नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — धरती के भीतर मची उथल-पुथल ने एक बार फिर आम जनजीवन को डरा दिया है। पिछले कुछ घंटों के दौरान भारत के कई राज्यों से लेकर समंदर पार विदेशी धरती तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। ताजा आंकड़ों और जमीनी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में अचानक धरती कांप उठी। लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर सुरक्षित खुली जगहों की तरफ भागने लगे। गनीमत यह रही कि शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े जानमाल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम पूरी तरह मुस्तैद हो गई है.
केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि देश के तेलंगाना राज्य में भी धरती हिलने के मामले सामने आए हैं। तेलंगाना के पलवंचा और भद्राचलम जैसे इलाकों में लोग गहरी नींद में थे जब अचानक उन्हें झटके महसूस हुए। आधी रात के वक्त आए इन झटकों के बाद लोग डर के मारे सड़कों पर आ गए। मौसम विभाग और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र इन सभी गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने के कारण इस तरह की अचानक हलचलें बढ़ जाती हैं, जो भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील संकेत हैं.
विदेशी धरती पर भी कुदरत का कहर
भारत के अलावा दुनिया के दूसरे कोनों में भी भूकंप के शक्तिशाली झटके दर्ज किए गए हैं। पूर्वी इनेशिया के फ्लोरेस द्वीप पर आए तेज भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। वहां के मउमेरे शहर के एक बंदरगाह पर बना हुआ भारी-भरकम भवन का हिस्सा ढहकर सीधे समुद्र के पानी में जा गिरा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आपदा ने लोगों के मन में सुनामी और बड़े हादसों की पुरानी डरावनी यादें ताजा कर दी हैं। हालांकि वहां राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है ताकि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके.
इनेशिया के साथ-साथ दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में भी रिक्टर स्केल पर काफी ज्यादा तीव्रता वाला भूकंप आया है। कोलंबिया में आए इस शक्तिशाली भूकंप की तीव्रता करीब 7.4 मापी गई है। इतनी भारी तीव्रता होने के कारण कई पुरानी इमारतें और रिहायशी मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए। झटकों की गूंज इतनी तेज थी कि दूर-दराज के शहरों में भी लोग दहशत में अपने घरों से बाहर सड़कों पर आ गए। कोलंबियाई प्रशासन ने आपातकाल की घोषणा करते हुए युद्ध स्तर पर राहत अभियान शुरू कर दिया है ताकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके.
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प्रशासन की चेतावनी और एहतियाती कदम
लगातार आ रहे इन भूकंपीय झटकों ने एक बार फिर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। भारत के जिन इलाकों में झटके महसूस किए गए हैं, वहां स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। घर बनाते समय या पुरानी इमारतों में रहते समय सुरक्षा मानकों का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इंजीनियरों का मानना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन मजबूत ढांचा तैयार करके जान-माल के नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता है.
द फ्रीलान्स की टीम लगातार देश और दुनिया के तमाम मौसम विज्ञान केंद्रों के संपर्क में है। विशेषज्ञों का कहना है कि धरती के अंदरूनी हिस्सों में ऊर्जा लगातार जमा हो रही है, जिसके चलते दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फॉल्ट लाइंस एक्टिव हो रही हैं। आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे अपने घरों में आपातकालीन किट तैयार रखें और भूकंप आने की स्थिति में तुरंत किसी मजबूत टेबल के नीचे या खुले मैदान में शरण लें। प्रशासनिक अमला पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.
सुरक्षा के उपाय और जरूरी सावधानियां
भूकंप जैसी आपदा अचानक आती है और तैयारी का बहुत कम मौका देती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर नागरिक बुनियादी सुरक्षा नियमों से पूरी तरह वाकिफ हो। जब भी झटके महसूस हों, लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें और हमेशा सीढ़ियों का प्रयोग करें। बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। स्थानीय निकाय और आपदा प्रबंधन विभाग समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करते हैं ताकि आम लोग ऐसे हालातों में घबराए बिना सही कदम उठा सकें। हमारी यह ग्राउंड रिपोर्ट साफ करती है कि प्रकृति के इन अप्रत्याशित हमलों से बचने का एकमात्र उपाय सावधानी और मुस्तैदी ही है.








