नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के टैक्स सिस्टम और कारोबारियों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। वस्तु और सेवा कर यानी जीएसटी काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक आज दिल्ली में हो रही है। इस बैठक पर देश भर के व्यापारियों और छोटे-बड़े कारोबारियों की नजर टिकी हुई है। ब्रिक्स सम्मेलन के चलते इस बैठक की तारीख में दो बार बदलाव करना पड़ा था। पहले यह बैठक किसी और तारीख पर तय थी, लेकिन अब यह 8 अक्टूबर को यानी आज आयोजित हो रही है। बैठक में शामिल होने के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कई राज्यों के मंत्री और वित्त अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके हैं।
इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा कारोबारियों की लंबे समय से चली आ रही परेशानियों को दूर करना है। सरकार का मुख्य जोर जीएसटी के नियमों को ज्यादा से ज्यादा सरल और पारदर्शी बनाने पर है। पिछले कुछ सालों में टैक्स फाइलिंग और रिटर्न को लेकर कारोबारियों को कई तरह की तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए काउंसिल आज कई बड़े और अहम फैसलों पर मुहर लगा सकती है। खासकर छोटे कारोबारियों और नई कंपनियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को हल्का करने पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।
पंजीकरण से लेकर रिफंड तक बदलेंगे नियम
जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा रजिस्ट्रेशन और रिफंड का है। अभी तक नया जीएसटी नंबर लेने और टैक्स रिफंड पाने की प्रक्रिया काफी लंबी और उलझन भरी मानी जाती है। कारोबारियों को महीनों तक अपने पैसों के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। आज की बैठक में इन दोनों प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और पूरी तरह ऑटोमैटिक बनाने पर विचार किया जा रहा है। अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो नया बिजनेस शुरू करने वालों को जीएसटी पंजीकरण बहुत कम समय में मिल जाएगा। इसके अलावा, निर्यातकों और अन्य व्यापारियों के रुके हुए रिफंड का पैसा भी तेजी से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर हो पाएगा।
कानूनी सुधारों के मोर्चे पर भी आज कुछ अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जीएसटी कानून में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिन्हें लेकर व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी रहती है। टैक्स चोरी रोकने और ईमानदार करदाताओं को सुरक्षा देने के बीच संतुलन बनाने के लिए नियमों की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन सुधारों से देश भर में टैक्स कलेक्शन का दायरा भी बढ़ेगा और व्यापार करना आसान होगा। राज्यों के वित्त मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को इस मंच पर रख रहे हैं ताकि स्थानीय स्तर पर आ रही दिक्कतों का समाधान निकाला जा सके।
राज्यों के अपने मुद्दे और राजनीतिक हलचल
इस बैठक में केवल कर सुधार ही नहीं, बल्कि राज्यों के वित्तीय हितों पर भी लंबी चर्चा हो रही है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा इस लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकारों की तरफ से कर हिस्सेदारी और मुआवजे से जुड़े कुछ पुराने मुद्दों को भी उठाया जा सकता है। केंद्र और राज्यों के बीच आम सहमति बनाकर ही हर फैसले को अंतिम रूप दिया जाता है, इसलिए बैठकों का दौर काफी लंबा चल सकता है। अधिकारी और मंत्री हर एक प्रस्ताव पर बारीकी से विचार-विमर्श कर रहे हैं ताकि आम जनता या व्यापारियों पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नियमों का सरल होना बहुत जरूरी है। जानकारों का मानना है कि आज के फैसले यदि उम्मीद के मुताबिक रहे, तो बाजार में सकारात्मक संदेश जाएगा। छोटे व्यापारियों का समय बचेगा और वे अपने कारोबार पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। द फ्रीलान्स की टीम इस बैठक के हर एक अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए है। बैठक खत्म होने के बाद काउंसिल की तरफ से आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी बड़े फैसलों की पूरी सूची जारी की जाएगी, जिसके बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
कारोबारियों और आम जनता को क्या मिलेगा फायदा?
आम आदमी और खुदरा दुकानदारों के मन में यह सवाल है कि इस मीटिंग से उन्हें क्या मिलेगा। जानकारों का कहना है कि अगर सप्लाई चेन आसान होगी और टैक्स के नियम सुधरेंगे, तो सामानों की आवाजाही तेज होगी। इससे महंगाई पर लगाम लगाने में मदद मिलती है। हालांकि, आज की बैठक का मुख्य फोकस कॉरपोरेट और बिजनेस रजिस्ट्रेशन पर ही केंद्रित रहने की पूरी उम्मीद है।
जैसे-जैसे बैठक आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अलग-अलग सेक्टर से जुड़ी उम्मीदें भी सामने आ रही हैं। ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और एफएमसीजी सेक्टर के जानकारों की भी नजर इस बात पर है कि क्या किसी विशेष वस्तु या सेवा के टैक्स स्लैब में कोई बदलाव होता है या नहीं। हालांकि, अभी तक की प्राथमिक जानकारी के अनुसार मुख्य जोर सिर्फ प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर ही है। थोड़ी देर में काउंसिल की तरफ से आने वाले आधिकारिक बयानों से यह स्थिति भी बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगी कि किन-किन बदलावों को हरी झंडी मिली है।




