नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — यूरोपीय फुटबॉल संघ यानी यूईएफए के मैदानों पर इन दिनों रोमांचक मुकाबले खेले जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में खेल की दुनिया से कई बड़ी और चौंकाने वाली खबरें सामने आई हैं। एक तरफ जहां क्लब फुटबॉल में पेरिस सेंट-जर्मेन यानी पीएसजी ने इतिहास रच दिया है, वहीं दूसरी तरफ नेशनल टीमों के बीच खेले जा रहे नेशंस लीग के मुकाबलों में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। इन सभी आयोजनों ने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है।
ताजा मुकाबलों की बात करें तो पीएसजी ने यूईएफए सुपर कप के फाइनल मैच में एस्टन विला को हरा दिया है। यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा जिसमें पीएसजी के खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया। इस जीत के साथ ही पीएसजी ने लगातार दूसरी बार सुपर कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। टीम के इस प्रदर्शन से उनके फैंस में भारी उत्साह है और पूरी दुनिया में इस जीत की चर्चा हो रही है। एस्टन विला की टीम ने भी कड़ा मुकाबला किया लेकिन अंत में पीएसजी का पलड़ा भारी रहा।
यूएफा नेशंस लीग में स्पेन की शानदार जीत
क्लब फुटबॉल के अलावा यूएफा नेशंस लीग के मैचों में भी यूरोपीय टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली है। स्पेन की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने एक कड़े मुकाबले में इंग्लैंड को तीन-दो के अंतर से हरा दिया है। इस मैच में स्पेनिश खिलाड़ियों ने मैदान पर बेहतरीन तालमेल दिखाया और इंग्लैंड को संभलने का कम मौका दिया। इस टूर्नामेंट के अन्य मुकाबलों में क्रोएशिया, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड और लक्जमबर्ग की टीमों ने भी अपने-अपने मैच जीतकर अंक तालिका में स्थिति मजबूत की है।
दूसरी ओर, खेल प्रशासन के गलियारों में भी हलचल काफी तेज है। खबरों के अनुसार यूईएफए के वर्तमान अध्यक्ष ने अपने पद के लिए एक और अंतिम कार्यकाल हेतु चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। इसके अलावा फीफा और यूईएफए के बीच के रिश्तों को लेकर भी खेल जगत में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हाल ही में एक राजनीतिक फोन कॉल के बाद फीफा के एक फैसले के पलट जाने पर यूईएफए ने इसे सरासर अन्याय करार दिया है। इन प्रशासनिक खींचतान का असर आने वाले समय में यूरोपीय फुटबॉल पर पड़ सकता है।
यूरोपीय फुटबॉल में आने वाले दिनों की नई चुनौतियां
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला समय यूरोपीय फुटबॉल के लिए बहुत अहम होने वाला है। एक तरफ जहां तमाम क्लब टीमें घरेलू और महाद्वीपीय ट्रॉफियों के लिए आपस में भिड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर हो रहे बदलाव भी खेल की दिशा तय करेंगे। पीएसजी की लगातार दूसरी सुपर कप जीत यह साबित करती है कि क्लब का प्रबंधन और खिलाड़ियों का फॉर्म इस समय शीर्ष पर है। वहीं एस्टन विला जैसी टीमों के लिए यह हार भविष्य में और बेहतर करने की सीख साबित होगी।
आम दर्शकों और फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह हफ्ता बेहद मनोरंजन से भरपूर रहा है। टेलीविजन और मोबाइल स्क्रीन पर इन मैचों को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। सोशल मीडिया पर भी पीएसजी की जीत और स्पेन के प्रदर्शन को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। खेल पत्रकारिता के नजरिए से यह घटनाएं आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स की एक छोटी सी झलक मात्र हैं।
फुटबॉल प्रशासन और खेल की बदलती तस्वीर
मैदान के खेल के साथ-साथ पर्दे के पीछे चल रही राजनीति भी अब किसी से छिपी नहीं है। अध्यक्षीय चुनावों और बड़े संगठनों के फैसलों पर दुनिया भर के खेल प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं। फुटबॉल को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए इन संघों की भूमिका सबसे अहम होती है। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी पड़ताल में यह साफ हो गया है कि खेल अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामयिक और प्रशासनिक पहलू भी उतने ही बड़े पैमाने पर असर डाल रहे हैं। आने वाले हफ्तों में इन सभी मुद्दों पर खेल जगत की पैनी नजर बनी रहेगी।






