थे।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मेडिकल छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग यानी एनएमसी ने एमबीबीएस कोर्स को लेकर अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब मेडिकल के जो छात्र अपनी फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा यानी पहले साल की परीक्षा पास नहीं कर पा रहे थे, उन्हें एक और यानी पांचवां मौका दिया जाएगा। इसे मर्सी अटेम्प्ट कहा जा रहा है। इस फैसले से उन छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा जो चार बार कोशिश करने के बाद भी परीक्षा पास नहीं कर पाए थे और उनका करियर अधर में लटक गया था।

देशभर के मेडिकल कॉलेजों में यह नियम लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था। कई छात्र और उनके परिवार लगातार यह मांग कर रहे थे कि परीक्षा पास करने के लिए कुछ और मौके दिए जाएं। अदालत में भी इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं। कोर्ट ने एनएमसी के नियमों को सही तो ठहराया था, लेकिन छात्रों की मुश्किलों को देखते हुए आयोग ने खुद मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह बड़ा कदम उठाया है। इस नए बदलाव के बाद अब छात्रों पर से मानसिक दबाव थोड़ा कम होगा और वे अपनी पढ़ाई पर दोबारा पूरा ध्यान लगा सकेंगे।

एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के लिए अब मिलेंगे पूरे 10 साल

सिर्फ फर्स्ट ईयर का पेपर पास करने का मौका ही नहीं, बल्कि एनएमसी ने पूरे एमबीबीएस कोर्स की समय सीमा को भी बढ़ा दिया है। अब छात्रों को अपना पूरा एमबीबीएस कोर्स खत्म करने के लिए 10 साल का समय मिलेगा। पहले यह नियम काफी सख्त था और तय समय में कोर्स पूरा न होने पर छात्रों का एडमिशन रद्द कर दिया जाता था। इस नए आदेश के बाद उन कमजोर या जरूरतमंद छात्रों को बड़ी राहत मिल जाएगी जो किन्हीं कारणों से तय सालों में अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाए थे।

मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह फैसला छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है। एमबीबीएस की पढ़ाई बहुत कठिन होती है और इसमें विषयों का बोझ बहुत ज्यादा होता है। कई बार छात्र पहले साल के माहौल में ढल नहीं पाते हैं और परीक्षा में बार-बार फेल हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें कोर्स से बाहर कर देना उनके भविष्य के साथ नाइंसाफी जैसा था। अब इस पांचवें मौके और बढ़ी हुई समय सीमा के जरिए छात्रों को अपनी गलती सुधारने का पूरा अवसर मिल सकेगा।

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किसे और कैसे मिलेगा इस नई राहत का सीधा फायदा?

आयोग के इन नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह अतिरिक्त मौका सभी पात्र छात्रों को मिलेगा जो अपने शुरुआती प्रयासों में असफल रहे थे। हालांकि, इसके लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को एनएमसी के तय किए गए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। छात्रों को अपने कॉलेज प्रशासन से संपर्क करके इस मर्सी अटेम्प्ट के बारे में पूरी जानकारी लेनी होगी। कई मेडिकल कॉलेजों में इस संबंध में आंतरिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि छात्रों के आवेदन समय पर स्वीकार किए जा सकें।

द फ्रीलान्स की टीम ने जब कुछ मेडिकल छात्रों और उनके अभिभावकों से इस बारे में बात की, तो उनके चेहरे पर एक नई उम्मीद साफ दिखाई दी। छात्रों का कहना है कि यह उनके जीवन का दूसरा मौका है और वे इस बार पूरी मेहनत से अपनी परीक्षा पास करके डॉक्टर बनने का अपना सपना जरूर पूरा करेंगे। एनएमसी का यह कदम देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और मेडिकल छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक पहल साबित हो रहा है।

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