दृश्यम फ्रेंचाइजी की तीसरी कड़ी 'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' में अभिनेता कमलेश सावंत एक बार फिर इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे के किरदार में दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। फ्रेंचाइजी के इस जिद्दी और तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी के तौर पर सावंत ने गायतोंडे को दृश्यम की दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले किरदारों में शामिल कर लिया है। फिल्म में उनकी ताजा परफॉर्मेंस ने एक बार फिर याद दिलाया है कि पर्दे पर पुलिस अधिकारी के किरदार को विश्वसनीय ढंग से निभाने वाले अभिनेताओं में कमलेश सावंत की अपनी अलग जगह है।
अजय देवगन के 'सिंघम' से बिल्कुल अलग है गायतोंडे का अंदाज
गायतोंडे उन पुलिस किरदारों से बिल्कुल अलग है, जिन्हें बॉलीवुड अक्सर बड़े-बड़े एक्शन और डायलॉग्स के साथ पेश करता रहा है। अजय देवगन सिंघम सीरीज के स्टार कॉप हैं, लेकिन गायतोंडे का संसार बिल्कुल अलग है। वह न तो हर समस्या का हल मारधाड़ में खोजता है और न ही उसकी ताकत किसी फिल्मी स्टाइल में दिखाई जाती है। उसकी असली ताकत है केस को छोड़ने से इनकार करना। हर बार मात खाने के बाद भी वह लौटता है, पहले से ज्यादा दृढ़ होकर। उसका एक ही मकसद है, सच तक पहुंचना और विजय सलगांवकर को अपराधी साबित करना।
साल 2015 में आई पहली दृश्यम ने उन्हें बड़े स्तर पर पहचान दिलाई, लेकिन पुलिस वाले का किरदार कमलेश सावंत के लिए नया नहीं था। अपने करियर में वह कई फिल्मों में पुलिस अधिकारी या कानून-व्यवस्था से जुड़े किरदार निभा चुके हैं। इन भूमिकाओं में उनकी खासियत रही है, बिना जरूरत के ज्यादा शोर किए किरदार में एक दबा हुआ तनाव और वास्तविकता बनाए रखना।
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थिएटर, मराठी सिनेमा से लेकर बॉलीवुड का लंबा सफर
कमलेश सावंत का पुलिस किरदारों से रिश्ता दृश्यम से काफी पुराना है। साल 2004 में आई उनकी बॉलीवुड डेब्यू फिल्म 'खाकी' में उन्होंने कॉन्स्टेबल की भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह 'मुंबई मेरी जान' (2008), 'राइट या रॉन्ग' (2010), 'फोर्स' (2011) और 'भूतनाथ रिटर्न्स' (2014) जैसी फिल्मों में भी पुलिस या कानून-व्यवस्था से जुड़े किरदारों में नजर आए।
हालांकि कमलेश सावंत के करियर की पहचान सिर्फ पुलिस वाले किरदारों तक सीमित नहीं है। वह मराठी सिनेमा और टेलीविजन का भी जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने 2007 में फिल्म 'एक क्रांतिवीर: वासुदेव बलवंत फड़के' से मराठी फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद वह 'रिंगा रिंगा' (2010), 'लालबाग परळ' (2010) और 'दगड़ी चॉल' (2015) जैसी फिल्मों में दिखाई दिए।
कड़ी अनुशासन और फिटनेस से संवरा करियर
कमलेश सावंत का जन्म 12 जून 1974 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अनुशासन और फिटनेस का माहौल मिला। उनके पिता तुकाराम सावंत भारतीय रेलवे में क्लर्क और स्पोर्ट्स सेक्रेटरी थे। उन्होंने कमलेश और उनके भाई को बॉडीबिल्डिंग के लिए प्रोत्साहित किया। कड़ी ट्रेनिंग ने कमलेश में अनुशासन और फिटनेस की आदत विकसित की, जो आगे चलकर उनके अभिनय करियर में भी काम आई। उनका एथलेटिक व्यक्तित्व और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस उन पुलिस किरदारों के लिए भी मुफीद साबित हुआ, जिन्हें उन्होंने पर्दे पर निभाया।
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