नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की प्रमुख रक्षा निर्माण कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल ने तकनीकी दुनिया में एक बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। कंपनी ने अपने उत्पादन केंद्रों में स्वदेशी तकनीक से अपना दो हजारवां एयरो-इंजन तैयार कर लिया है। यह उपलब्धि भारतीय वायु सेना की ताकत को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। पिछले कुछ सालों में देश के भीतर ही रक्षा उपकरण बनाने की सोच को जमीन पर उतारने का यह एक जीता-जागता उदाहरण है। इस सफलता के बाद अब रक्षा क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का अगला बड़ा लक्ष्य देश की अपनी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट को ताकत देना है।
कंपनी के इस शानदार सफर के पीछे देश के वैज्ञानिकों की सालों की कड़ी मेहनत और तकनीकी रिसर्च छिपी है। छोटे हेलीकॉप्टरों से लेकर देश में बनने वाले विभिन्न प्रकार के सैन्य विमानों तक के लिए एचएएल लगातार इंजन तैयार कर रहा है। आज जब दुनिया के तमाम देश अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं, तब भारत का यह कदम आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रहा है। दो हजार इंजनों का यह आंकड़ा यह बताता है कि हमारे कारखानों में अब बड़े पैमाने पर और आधुनिक तकनीक से काम हो रहा है। वायु सेना के बेड़े को समय पर इंजन मिलते रहने से देश की सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा एक नई रफ्तार मिलती रहती है।
एएमसीए प्रोजेक्ट के लिए पांच हजार करोड़ का नया मिशन
इस बड़ी सफलता के तुरंत बाद ही एचएएल और सरकार ने अपने सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर ध्यान लगाना शुरू कर दिया है। देश के अगले लड़ाकू विमान यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के नए हाई-थ्रस्ट इंजन मिशन को मंजूरी दी गई है। इस भारी भरकम बजट का मुख्य मकसद एक ऐसा ताकतवर इंजन बनाना है जो हमारे नए फाइटर जेट को आसमान में बेजोड़ रफ्तार और मारक क्षमता दे सके। अभी तक भारत को अपने बड़े लड़ाकू जहाजों के लिए दूसरे देशों से इंजन मंगवाने पड़ते थे। लेकिन इस नए मिशन के पूरा होने के बाद भारत अपने ही देश में दुनिया के सबसे आधुनिक और ताकतवर इंजन बना सकेगा।
इस पांच हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर देश की बड़ी वैज्ञानिक संस्थाएं और निजी क्षेत्र की कंपनियां मिलकर काम करेंगी। इसमें तकनीक के आदान-प्रदान और नए अनुसंधान के लिए कई विदेशी रक्षा कंपनियों से भी बातचीत चल रही है। योजना यह है कि इस इंजन का डिजाइन और उसका पूरा विकास देश के भीतर ही किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी विदेशी पाबंदी का सामना न करना पड़े। वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक युद्ध के मैदान में वही देश आगे रहता है जिसके पास अपने खुद के विमान और उनके दमदार इंजन होते हैं। इस दिशा में उठाया गया यह कदम भारत को दुनिया के चुनिंदा ताकतवर देशों की कतार में ला खड़ा करेगा।
घरेलू रक्षा उद्योगों को मिल रहा है नया बढ़ावा
एचएएल के इस दो हजारवें इंजन के बनने और नए मिशन के शुरू होने से देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बहुत काम मिल रहा है। विमान के इंजन में लगने वाले हजारों छोटे-छोटे पुर्जे अब देश की सैकड़ों छोटी कंपनियां बना रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं और युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। सरकार की कोशिश है कि रक्षा उत्पादन के मामले में देश को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाया जाए ताकि विदेशी मुद्रा देश के भीतर ही रहे और हमारी तकनीकी क्षमता मजबूत हो। आने वाले दिनों में इन उद्योगों का दायरा और ज्यादा बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
मैदान पर काम कर रहे इंजीनियरों और जानकारों का मानना है कि आने वाला समय भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के लिए स्वर्णिम काल साबित होगा। हालांकि, इतने बड़े इंजन को डिजाइन करना और उसका कड़ा परीक्षण करना एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम है जिसमें समय और धैर्य दोनों की जरूरत होती है। लेकिन जिस तरह से एचएएल ने अब तक दो हजार इंजन सफलतापूर्वक बनाकर सौंपे हैं, उससे यह भरोसा मजबूत होता है कि हमारा वैज्ञानिक समुदाय इस बड़ी चुनौती को भी पार कर लेगा। देश की जनता और रक्षा विशेषज्ञ अब इस नए हाई-थ्रस्ट इंजन के पहले सफल परीक्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
भواविष्य की रणनीतिक तैयारी और हमारी रक्षा चौकसी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते हालातों को देखते हुए भारत अपनी रक्षा तैयारियों में कोई ढील नहीं छोड़ना चाहता है। पड़ोसी देशों की सीमाओं पर लगातार बढ़ रही चुनौतियों का जवाब देने के लिए हमारे आसमान के रखवालों के पास सबसे आधुनिक तकनीक होना बहुत जरूरी है। एएमसीए प्रोजेक्ट के तहत बनने वाला यह नया इंजन हमारे विमानों को दुश्मन के रडार से बचाने और लंबी दूरी तक मार करने में पूरी तरह सक्षम होगा। द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि देश के रक्षा कारखानों में अब दिन-रात काम चल रहा है और तय समयसीमा के भीतर ही हर प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कुल मिलाकर, एचएएल द्वारा दो हजारवां एयरो-इंजन तैयार करना और एएमसीए के लिए पांच हजार करोड़ के मिशन पर जोर देना भारत की बढ़ती हुई तकनीकी ताकत का सुबूत है। यह न सिर्फ हमारी सेना का मनोबल बढ़ाता है बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह सक्षम है। आने वाले कुछ वर्षों में जब यह नया हाई-थ्रस्ट इंजन बनकर तैयार हो जाएगा, तब भारतीय वायु सेना की ताकत में एक ऐतिहासिक इजाफा देखने को मिलेगा। देश का हर नागरिक इस स्वदेशी ताकत के पूरा होने की उम्मीद के साथ आसमान की तरफ देख रहा है।







