ब्रिटिश साहित्य जगत के दिग्गज लेखक जेफ्री आर्चर (Jeffrey Archer) दुनिया भर में अपने बेस्टसेलर उपन्यासों के लिए जाने जाते थे। ब्रिटेन से ज्यादा उनकी फैन फॉलोइंग भारत में मानी जाती थी, जहां उनकी किताबें हाथों-हाथ बिकती थीं। हालांकि, भारतीय संस्कृति और पाठकों से गहरा लगाव होने के बावजूद, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड को लेकर उनका अनुभव हमेशा से काफी कड़वा और विवादित रहा था। एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने बॉलीवुड को सीधे तौर पर 'चोरों का गिरोह' तक कह डाला था।
जब बॉलीवुड पर लगे साहित्यिक चोरी के गंभीर आरोप
साल 2015 में दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान जेफ्री आर्चर ने बॉलीवुड पर उनकी कहानियों की अवैध रूप से नकल करने का आरोप लगाया था। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लोग उनकी किताबें बिना उनकी अनुमति के उठा लेते हैं। आर्चर ने विशेष रूप से दो फिल्मों का जिक्र किया था—रणवीर सिंह और अनुष्का शर्मा स्टारर फिल्म 'लेडीज वर्सेज रिकी बहल' (2011) और राकेश रोशन की फिल्म 'खुदगर्ज' (1987)।
आर्चर का दावा था कि 'लेडीज वर्सेज रिकी बहल' उनकी 1976 में आई प्रसिद्ध किताब 'Not a Penny More, Not a Penny Less' की कहानी पर आधारित थी। इस उपन्यास में जिन ठगे गए किरदारों का जेंडर पुरुष था, फिल्म में उन्हें महिलाओं (अनुष्का शर्मा, परिणीति चोपड़ा और दीपान्निता शर्मा) में बदल दिया गया था। इसी तरह, उनका कहना था कि 'खुदगर्ज' उनके लोकप्रिय उपन्यास 'Kane and Abel' से प्रेरित थी।
बॉलीवुड से नाराजगी और भारत से अटूट रिश्ता
एक तरफ जहां आर्चर बॉलीवुड निर्माताओं के काम करने के तरीके से बेहद नाराज थे और दोयम दर्जे के रवैये की आलोचना कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भारत के प्रति उनका आकर्षण कभी कम नहीं हुआ। उनके निधन से पहले और बाद के वर्षों में कई भारतीय फिल्ममेकर्स ने उनकी किताबों के आधिकारिक राइट्स खरीदने में रुचि दिखाई। निर्माता शीतल तलवार ने उनके उपन्यास 'First Among Equals' और कहानी संग्रह 'A Twist in the Tale' के अधिकार खरीदे थे। इसके अलावा, हंसल मेहता जैसे निर्देशक भी 'Kane and Abel' के राइट्स को लेकर चर्चा कर चुके थे।
जेफ्री आर्चर भारत पर आधारित एक खास किताब भी लिखना चाहते थे, जिसका केंद्रबिंदु बॉलीवुड की एक अभिनेत्री होने वाली थी, हालांकि यह योजना कभी पूरी नहीं हो सकी। अपनी व्यापक लोकप्रियता और बड़े पैमाने पर हुई किताबों की पायरेसी के कारण उन्हें भारत में प्यार से 'द लॉर्ड ऑफ द पेपरबैक्स' भी कहा जाता था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मीडिया रिपोर्ट्स में छपी जानकारियों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह मामला साहित्यिक जगत और बॉलीवुड के बीच चर्चा का विषय रहा है। साभार: संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स / आर्चेर इंटरव्यू।







