चेन्नई/कोयंबटूर — तमिलनाडु में जनहित और शिक्षा से जुड़ी कई बड़ी खबरें इस समय चर्चा में हैं। राज्य सरकार ने आम जनता और युवाओं के बीच पढ़ने की आदत को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है। चेन्नई में मुख्यमंत्री के प्रयासों से शुरू हुई 'मुधलवार पडैप्पगम' योजना को बहुत सफलता मिली है। इसी सफलता से प्रेरणा लेते हुए अब कोयंबटूर शहर में भी आधुनिक ज्ञान और सह-कार्य केंद्र बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इन नए केंद्रों के बन जाने से स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों को पढ़ाई करने के लिए बेहतरीन माहौल मिलेगा।
कोयंबटूर में बनने वाले इन दोनों नए केंद्रों पर सरकार बड़ा निवेश कर रही है। प्रभु नगर और गणपथी इलाके में बनने वाले प्रत्येक केंद्र पर करीब तीन करोड़ और छब्बीस लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ये केंद्र लगभग आठ हजार वर्ग फीट के बड़े क्षेत्र में फैलाए जा रहे हैं। इन जगहों पर खास तौर पर किताबों से भरा हुआ पठन क्षेत्र बनाया जाएगा। इसके अलावा युवा यहां बैठकर अपनी पढ़ाई और जरूरी काम भी आसानी से कर सकेंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन सुविधाओं से छोटे शहरों और कस्बों के बच्चों को भी आगे बढ़ने के समान अवसर मिलेंगे।
कोयंबटूर में नए ज्ञान केंद्रों का विस्तार
शिक्षा और ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ राज्य सरकार ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पन्नों को भी संवारने में जुटी है। हाल ही में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बड़ा ऐलान किया है। ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल जॉन पेनीकूविक के जन्मस्थान पर उनकी आदमकद प्रतिमा लगाई जाएगी। यह प्रतिमा इंग्लैंड के कैंबरली शहर में स्थापित की जाएगी जिसे तमिलनाडु सरकार की ओर से भेजा जा रहा है। कर्नल पेनीकूविक वही ब्रिटिश इंजीनियर थे जिन्होंने मुल्लापेरियार बांध का निर्माण कराया था। उनके इस कार्य से तमिलनाडु के किसानों को जीवनदान मिला था और आज भी वहां के लोग उन्हें पूरी श्रद्धा से याद करते हैं।
सरकार के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है। इस अंतरराष्ट्रीय पहल से न केवल तमिलनाडु और ब्रिटेन के पुराने ऐतिहासिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि भावी पीढ़ी को भी उनके योगदान के बारे में पता चलेगा। दूसरी ओर, राज्य के युवा हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले अवसरों के जरिए छात्र देश-विदेश में तमिलनाडु का नाम रोशन कर रहे हैं। एनसीसी और अन्य युवा संगठनों से जुड़े कैडेट्स को अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान कार्यक्रमों में भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है ताकि वे वैश्विक मंच पर अनुभव प्राप्त कर सकें।
ऐतिहासिक योगदान और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
इन सभी विकास कार्यों के बीच स्थानीय मीडिया और डिजिटल मंचों पर भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ रही हैं। डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के डिजिटल संस्करणों तक लोगों की पहुंच आसान बनाई जा रही है। छात्र और आम नागरिक अब एक क्लिक पर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर जरूरी खबरें और लेख पढ़ सकते हैं। इससे सूचनाओं का आदान-प्रदान और अधिक तेज हो गया है तथा लोगों तक सही समय पर सटीक जानकारी पहुंच रही है।
जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी इन सभी परियोजनाओं की लगातार निगरानी कर रहे हैं। कोयंबटूर में बन रहे नए पठन केंद्रों का काम तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल में यह बात सामने आई है कि स्थानीय युवा इन सुविधाओं को लेकर काफी उत्साहित हैं। आने वाले दिनों में इन केंद्रों के शुरू होने से न केवल पठन-पाठन का माहौल सुधरेगा, बल्कि समाज के हर वर्ग के लोगों को आधुनिक डिजिटल और पुस्तकालय सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।





