नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शुमार रिलायंस जियो इन दिनों एक अनोखी अफवाह को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पिछले चौबीस घंटों से एक मैसेज तेजी से घूम रहा है। इस वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि रिलायंस जियो देश के जाने-माने फेडरल बैंक को खरीदने जा रही है। लोग इस खबर को सच मानकर धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं। 'द फ्रीलान्स' की टीम ने जब इस पूरे मामले की जमीनी और डिजिटल पड़ताल की, तो यह दावा पूरी तरह फर्जी निकला। जियो या रिलायंस समूह की तरफ से ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वायरल हो रहे इस फर्जी संदेश में एक फर्जी प्रेस रिलीज का इस्तेमाल किया गया है। इस बनावटी प्रेस रिलीज में बैंक के अधिग्रहण और पैसों के लेन-देन को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। जब हमारे संवाददाताओं ने वित्तीय बाजार और बैंकिंग सेक्टर के जानकारों से बात की, तो उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। जानकारों ने साफ कहा कि इस तरह के बड़े कॉर्पोरेट सौदों की सूचना शेयर बाजार को आधिकारिक रूप से दी जाती है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर ऐसी कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि यह सिर्फ एक सोची-मझी अफवाह है जिसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।
वायरल प्रेस रिलीज की असली सच्चाई क्या है?
सोशल मीडिया पर वायरल हुई उस तथाकथित प्रेस रिलीज को अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो कई कमियां नजर आएंगी। उस पत्र में इस्तेमाल की गई भाषा और शब्दों का चयन किसी पेशेवर कॉर्पोरेट फर्म जैसा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स और फैक्ट चेक एजेंसियों ने भी इसकी पुष्टि कर दी है कि यह पूरी तरह एक मनगढ़ंत दस्तावेज है। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की झूठी खबरें अक्सर किसी खास मकसद से फैलाई जाती हैं। इनसे निवेशकों के मन में भ्रम पैदा होता है और शेयर बाजार में अनावश्यक हलचल मच सकती है। ऐसी फर्जी जानकारियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
फेडरल बैंक के प्रबंधन या रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से अभी तक इस पर कोई बड़ा कानूनी कदम नहीं उठाया गया है। लेकिन कंपनी के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे इस तरह की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे हैं। डिजिटल युग में फेक न्यूज का यह नया दौर आम लोगों को बहुत आसानी से चकमा दे देता है। कई बार लोग बिना सोचे-समझे ऐसे संदेशों को आगे बढ़ा देते हैं, जिससे माहौल खराब होता है। जिम्मेदार नागरिकों का यह फर्ज बनता है कि वे किसी भी वायरल संदेश को आगे भेजने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें।
जीनोमिक डायग्नोस्टिक्स में रिलायंस का नया कदम
एक तरफ जहां जियो के बैंक अधिग्रहण की झूठी खबरें तैर रही हैं, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज असल में एक दूसरे बड़े सेक्टर में उतर रही है। कंपनी जल्द ही देश में कम लागत वाली जीनोमिक टेस्टिंग यानी डीएनए और जेनेटिक जांच के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने की योजना बना रही है। इस नई पहल का मकसद देश के आम लोगों तक सस्ती और सटीक मेडिकल जांच पहुंचाना है। डिजिटल हेल्थ सेक्टर से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, रिलायंस हेल्थकेयर के इस नए प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
इस नई स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी तकनीक काफी आधुनिक होगी और इसका खर्च भी काफी कम रखा जाएगा। आम जनता को महंगी मेडिकल जांच से राहत दिलाने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। हालांकि, बैंक अधिग्रहण जैसी अफवाहों के बीच इस असली बिजनेस प्लान की चर्चा थोड़ी पीछे छूट गई है। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस का यह स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रवेश देश के हेल्थकेयर बाजार का नक्शा बदल सकता है। लोगों को अब सस्ते दामों पर बीमारियों की सटीक जानकारी मिल सकेगी।
रीचार्ज कराने और ऐसी खबरें देखने से पहले रखें ध्यान
इंटरनेट पर किसी भी तरह की सनसनीखेज खबर को देखने के बाद घबराने की जरूरत नहीं होती है। खासकर जब बात बड़े बैंकों या बड़ी कंपनियों के विलय की हो, तो हमेशा आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह साफ हो जाता है कि फेडरल बैंक और जियो का दूर-दूर तक ऐसा कोई सौदा नहीं हुआ है। अगर आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आता है, तो उसे तुरंत डिलीट करें और दूसरों को भी सतर्क करें। सुरक्षित रहें और केवल भरोसेमंद माध्यमों से ही वित्तीय या तकनीकी खबरें पढ़ें।





