विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/मनोरंजन/शंकर महादेवन की दो टूक: वायरल लोकप्रियता नहीं, हुनर और आत्मा का संगीत ही कलाकार को दिलाता है लंबी उम्र
मनोरंजनपढ़ने में समय: 4 मिनट

शंकर महादेवन की दो टूक: वायरल लोकप्रियता नहीं, हुनर और आत्मा का संगीत ही कलाकार को दिलाता है लंबी उम्र

लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा' के नए सीजन के साथ वापसी कर रहे मशहूर संगीतकार शंकर महादेवन ने 'द फ्रीलांस' से खास बातचीत में संगीत की असल रूह, एआई के दौर की चुनौतियों और शो की भव्यता पर खुलकर विचार रखे।
✍️
सिनेमा एवं मनोरंजन डेस्क, द फ्रीलांस
सिनेमा व संस्कृति डेस्क•6 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•25
🌐Read in English →
शेयर करें:
शंकर महादेवन की दो टूक: वायरल लोकप्रियता नहीं, हुनर और आत्मा का संगीत ही कलाकार को दिलाता है लंबी उम्र
📷 शंकर महादेवन की दो टूक: वायरल लोकप्रियता नहीं, हुनर और आत्मा का संगीत ही कलाकार को दिलाता है लंबी उम्र — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा' के नए सीजन के साथ वापसी कर रहे मशहूर संगीतकार शंकर महादेवन ने 'द फ्रीलांस' से खास बातचीत में संगीत की असल रूह, एआई के दौर की चुनौतियों और शो की भव्यता पर खुलकर विचार रखे।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

मुंबई के अंधेरी स्थित स्टूडियो की हलचल से दूर, जब दिग्गज संगीतकार और गायक शंकर महादेवन से 'द फ्रीलांस' की टीम ने मुलाकात की, तो उनके चेहरे पर एक अलग ही ऊर्जा और संगीत को लेकर वही पुरानी चमक थी। मौका था ज़ी टीवी के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा' के नए सीजन के आगाज का, जो इस बार 19 सितंबर 2026 से दर्शकों के बीच पहुंच चुका है। शो के जज के रूप में महादेवन ने न सिर्फ इस बार के मेगा स्केल पर खुलकर बात की, बल्कि आज के डिजिटल दौर में संगीत की गिरती साख और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते दखल पर भी तीखे और सारगर्भित सवाल उठाए।

संगीत की आत्मा और 31 साल का सफर

जब महादेवन से पूछा गया कि इस बार शो में क्या नया है, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि अब तक के सभी सीजनों के स्तर को दस गुना बढ़ा दीजिए। उन्होंने बताया कि इस बार के सेट पर सिर्फ आवाजें नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का ऐसा समागम है जो पहले कभी नहीं देखा गया। मंच पर लगभग 100 संगीतकार, 100 कोरस सिंगर्स और देश के सुदूर कोनों से आए लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।

हालांकि, भव्यता और महंगे सेट के बीच महादेवन ने एक गहरी बात कही। उन्होंने कहा, 'आप किसी इंसान को कितने भी महंगे डिजाइनर कपड़े पहना दें, लेकिन अगर उसके भीतर जीवन और आत्मा नहीं है, तो सब व्यर्थ है। इस शो का जीवन इसका संगीत है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी रूप से परफेक्ट होना या सोशल मीडिया पर रातों-रात वायरल हो जाना किसी कलाकार को बड़ा नहीं बनाता। असली पहचान उस रूहानी एहसास से मिलती है जो सीधे श्रोता के दिल को छू जाए।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

एआई और आधुनिक युग की चुनौतियां

आज के दौर में जब टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संगीत की दुनिया में तेजी से घुसपैठ कर रहे हैं, महादेवन का मानना है कि कलाकारों को अपनी मौलिकता नहीं खोनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए, न कि मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह से रिप्लेस करने के लिए। एक कलाकार का 'ऑरा' उसकी मेहनत, रियाज़ और ईश्वर की उस कृपा से बनता है जो स्टूडियो के कोड से पैदा नहीं की जा सकती। उन्होंने अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम का भी जिक्र किया, जिन्होंने जब इस शो का पहला एपिसोड देखा, तो वे भी इसके भव्य विजुअल और सोनिक एक्सपीरियंस से हैरान रह गए।

