यूक्रेन और रूस के बीच जारी खूनी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे के इलाकों पर अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले किए हैं। यूक्रेन में रूसी सेना ने लगातार ड्रोन हमले जारी रखे हैं। इन हमलों की चपेट में आकर लाखों गाड़ियों के आने-जाने वाले दो बेहद अहम पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस स्थिति ने आम नागरिकों की आवाजाही को बहुत ज्यादा मुश्किल बना दिया है और युद्ध के मैदान में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
दूसरी तरफ, यूक्रेनी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई में रूस के भीतर गहरी मार की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन ने रूसी शहरों पर रातभर में लगभग छह सौ पचास ड्रोन दागे। इन हमलों से रूस के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। हालांकि रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने कई ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया, फिर भी रूसी जवाबी कार्रवाई में कम से कम छह लोगों की जान जाने की खबर सामने आई है। इस आमने-सामने की जंग में दोनों पक्षों को भारी क्षति उठानी पड़ रही है।
ब्लैक सी में तेल टैंकर पर हमला और भारतीय नाविकों की मुश्किलें
युद्ध का दायरा अब समंदर तक फैल चुका है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है। ब्लैक सी यानी काला सागर से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर यूक्रेनी ड्रोन ने हमला कर दिया। इस हमले के बाद टैंकर में भीषण आग लग गई और आसमान में दूर-दूर तक काले धुएं के गुबार छा गए। पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर यह तीसरा हमला बताया जा रहा है। इस घटना ने उन विदेशी जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की जान जोखिम में डाल दी है जो इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समुद्र के अलावा जमीन पर भी बुनियादी ढांचे को तहस-नहस करने का दौर जारी है। रूसी सेना ने यूक्रेन के महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाते हुए सत्तर से अधिक मिसाइलें दागी हैं। इन ताबड़तोड़ मिसाइल हमलों की वजह से यूक्रेन के कई शहरों में बिजली और पानी की सप्लाई ठप हो गई है। ताजा हमलों और मलबे के नीचे दबने से ग्यारह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव दल लगातार मलबे को हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के काम में जुटे हुए हैं।
युद्ध में फंसे भारतीयों की दर्दनाक कहानियां और धोखे का शिकार युवा
इस खूनी संघर्ष के बीच दुनिया के दूसरे देशों से गए युवाओं की कहानियां भी डराने वाली हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही इस लड़ाई में कई विदेशी नागरिक भी धोखे से फंस गए हैं। हाल ही में इस युद्ध में गंभीर रूप से घायल हुए गगनदीप नाम के भारतीय युवक ने अपनी आपबीती सुनाई है। गगनदीप ने बताया कि उसे धोखे से युद्ध के मोर्चे पर धकेल दिया गया था। उसने कहा कि एक समय तो उसे ऐसा लगने लगा था कि वह जिंदा अपने घर कभी नहीं लौट पाएगा और विदेशी अनुबंध के जाल में पूरी तरह फंस चुका है।
जमीनी हकीकत यह है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों की सेनाओं तक सीमित नहीं रहा है। इसमें आम नागरिक, बुनियादी ढांचे, समुद्री मार्ग और दूसरे देशों से पहुंचे कामगार भी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। दोनों देशों की तरफ से जिस तरह से भारी मात्रा में विस्फोटक, मिसाइलें और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे शांति की उम्मीदें लगातार धूमिल होती जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है, लेकिन मैदानी हालात दिन-प्रतिदिन और अधिक भयावह होते जा रहे हैं।
शीतकालीन और कूटनीतिक मोर्चे पर बढ़ती हलचल
आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही इस युद्ध के और ज्यादा क्रूर होने की आशंका जताई जा रही है। ठंड बढ़ने के साथ ही यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर रूसी हमलों का मकसद आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ाना है ताकि मनोबल तोड़ा जा सके। वहीं यूक्रेन भी रूस की मुख्य भूमि पर लगातार ड्रोन हमले करके दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट से साफ है कि जब तक दोनों देश किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंचते, तब तक आम लोगों की यह मुसीबतें यूं ही बनी रहेंगी।





