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तारा सुतारिया का छलका दर्द: बोलीं- फिल्मों से बाहर किए जाने पर बहुत दुख हुआ, पर हिम्मत नहीं हारी

बॉलीवुड में बाहरी कलाकारों के संघर्ष पर अभिनेत्री तारा सुतारिया ने खुलकर बात की है। फिल्मों से अचानक रिप्लेस होने के दर्द और डिज्नी से लेकर बड़े पर्दे तक के अपने सफर को उन्होंने साझा किया।
The Freelance ब्यूरो
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19 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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तारा सुतारिया का छलका दर्द: बोलीं- फिल्मों से बाहर किए जाने पर बहुत दुख हुआ, पर हिम्मत नहीं हारी
📷 तारा सुतारिया का छलका दर्द: बोलीं- फिल्मों से बाहर किए जाने पर बहुत दुख हुआ, पर हिम्मत नहीं हारी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • डिज्नी चैनल के लोकप्रिय धारावाहिकों से अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली तारा ने 2019 में बॉलीवुड में कदम रखा था।
  • तारा ने खुलासा किया कि कई प्रोजेक्ट्स लगभग तय होने के बाद उन्हें अचानक दूसरी अभिनेत्रियों से बदल दिया गया।
  • फिल्म 'मरजावां' में मूक-बधिर किरदार निभाने के लिए उन्होंने महीनों तक सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) की विशेष ट्रेनिंग ली थी।
  • रोमांटिक फिल्मों की छवि से बाहर निकलकर तारा ने 'अपूर्वा' जैसी सर्वाइवल थ्रिलर फिल्म में मुख्य भूमिका निभाकर अपनी अदाकारी साबित की।

बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया बाहर से जितनी हसीन दिखती है, अंदर से इसका सफर उतना ही पेचीदा और उतार-चढ़ाव से भरा होता है। खासकर उन कलाकारों के लिए, जिनका कोई फिल्मी पारिवारिक बैकग्राउंड नहीं होता। बिना किसी 'गॉडफादर' के अपने हुनर और लगन के दम पर पहचान बनाने वाली अभिनेत्रियों में तारा सुतारिया का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। 2019 में करण जौहर की फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2' से बड़े पर्दे पर धमाकेदार एंट्री करने वाली तारा आज फिल्म जगत में एक सशक्त चेहरा बन चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों, मनचाहे प्रोजेक्ट्स से अचानक बाहर निकाले जाने और रिजेक्शन के दर्द पर खुलकर बात की है।

तारा सुतारिया का यह सफर केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वह एक प्रशिक्षित गायिका और थिएटर आर्टिस्ट भी रही हैं। कैमरे के सामने आने से पहले उन्होंने मंच पर अपनी कला को तराशा। लेकिन जब वह बॉलीवुड के मुख्यधारा के सिनेमा में आईं, तो उन्हें इंडस्ट्री की उन अनकही चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनसे हर आउटसाइडर कलाकार को कभी न कभी गुजरना ही पड़ता है।

डिज्नी की बाल कलाकार से थियेटर और बॉलीवुड तक का सफर

19 नवंबर 1995 को मुंबई में जन्मीं तारा सुतारिया को बचपन से ही कला और संगीत से गहरा लगाव था। बहुत कम लोग जानते हैं कि तारा सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक ट्रेंड वेस्टर्न क्लासिकल सिंगर भी हैं। उन्होंने महज सात साल की उम्र से गायन की विधिवत तालीम लेना शुरू कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने बैले और मॉडर्न डांस की भी ट्रेनिंग ली। करीब 15 साल की उम्र से ही वह बड़े-बड़े मंचों पर लाइव प्रस्तुतियां दे रही थीं।

तारा ने संगीत नाटक (म्यूजिकल थिएटर) में भी अपनी कला का लोहा मनवाया। उन्होंने प्रसिद्ध थिएटर डायरेक्टर रैल पदमसी के प्रोडक्शन ‘ग्रीस’ और अश्विन गिडवानी के शो ‘ब्लेम इट ऑन यशराज’ में अभिनय और गायन किया। थिएटर के इस दौर ने उनके भीतर दर्शकों के सामने खुलकर प्रदर्शन करने का गजब का आत्मविश्वास भरा।

इसके बाद तारा के करियर का अगला पड़ाव बना टेलीविजन। उन्होंने डिज्नी चैनल के मशहूर शो 'द सूट लाइफ ऑफ करण एंड कबीर' और 'ओए जस्सी' में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। इसके अलावा उन्होंने 'बिग बड़ा बूम' में बतौर होस्ट और सिंगर काम किया। डिज्नी के इन शोज ने उन्हें घर-घर में बच्चों और युवाओं के बीच एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया था। कैमरे के सामने सहज होकर काम करने का हुनर उन्होंने यहीं से सीखा।

📷 फिल्म 'मरजावां' के सेट पर अपने किरदार जोया के लिए साइन लैंग्वेज का अभ्यास करतीं तारा सुतारिया।
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'स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2' से बड़ा ब्रेक और हाथ से छूटी 'कबीर सिंह'

साल 2019 में तारा सुतारिया के फिल्मी करियर ने एक बड़ी छलांग लगाई। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस ने उन्हें 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2' के जरिए बॉलीवुड में लॉन्च किया। पुनीत मल्होत्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तारा के साथ टाइगर श्रॉफ और अनन्या पांडे मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म में तारा ने 'मिया चावला' का मॉडर्न और महत्वाकांक्षी किरदार निभाया। फिल्म को आलोचकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन तारा की खूबसूरती और स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने खूब सराहा।

