नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली ने अपने वृंदावन दौरे को लेकर चल रही सभी अफवाहों पर आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। कुछ समय पहले एक धार्मिक कार्यक्रम से जुड़े दिनेश फलाहरी महाराज ने यह दावा किया था कि विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाने के लिए एक राजस्थान के कारोबारी की तरफ से पांच करोड़ रुपये मिले थे। इस सनसनीखेज दावे के सामने आने के बाद से ही खेल जगत और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब विराट कोहली ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठा बताया है।
विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा अक्सर आध्यात्मिक शांति की तलाश में संतों और आश्रमों में जाते रहते हैं। कुछ महीने पहले उनके वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुए थे। आम जनता और उनके फैंस ने इन पलों को बहुत पसंद किया था और इसे उनकी आस्था से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन हाल ही में फलाहरी महाराज के एक बयान ने इस पूरी यात्रा को एक नए विवाद के घेरे में ला खड़ा किया, जिसमें पैसों के लेन-देन की बात कही गई थी।
फलाहरी महाराज का वह सनसनीखेज दावा क्या था?
दिनेश फलाहरी महाराज ने मीडिया में दिए गए अपने बयानों में यह दावा किया था कि विराट कोहली का प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाना कोई सामान्य धार्मिक यात्रा नहीं थी। उनके अनुसार, राजस्थान के एक बड़े उद्योगपति या कारोबारी ने इस मुलाकात को संभव बनाने और प्रायोजित करने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए थे। इस तरह के गंभीर आरोप लगने के बाद से ही मीडिया के एक बड़े वर्ग में यह खबर प्रमुखता से चलने लगी थी कि क्या सेलिब्रिटी का संतों से मिलना भी किसी सौदे का हिस्सा हो सकता है।
इस दावे के सामने आने के बाद विराट कोहली के करीबी सूत्रों और खुद खिलाड़ी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कोहली ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनकी आध्यात्मिक यात्राएं पूरी तरह से व्यक्तिगत और श्रद्धा से जुड़ी होती हैं। इन यात्राओं के पीछे किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन या प्रायोजन की बात करना सरासर झूठ और उनकी छवि को खराब करने की एक साजिश है। विराट ने साफ किया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी भी इस तरह के सौदों के जरिए संतों का आशीर्वाद लेने का काम नहीं किया है।
सोशल मीडिया पर वायरल खबरों की हकीकत
आज के समय में सोशल मीडिया पर किसी भी सनसनीखेज खबर को फैलने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है। फलाहरी महाराज के इस दावे को भी बिना किसी पुख्ता सबूत के कई प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जाने लगा था। आम लोग इस बात से हैरान थे कि क्या क्रिकेट के मैदान पर रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी भी ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। लेकिन विराट कोहली के इस सीधे खंडन ने साफ कर दिया है कि बिना जांच-पड़ताल के फैलाई गई ऐसी खबरें केवल सनसनी पैदा करने के लिए होती हैं।
प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े लोगों ने भी पहले स्पष्ट किया था कि उनके द्वार पर आने वाला हर भक्त समान है और वहां किसी भी प्रकार के वीआईपी कल्चर या पैसों के लेन-देन के लिए कोई जगह नहीं है। महाराज खुद अपने प्रवचन में सादा जीवन जीने और भगवान की भक्ति में लीन रहने की शिक्षा देते हैं। ऐसे में विराट कोहली पर इस तरह का वित्तीय आरोप लगना पूरी तरह से निराधार साबित हुआ है और संत समाज ने भी इस तरह की बयानबाजी से दूरी बना ली है।
आस्था और सेलिब्रिटी जीवन का अंतहीन टकराव
देश के बड़े खिलाड़ी और अभिनेता जब भी किसी धार्मिक स्थल पर जाते हैं, तो उसे अक्सर प्रचार या दिखावे से जोड़ दिया जाता है। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब उनकी निजी आस्था पर सवाल उठाए गए हों। इससे पहले भी उनके कई दौरों पर लोगों ने अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई हैं। हालांकि, इस बार मामला पांच करोड़ जैसी बड़ी रकम से जुड़ा होने के कारण काफी तूल पकड़ गया था, जिस पर खिलाड़ी को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि फलाहरी महाराज द्वारा किया गया दावा पूरी तरह से आधारहीन था और इसका वास्तविक सच्चाई से कोई दूर-दूर तक वास्ता नहीं है। विराट कोहली के इस स्पष्टीकरण के बाद अब उन तमाम अफवाहों पर विराम लग गया है जो पिछले कुछ दिनों से लगातार तूल पकड़ रही थीं। पाठकों और प्रशंसकों के लिए यह जरूरी है कि वे किसी भी वायरल दावे पर आंख मूंदकर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।



