'आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने...' ये बात नाना पाटेकर ने अपने खास अंदाज में कही थी, लेकिन उनके जाने का अहसास अब दिल में कांटे जैसा चुभ रहा है। उनके जैसा कोई दूसरा अभिनेता नहीं हुआ! नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह एक ऐसी आवाज थे, जिसे सुनते ही पर्दे पर गुस्सा, दर्द और सच्चाई- तीनों एक साथ महसूस होने लगते थे। उनकी अदायगी की खासियत यह थी कि उनका बोला हुआ संवाद सिर्फ शब्दों का मेल नहीं रहता था, बल्कि वह देश की आम जनता की जुबान का हिस्सा बन जाता था।
जब एक संवाद ने रच दिया इतिहास
नाना के यूं तो कई बेहतरीन और यादगार डायलॉग्स रहे हैं, लेकिन क्या आपको 1997 की फिल्म 'यशवंत' का वह संवाद याद है- 'एक मच्छर, साला एक मच्छर आदमी इंसान को आदमी से हिजड़ा बना देता है...'। आज शायद बहुत से लोगों को 'यशवंत' की पूरी कहानी याद न हो, और न ही फिल्म के किरदार का नाम जेहन में हो, लेकिन ये शब्द सुनते ही नाना पाटेकर की वही तीखी, गुस्से से भरी आवाज कानों में गूंजने लगती है। यही किसी कलाकार की सबसे बड़ी विरासत होती है- जब उसका किरदार और फिल्म पीछे छूट जाएं, लेकिन उसकी आवाज लोगों के दिलों और यादों में हमेशा के लिए जिंदा रहे।
उस फिल्म में नाना पाटेकर ने इंस्पेक्टर यशवंत लोहार का किरदार निभाया था, जो व्यवस्था के भीतर फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ अकेले लड़ता एक ईमानदार लेकिन बेहद गुस्सैल पुलिस अधिकारी था। फिल्म अपने आप में बॉक्स ऑफिस पर कोई बहुत बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर पाई, लेकिन नाना की अदाकारी ने उसे अमर बना दिया। उनकी आवाज में वह गुस्सा सिर्फ अभिनय नहीं लगता था, बल्कि ऐसा प्रतीत होता था जैसे कोई व्यक्ति अपने भीतर वर्षों से जमा बेचैनी को अचानक बाहर निकाल रहा हो।
पीढ़ियों को जोड़ने वाला अभिनय
'परिंदा', 'प्रहार', 'अंगार', 'क्रांतिवीर', 'खामोशी: द म्यूजिकल' से लेकर 'अअब तक छप्पन', 'नटसम्राट' और 'वेलकम' तक, नाना पाटेकर ने हर बार एक बिल्कुल नया और अनूठा चेहरा दिखाया। कभी गुस्सा, कभी दर्द, कभी सख्ती और कभी हास्य- हर किरदार में उनकी अपनी एक अमिट छाप रही। आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) के लिए भले ही 'यशवंत' का वह संवाद अनसुना हो, लेकिन वे उन्हें 'वेलकम' के 'उदय शेट्टी' के रूप में बखूबी जानते हैं, जो 'कंट्रोल उदय, कंट्रोल' कहते हुए आज भी मीम्स की दुनिया में राज कर रहे हैं।
एक महान कलाकार की असली अमरता यही होती है कि इंसान भले ही इस दुनिया से चला जाए, लेकिन उसकी कला और उसकी आवाज लोगों के जहन में हमेशा ताजा रहती है। नाना पाटेकर हमारे लिए सिर्फ उदय शेट्टी, प्रताप या यशवंत लोहार नहीं, बल्कि एक युग हैं।
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