नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान और स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना इन दिनों मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह सुर्खियों में छाई हुई हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक बयान से साफ कर दिया है कि वह अपनी जिंदगी और करियर के फैसलों को लेकर कितनी स्पष्ट और मजबूत सोच रखती हैं। मंधाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह चीजों को माफ जरूर कर सकती हैं, लेकिन कभी भूलती नहीं हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोई भी उन्हें कमजोर या बेचारी समझने की भूल न करे। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और उनके फैंस इसका समर्थन कर रहे हैं।
मैदान की बात करें तो स्मृति मंधाना ने हाल ही में खेल के इतिहास में एक और बड़ा मुकाम हासिल किया है। उन्होंने पुरुष टीम के दिग्गज खिलाड़ी रोहित शर्मा का रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया है। इसके साथ ही महिलाओं के आगामी विश्व कप के मुकाबलों में भी उनका बल्ला जमकर बोल रहा है। हाल ही में नीदरलैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबले में स्मृति मंधाना और साथी खिलाड़ी शेफाली वर्मा ने मैदान पर शानदार पारियां खेलीं, जिसकी बदौलत भारतीय टीम ने विरोधी टीम को 95 रनों के बड़े अंतर से हरा दिया।
मैदान पर रिकॉर्ड टूटने और बनने का सिलसिला
क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों सिर्फ मंधाना और शेफाली वर्मा का ही नाम गूंज रहा है। हालांकि, कुछ समय पहले महिला टी20 एशिया कप के दौरान युवा खिलाड़ी शेफाली वर्मा ने स्मृति मंधाना का ही एक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था। शेफाली ने सबसे तेज फिफ्टी जड़कर मंधाना को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन इन दोनों खिलाड़ियों की आपसी प्रतिस्पर्धा ने भारतीय टीम की ताकत को और ज्यादा मजबूत कर दिया है। कोच और चयनकर्ता भी इन दोनों की फॉर्म से बेहद खुश हैं, क्योंकि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स में यह जोड़ी भारत के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित होने वाली है।
खेल के मैदान पर लगातार शानदार प्रदर्शन का इनाम भी स्मृति मंधाना को मिल रहा है। उन्हें हाल ही में प्रतिष्ठित 'स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ द ईयर' के पुरस्कार से नवाजा गया है। इस सम्मान के मिलने से देश की अन्य महिला खिलाड़ियों का भी मनोबल काफी ऊंचा हुआ है और खेलों में महिलाओं की भागीदारी को एक नई दिशा मिली है। मंधाना ने साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत और लगन के दम पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है, फिर चाहे रास्ते में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं।
संघर्ष से लेकर सफलता तक का सफर
स्मृति मंधाना का यह सफर कभी भी आसान नहीं रहा है। उन्होंने शुरुआती दौर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने तक कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। चोटें भी उनके करियर में रुकावट बनीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज जब लोग उन्हें सिर्फ एक सफल खिलाड़ी के रूप में देखते हैं, तो उनका यह कड़ा संदेश उन लोगों के लिए है जो महिला खिलाड़ियों को सिर्फ सहानुभूति की नजर से देखते हैं। मंधाना का साफ कहना है कि उनका संघर्ष उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
आने वाले दिनों में महिला क्रिकेट का भविष्य बहुत उज्ज्वल नजर आ रहा है। टीम के पास मंधाना और शेफाली जैसी आक्रामक और अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं जो किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकती हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, खेल प्रेमियों में इन खिलाड़ियों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। स्मृति मंधाना का यह बेबाक अंदाज और मैदान पर उनका बल्ला विरोधियों के लिए हमेशा सिरदर्द बना रहेगा, और देश को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है।




