नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — दफ्तरों में लंबे समय से टीमों को संभालने वाले मिडिल मैनेजर्स की नौकरी पर अब बड़ा संकट मंडराने लगा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की तेज रफ्तार ने कंपनियों के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। पहले जो काम इंसानी मैनेजर करते थे, उन्हें अब सॉफ्टवेयर और स्मार्ट एल्गोरिदम चुटकियों में कर रहे हैं। इस बदलाव ने दफ्तरों में काम करने वाले लाखों लोगों की नींद उड़ा दी है।
हाल ही में 'शार्क टैंक इंडिया' के मशहूर जज और बिजनेसमैन अनुपम मित्तल ने एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई की वजह से कंपनियों में मिडिल मैनेजमेंट की जरूरत बहुत कम रह जाएगी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर कॉरपोरेट गलियारों तक में बहस छिड़ गई है। लोग यह सोचकर परेशान हैं कि अगर बीच के स्तर के मैनेजर्स की छुट्टी हो गई, तो करियर की सीढ़ी पर आगे कैसे बढ़ा जाएगा।
कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर एआई की सीधी चोट
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अब खर्च कम करने के रास्ते तलाश रही हैं। एआई टूल्स के आने से डेटा एनालिसिस, रिपोर्ट बनाने और टीम के काम पर नजर रखने जैसे काम बहुत आसान हो गए हैं। इसके लिए अब किसी महंगे मैनेजर की जरूरत नहीं पड़ती है। बिजनेस के पुराने मॉडल अब पीछे छूट रहे हैं और टेक-ड्रिवन सिस्टम उनकी जगह ले रहे हैं। यही वजह है कि बड़ी कंपनियां अब अपने ढांचागत बदलाव में मैनेजर्स की संख्या घटा रही हैं।
स्थिति यह है कि बैंक, बीमा कंपनियां, टेक फर्म और म्यूचुअल फंड जैसे सेक्टर भी एआई को तेजी से अपना रहे हैं। हाल ही में एसबीआई म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थाओं के आईपीओ और बिजनेस प्लान्स में भी तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की बात सामने आई है। जब हर काम ऑटोमैटिक होने लगेगा, तो इंसानी मध्यस्थों की उपयोगिता पर सवाल उठना लाजमी है।
नौकरी बचाने के लिए प्रोफेशनल्स को बदलने होंगे तौर-तरीके
इस बदलते दौर में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिडिल मैनेजमेंट के लोग क्या करें। जानकारों का कहना है कि सिर्फ पुरानी प्रशासनिक शैली से अब काम नहीं चलेगा। प्रोफेशनल्स को खुद को अपग्रेड करना होगा। उन्हें एआई टूल्स को अपना दुश्मन मानने के बजाय उनका इस्तेमाल करना सीखना होगा। जो लोग तकनीक के साथ तालमेल बिठा लेंगे, वे ही बाजार में टिक पाएंगे।
आम कर्मचारियों और मैनेजर्स के बीच इस बात को लेकर भारी असमंजस है कि भविष्य में उनका जॉब रोल क्या होगा। कंपनियां भी अभी इस बदलाव के शुरुआती दौर में हैं और इसके दूरगामी परिणाम आने वाले महीनों में साफ दिखाई देंगे। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि कॉरपोरेट सेक्टर में आने वाला समय बहुत कठिन और प्रतिस्पर्धा से भरा होने वाला है।
भविष्य की चुनौतियां और कॉरपोरेट जगत की तैयारी
आने वाले तीन सालों में एआई का दायरा और अधिक बढ़ने वाला है। इससे केवल नौकरियां जाने का ही खतरा नहीं है, बल्कि काम करने के तरीकों में भी बड़ा बदलाव आएगा। नीति निर्माताओं और कंपनियों को भी इस बात पर विचार करना होगा कि इस तकनीकी क्रांति से जो लोग बेरोजगार हो रहे हैं, उनके लिए नए रास्ते कैसे बनाए जाएं। फिलहाल, हर कोई इस बात पर नजर रखे हुए है कि बड़ी कंपनियां अगला कदम क्या उठाती हैं।