तारा ने खुद एक बातचीत में बताया था कि डेब्यू फिल्म की शूटिंग के दौरान ही उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे थे। कम ही लोग जानते हैं कि सुपरहिट फिल्म 'कबीर सिंह' में कियारा आडवाणी वाला किरदार पहले तारा सुतारिया को ही ऑफर हुआ था। हालांकि, 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2' की शूटिंग तारीखों में टकराव के चलते उन्हें वह बड़ी फिल्म छोड़नी पड़ी थी। तारा ने कभी इसका मलाल नहीं किया और अपने काम पर पूरी तरह केंद्रित रहीं।

"इंडस्ट्री में जब आप बाहर से आते हैं, तो आपको बहुत सी ऐसी चीजों का सामना करना पड़ता है जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की होती। कई बार जब आप किसी प्रोजेक्ट को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होते हैं और अचानक आपको पता चलता है कि आपको हटा दिया गया है, तो दिल टूट जाता है। लेकिन यही अनुभव आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।" — तारा सुतारिया, अभिनेत्री

बिना संवादों के अभिनय: 'मरजावां' के लिए सीखी सांकेतिक भाषा

अपनी पहली फिल्म के तुरंत बाद उसी साल तारा की दूसरी फिल्म 'मरजावां' रिलीज हुई। मिलाप जावेरी द्वारा निर्देशित इस इंटेंस एक्शन-ड्रामा फिल्म में उनके साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा और रितेश देशमुख मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म में तारा ने 'जोया' नाम की एक कश्मीरी लड़की का किरदार निभाया था, जो बोल और सुन नहीं सकती थी।

एक नए कलाकार के लिए करियर की दूसरी ही फिल्म में बिना किसी डायलॉग के सिर्फ चेहरे के भावों और आंखों से पूरी कहानी बयां करना बहुत बड़ा जोखिम था। तारा ने इस भूमिका के लिए बाकायदा साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) सीखी। उन्होंने महीनों तक मूक-बधिर ट्रेनर्स के साथ वक्त बिताया ताकि पर्दे पर उनका अभिनय पूरी तरह स्वाभाविक लगे और किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। 'मरजावां' बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और इस फिल्म के गानों के साथ-साथ तारा के संजीदा अभिनय को भी खूब तारीफ मिली।

रिजेक्शन और अचानक रिप्लेसमेंट का कड़वा सच

फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध के पीछे का सच यह भी है कि यहां चीजें रातों-रात बदल जाती हैं। तारा सुतारिया ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि करियर के शुरुआती दौर में उन्हें कई बार बेहद अप्रिय अनुभवों से गुजरना पड़ा। कई ऐसी फिल्में थीं, जिनके लिए उनकी बात लगभग पक्की हो चुकी थी, पटकथा पर चर्चा हो चुकी थी, लेकिन ऐन मौके पर उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया और किसी स्टार किड या दूसरे चेहरे को साइन कर लिया गया।

तारा बताती हैं कि किसी भी कलाकार के लिए यह बेहद पीड़ादायक होता है जब उसे यह पता चले कि वह अब उस फिल्म का हिस्सा नहीं है जिसकी वह हफ्तों से तैयारी कर रहा था। बिना किसी गॉडफादर के काम कर रहे कलाकारों के लिए ऐसा झटका सहना आसान नहीं होता। हालांकि, तारा ने इन मुश्किल परिस्थितियों को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने इसे फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली का एक सामान्य हिस्सा माना और खुद को और अधिक बेहतर बनाने में झोंक दिया।

'तड़प' से 'अपूर्वा' तक: ग्लैमरस इमेज को तोड़कर बनाई गंभीर पहचान

2021 में तारा फिल्म 'तड़प' में सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी के साथ नजर आईं। यह सुपरहिट तेलुगु फिल्म 'आरएक्स 100' की रीमेक थी। इस फिल्म में तारा का किरदार सिर्फ एक सीधी-सादी प्रेमिका का नहीं था, बल्कि उसमें कई डार्क और अप्रत्याशित शेड्स थे। तारा ने इस जटिल किरदार को बड़ी संजीदगी से पर्दे पर उतारा।

इसके बाद उन्होंने 'हीरोपंती 2' और 'एक विलेन रिटर्न्स' जैसी बड़े बजट की कॉमर्शियल फिल्मों में काम किया। हालांकि ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर वैसा कमाल नहीं दिखा पाईं जैसी उम्मीद थी, लेकिन तारा ने कभी हार नहीं मानी। 2023 में रिलीज हुई सर्वाइवल थ्रिलर फिल्म 'अपूर्वा' उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में तारा ने बिना किसी बड़े हीरो के सहारे पूरी फिल्म का भार अपने कंधों पर उठाया। एक असहाय लड़की के जीवित बचे रहने के खूनी संघर्ष को तारा ने जिस शिद्दत से जिया, उसने आलोचकों को भी उनका मुरीद बना दिया।

तारा सुतारिया आज यह साबित कर चुकी हैं कि वह सिर्फ ग्लैमरस किरदारों तक सीमित रहने वाली अभिनेत्री नहीं हैं। उनका सपना बॉलीवुड में पार्श्व गायन (प्लेबैक सिंगिंग) करने का भी है, जिसे वह जल्द पूरा करना चाहती हैं। उनका सफर यह साफ दिखाता है कि अगर प्रतिभा और धैर्य साथ हो, तो रिजेक्शन की दीवारें भी आपकी कामयाबी का रास्ता नहीं रोक सकतीं।

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