प्रमुख बिंदु व पड़ताल

  • मेगा स्केल और संस्कृति का संगम: इस सीजन में असम, केरल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के लोक कलाकारों को मुख्यधारा के मंच पर जगह दी गई है।
  • आत्मा ही पहचान है: महादेवन के अनुसार, सिर्फ सुरों का ज्ञान या तकनीकी दक्षता काफी नहीं है; आवाज में वह खास कशिश होनी चाहिए जो श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दे।
  • सोशल मीडिया बनाम साधना: वायरल लोकप्रियता क्षणिक होती है, जबकि कड़ा रियाज और समर्पण ही किसी कलाकार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखता है।
  • एआई का विवेकपूर्ण उपयोग: संगीतकारों को तकनीक का गुलाम बनने के बजाय अपनी मौलिक रचनात्मकता को जिंदा रखना होगा।

'द फ्रीलांस' की इस पड़ताल से यह साफ है कि चमक-धमक और डिजिटल हथकंडों के इस दौर में भी संगीत की असली ताकत उसकी जड़ें और लोक संस्कृति ही हैं। शंकर महादेवन जैसे दिग्गजों का यह नजरिया आने वाली पीढ़ी को शॉर्टकट के जाल से निकालकर सच्ची संगीत साधना की ओर मोड़ने का काम कर रहा है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

सिनेमा एवं मनोरंजन डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

सिनेमा, ओटीटी, कला एवं सेलिब्रिटी जगत टीम

द फ्रीलांस की मनोरंजन डेस्क भारतीय सिनेमा, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, संगीत और सांस्कृतिक जगत से जुड़ी हर खबर, निष्पक्ष फिल्म समीक्षाएं और कलाकारों के विशेष संदर्भों को बिना किसी पीआर या सनसनीखेज हाइप के पाठकों तक पहुँचाती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें (Related Articles)

‘द फ्रीलांस’ ग्राउंड रिपोर्ट: जब ‘स्ट्रीट फाइटर’ इवेंट में विद्युत जामवाल ने रोकी 15 मिनट सांस, बोले- तुलना छोड़ो, दोस्त की तरह बात करोENTERTAINMENT

‘द फ्रीलांस’ ग्राउंड रिपोर्ट: जब ‘स्ट्रीट फाइटर’ इवेंट में विद्युत जामवाल ने रोकी 15 मिनट सांस, बोले- तुलना छोड़ो, दोस्त की तरह बात करो

5 अक्टू॰33
अक्टूबर 2026 मूवी रिलीज: दृश्‍यम 3, उड़ता तीर, जेलर 2, प्रहार! इस महीने सिनेमाघरों में हिंदी में 12 नई फिल्‍मेंENTERTAINMENT

अक्टूबर 2026 मूवी रिलीज: दृश्‍यम 3, उड़ता तीर, जेलर 2, प्रहार! इस महीने सिनेमाघरों में हिंदी में 12 नई फिल्‍में

6 अक्टू॰31
जयपुर में शुरू हुई ‘आश्रम 4’ की शूटिंग, फिर दिखेंगे बाबा निरालाENTERTAINMENT

जयपुर में शुरू हुई ‘आश्रम 4’ की शूटिंग, फिर दिखेंगे बाबा निराला

6 अक्टू॰37
Netflix पर जनता की फेवरेट बनी नई रोमांटिक-ड्रामा, ट्रेंडिंग में साउथ फिल्म ने उड़ाया गर्दाENTERTAINMENT

Netflix पर जनता की फेवरेट बनी नई रोमांटिक-ड्रामा, ट्रेंडिंग में साउथ फिल्म ने उड़ाया गर्दा

6 अक्टू॰46
दक्षिण भारतीय सिनेमा में नए समीकरण: जेसन संजय के निर्देशन की चर्चा और सिनेमा जगत की हलचलENTERTAINMENT

दक्षिण भारतीय सिनेमा में नए समीकरण: जेसन संजय के निर्देशन की चर्चा और सिनेमा जगत की हलचल

6 अक्टू॰47
'धार्मिक फिल्में चलती हैं', 400 करोड़ वाली हनुमान अंश पर ऋचा चड्ढा का तंज, बोलीं- सेफ है टॉपिकENTERTAINMENT

'धार्मिक फिल्में चलती हैं', 400 करोड़ वाली हनुमान अंश पर ऋचा चड्ढा का तंज, बोलीं- सेफ है टॉपिक

6 अक्टू॰48
विज्ञापन • ADVERTISEMENT