नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से लगातार उठापटक जारी है। बाजार खुलते ही बिकवाली हावी हो जाती है और निफ्टी-50 कभी 22,600 के नीचे लुढ़क जाता है तो कभी संभलने की कोशिश करता है। पिछले आठ हफ्तों की सुस्ती के बाद बाजार में थोड़ी हरियाली क्या लौटी, निवेशकों के मन में यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या यह असली तेजी है या फिर कोई बड़ा वित्तीय ट्रैप। द फ्रीलान्स की टीम ने इस मामले की जमीनी और आंकड़ों के आधार पर गहरी पड़ताल की है ताकि निवेशकों को सही तस्वीर दिखाई जा सके।
बाजार के जानकारों और दिग्गज फंड मैनेजरों का एक बड़ा वर्ग इस मौजूदा गिरावट को घबराने की बजाय एक सुनहरे मौके के रूप में देख रहा है। उनका कहना है कि निफ्टी और सेंसेक्स में आने वाले कुछ हफ्तों में पचास प्रतिशत तक की बढ़त की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आंकड़े बताते हैं कि बाजार के वैल्यूएशन अब थोड़े आकर्षक हो चुके हैं, जिससे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इसमें पैसा लगाने का यह सही समय हो सकता है। हालांकि, बाजार की चाल जिस तरह से पलटा खा रही है, उससे छोटे निवेशक डरे हुए हैं और सुरक्षित कदम उठाना चाहते हैं।
निफ्टी में उतार-चढ़ाव और 22,600 के नीचे फिसलने की असली वजह
कारोबारी सत्र के दौरान शुरुआती चंद मिनटों में ही बाजार का ऊपरी स्तरों से टूट जाना यह साफ दिखाता है कि ऊंचे दामों पर मुनाफावसूली हावी है। बड़ी कंपनियां और संस्थागत निवेशक अपने शेयर बेचकर मुनाफा निकाल रहे हैं, जिसका सीधा असर सूचकांक पर पड़ रहा है। पिछले हफ्ते कारोबार की शुरुआत में ही बिकवाली के दबाव के कारण निफ्टी 22,600 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया था। हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह का करेक्शन स्वस्थ बाजार की निशानी है, जो हमेशा एकतरफा भागने के बजाय सांस लेने का मौका देता है।
दूसरी तरफ, कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में निफ्टी-50 की कंपनियों का मुनाफा करीब 24.7 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इस मुनाफे में रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियों की भूमिका सबसे बड़ी रहने वाली है। जब देश की सबसे बड़ी कंपनियां इतना मजबूत मुनाफा कमाएंगी, तो उसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि विश्लेषक मान रहे हैं कि यह मंदी का दौर ज्यादा लंबा नहीं टिकेगा।
क्या यह असली तेजी है या किसी बड़े ट्रैप में फंसने की शुरुआत?
आठ हफ्ते की सुस्ती के बाद बाजार में लौटी हरियाली को लेकर निवेशकों के मन में संशय बना हुआ है कि कहीं यह कोई चाल तो नहीं है। तकनीकी संकेतक हालांकि यह संकेत दे रहे हैं कि बाजार में मंदी का जोर अब कम हो रहा है। चार्ट पर नजर डालें तो निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों ही कुछ खास और अहम लेवल्स पर ट्रेड कर रहे हैं। यदि बाजार इन तय सीमाओं को पार कर जाता है, तो आने वाले दिनों में जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय टेक्निकल चार्ट और सपोर्ट लेवल्स को ध्यान से देखें।
आम निवेशकों के लिए इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे अपने पोर्टफोलियो में किस तरह फेरबदल करें। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बाजार की हर बड़ी गिरावट पर डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में धीरे-धीरे पैसा लगाना चाहिए। एकमुश्त सारा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करना इस समय सबसे समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है। बाजार में जब तक अनिश्चितता बनी है, तब तक जोखिम प्रबंधन सबसे बड़ा हथियार है।
भविष्य की चाल और निवेशकों के लिए जरूरी सावधानी
द फ्रीलान्स की इस पड़ताल का निष्कर्ष यही है कि शेयर बाजार में जोखिम और अवसर दोनों साथ-साथ चलते हैं। वैश्विक संकेतों, कंपनियों के मजबूत वित्तीय परिणामों और घरेलू संस्थागत निवेशकों के समर्थन के कारण भारतीय बाजार की नींव अभी भी मजबूत बनी हुई है। बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए निवेशकों को धैर्य रखना होगा और अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार ही फैसले लेने होंगे। किसी भी तरह की अफवाहों या सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय अपने वित्तीय सलाहकार की मदद लेना हमेशा सुरक्षित रहता है।







