नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — एप्पल का नया फ्लैगशिप फोन बाजार में आते ही चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह थोड़ी अलग और चिंताजनक है। दुनिया भर के बाजारों में नए आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स की मांग में साफ तौर पर सुस्ती देखी जा रही है। हालात इतने बदल गए हैं कि कंपनी को मजबूरन अपने सप्लायर्स को फोन का प्रोडक्शन घटाने का निर्देश देना पड़ा है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, एप्पल ने अपने ऑर्डर में 15 से 20 प्रतिशत तक की भारी कटौती कर दी है।
इस सुस्ती के पीछे कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि फोन में इस्तेमाल होने वाली महंगी चिप्स की वजह से इसकी कीमत काफी बढ़ गई है। आम ग्राहकों के लिए इतनी बड़ी रकम चुकाना मुश्किल हो रहा है, जिससे लोग नया मॉडल खरीदने से पीछे हट रहे हैं। इसके अलावा वियतनाम और अन्य बाजारों से कुछ ऐसी तकनीकी शिकायतें भी आई हैं, जिन्होंने खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है।
आईफोन 18 प्रो के रंग बदलने की समस्या से बढ़े सवाल
वियतनाम से सामने आई रिपोर्टों ने एप्पल की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई शुरुआती ग्राहकों ने शिकायत की है कि आईफोन 18 प्रो में बिना किसी स्पष्ट कारण के फोन के रंग में बदलाव हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन खबरों ने उन लोगों को और ज्यादा सतर्क कर दिया है जो नया फोन खरीदने का मन बना रहे थे। हालांकि कंपनी की तरफ से इस रंग बदलने के मुद्दे पर अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इतनी महंगी कीमत वाले फोन में इस तरह की खामियां आना ग्राहकों को निराश करता है। जब कोई ग्राहक लाखों रुपये खर्च करके नया फोन खरीदता है, तो वह किसी भी तरह की तकनीकी या मैटेरियल संबंधी समस्या की उम्मीद नहीं करता है। रंग उड़ने या बदलने की इन शिकायतों ने बाजार में फोन की साख को थोड़ा झटका जरूर दिया है।
महंगी चिप्स और कम होती बिक्री का सीधा असर
इस पूरे मामले का एक बड़ा आर्थिक पहलू भी है। ग्लोबल मार्केट में सेमीकंडक्टर और चिप्स की बढ़ती लागत का सीधा असर फोन की फाइनल कीमत पर पड़ा है। एप्पल ने जब इन महंगे पार्ट्स के साथ आईफोन 18 प्रो को बाजार में उतारा, तो उसे उम्मीद थी कि ब्रांड वैल्यू के दम पर बिक्री मजबूत बनी रहेगी। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। आम आदमी की जेब पर पड़ रहे भारी बोझ के कारण लोग पुराने मॉडल्स या दूसरे विकल्पों के साथ बने रहना पसंद कर रहे हैं।
सप्लाई चेन से जुड़ी रिपोर्टों की मानें तो एप्पल ने अपने सप्लायर्स को तुरंत प्रभाव से उत्पादन धीमा करने को कह दिया है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि कंपनी गोदामों में स्टॉक जमा करने से बच रही है। बाजार के ताजा रुझानों को देखते हुए एप्पल अपनी रणनीति की दोबारा समीक्षा कर रहा है ताकि आने वाले महीनों में त्योहारी सीजन या अगले वित्तीय चक्र में स्थिति को संभाला जा सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे का रास्ता
हमारी फील्ड पड़ताल बताती है कि खुदरा दुकानों और बड़े इलेक्ट्रॉनिक स्टोरों पर भी पिछले मॉडल्स के मुकाबले इस बार लंबी कतारें देखने को नहीं मिल रही हैं। ग्राहक फोन की खूबियों को जरूर देख रहे हैं, लेकिन भारी-भरकम कीमत देखकर कदम पीछे खींच रहे हैं। एप्पल के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ उसे प्रीमियम सेगमेंट में अपनी बादशाहत बचानी है, तो दूसरी तरफ ग्लोबल स्तर पर घटती मांग से निपटना है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कंपनी कीमतों में किसी तरह की छूट या आकर्षक एक्सचेंज ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को लुभाने की कोशिश करती है या नहीं। फिलहाल तो यही लग रहा है कि आईफोन 18 प्रो मैक्स को अपनी खोई हुई रफ्तार पाने के लिए थोड़ा और संघर्ष करना पड़ेगा।





