देशभर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) यानी 'राशन' को लेकर इन दिनों गूगल ट्रेंड्स पर सर्च अचानक तेज हो गई है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम ने जब इस अचानक उभरे रुझान की तह तक जाने की कोशिश की, तो कई चौंकाने वाले और जमीनी बदलाव सामने आए। पिछले कुछ घंटों में लाखों लोगों द्वारा इस विषय पर सर्च किए जाने के पीछे मुख्य वजह राशन कार्ड से जुड़ी नई डिजिटल प्रक्रियाएं और पात्रता के नियमों में हो रहे बदलाव हैं।
डिजिटलीकरण और ई-केवाईसी का जमीनी असर
राज्यों की राजधानियों से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक, उचित मूल्य की दुकानों (फेयर प्राइस शॉप्स) पर इस समय भारी हलचल है। सरकार द्वारा अनिवार्य की गई ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया और आधार सीडिंग ने आम नागरिकों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हमारी टीम ने जब दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ राशन डीलरों और कतार में खड़े आम लोगों से बात की, तो यह साफ हुआ कि लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या उनके नाम सूची से कट तो नहीं जाएंगे।
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पारदर्शिता की ओर एक कदम
प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि इन तमाम डिजिटल सुधारों का उद्देश्य फर्जी राशन कार्डों पर लगाम लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि हकदार व्यक्ति तक उसका पूरा अनाज पहुंचे। वन नेशन, वन राशन कार्ड (ONORC) योजना के लागू होने के बाद से प्रवासी मजदूरों को काफी राहत मिली है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर तकनीकी अड़चनें अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। सर्वर डाउन होना और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फेल होना आज भी आम शिकायतों में शामिल है।
राशन डीलरों की अपनी समस्याएं
सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि उचित मूल्य की दुकानें चलाने वाले दुकानदार भी इस बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। डीलरों का कहना है कि कमीशन का ढांचा और मशीनों की तकनीकी खराबी उनके लिए सिरदर्द बन गई है। हालांकि, वे भी मानते हैं कि पारदर्शिता आने से लीकेज कम हुआ है, जिससे सरकार के साथ-साथ ईमानदार डीलरों को भी व्यवस्था में भरोसा बढ़ा है।
भविष्य का परिदृश्य और निष्कर्ष
आने वाले समय में राशन वितरण प्रणाली पूरी तरह से कैशलेस और पेपरलेस होने की ओर अग्रसर है। लेकिन वरिष्ठ फील्ड रिपोर्टर के रूप में हमारा निष्कर्ष यह है कि जब तक जमीनी स्तर पर इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी साक्षरता को पूरी तरह मजबूत नहीं किया जाता, तब तक आम आदमी को कुछ असहजताओं का सामना करना पड़ता रहेगा। पारदर्शिता की इस दौड़ में यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का निवाला न छिन जाए।







