नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — खेल की दुनिया में कब किस्मत का पहिया घूम जाए, यह कोई नहीं जानता। मोनांक पटेल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। भारत के घरेलू क्रिकेट ढांचे में जब उन्हें आगे बढ़ने का पूरा मौका नहीं मिला, तो उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखने के लिए विदेश जाने का कड़ा फैसला किया। आज वही मोनांक पटेल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की क्रिकेट टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी यह सफलता उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो सीमित अवसरों के कारण अपनी पहचान नहीं बना पाते हैं।
मोनांक पटेल मूल रूप से गुजरात से ताल्लुक रखते हैं और उनका नाता भारतीय स्टार गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर अक्षर पटेल से भी रहा है। घरेलू क्रिकेट के दिनों में वह इन खिलाड़ियों के साथ और इनके खिलाफ मैदान पर खेल चुके हैं। एक समय ऐसा था जब भारत के बड़े राज्यों की टीमों में जगह बनाने के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। जब देश में आगे बढ़ने के रास्ते बंद नजर आए, तो उन्होंने अमेरिका का रुख किया और वहां की स्थानीय क्रिकेट लीग में अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाई।
गुजरात से अमेरिका तक का संघर्ष भरा सफर
क्रिकेट के जानकारों के अनुसार मोनांक पटेल की बल्लेबाजी शैली और खेल की समझ बेहद मजबूत है। अमेरिका जाने के बाद उन्होंने वहां के हालात के मुताबिक खुद को ढाला। स्थानीय टूर्नामेंटों में लगातार अच्छे रन बनाने के बाद उनका चयन अमेरिकी राष्ट्रीय टीम में हुआ। अपनी शांत कप्तानी और संकट के समय संयम से रन बनाने की कला के कारण उन्हें जल्द ही टीम की कमान सौंप दी गई। आज वह अमेरिका को ग्लोबल स्तर पर एक मजबूत क्रिकेट टीम बनाने के मिशन में सबसे आगे खड़े हैं।
भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच मोनांक का नाम तब और ज्यादा चर्चा में आया जब टी20 विश्व कप के लिए अमेरिका की टीम का ऐलान हुआ। इस टीम की कमान संभालते ही लोगों की नजरें उनके पुराने दिनों और भारत कनेक्शन पर टिक गईं। सोशल मीडिया पर उनके संघर्ष की कहानियां तेजी से वायरल होने लगीं। लोग यह जानने को बेताब दिखे कि कैसे एक स्थानीय खिलाड़ी ने विदेश जाकर अपनी अलग क्रिकेट पहचान खड़ी कर दी और आज बड़े दिग्गजों के समकक्ष खड़ा है।
जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल से पुराना नाता
मोनांक पटेल के करियर का सबसे दिलचस्प पहलू उनके समकालीन खिलाड़ी हैं। जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल के साथ उन्होंने शुरुआती क्रिकेट के दिनों में काफी समय बिताया है। तीनों खिलाड़ी गुजरात के घरेलू सर्किट में एक-दूसरे के खिलाफ और साथ खेले हैं। जहां बुमराह और अक्षर ने भारतीय टीम के लिए खेलते हुए दुनिया भर में तहलका मचाया, वहीं मोनांक ने दूसरा रास्ता चुना। उन्होंने अटलांटिक पार करके अमेरिका में क्रिकेट की नई इबारत लिखने का फैसला किया।
खेल के मैदान पर भले ही आज इन खिलाड़ियों की जर्सी अलग-अलग रंग की हो, लेकिन उनकी जड़ें एक ही मिट्टी से जुड़ी हैं। जब अमेरिका की टीम मैदान पर उतरती है, तो मोनांक की रणनीति और उनकी कप्तानी का तरीका साफ दिखाता है कि उन्होंने भारतीय घरेलू क्रिकेट की भट्टी में खुद को कितना तपाया था। मैदान पर उनका नेतृत्व कौशल यह साबित करता है कि कड़ी मेहनत और सही समय पर लिया गया फैसला इंसान की तकदीर बदल सकता है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
द फ्रीलान्स की इस विशेष पड़ताल से यह साफ होता है कि खेल में प्रतिभा की कोई एक भौगोलिक सीमा नहीं होती। मोनांक पटेल ने साबित कर दिया कि यदि देश में रास्ते बंद हों, तो नए रास्ते खुद बनाए जा सकते हैं। आने वाले मुकाबलों में उनकी कप्तानी अमेरिका के लिए कितनी कारगर साबित होती है, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना तय है कि मोनांक का यह सफर भारतीय क्रिकेट गलियारों में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।




