मशहूर और चहेते पार्श्व गायक जुबिन गर्ग को दुनिया से विदा हुए आज पूरा एक साल बीत चुका है। 'या अली' और 'दिल तू ही बता' जैसे सदाबहार हिंदी गानों के जरिए अपनी खास पहचान बनाने वाले जुबिन की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में पानी में डूबने से मौत हो गई थी। इस दुखद हादसे ने न केवल असम बल्कि पूरे देश के संगीत प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया था। जुबिन असम के एक सांस्कृतिक प्रतीक थे, जिनका संगीत सरहदों और भाषाओं की पाबंदियों से परे दिलों पर राज करता था। आज उनकी पहली पुण्यतिथि पर असम राज्य में तीन दिनों का विशेष 'जुबिन दिवस' मनाया जा रहा है, जिसमें उनके फैंस उन्हें अपने ही अंदाज में याद कर रहे हैं।
असम में तीन दिनों तक मनाया जा रहा 'जुबिन दिवस', उमड़े फैंस
जुबिन गर्ग की पहली पुण्यतिथि के मौके पर पूरे असम में शोक और सम्मान का एक अनूठा माहौल देखने को मिल रहा है। राज्यभर में उनके चाहने वाले, जिन्हें प्यार से 'जुबिनियंस' कहा जाता है, एकजुट होकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। असम के कोने-कोने से लोग इस विशेष आयोजन में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। लोगों का यह हुजूम इस बात का सबूत है कि जुबिन भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनका संगीत लोगों के दिलों में आज भी पूरी तरह जिंदा है।
इस मौके पर आयोजित कार्यक्रमों में संगीत, कला और उनके विचारों का जश्न मनाया जा रहा है। फैंस उनके गानों को गाकर और उनके जीवन से जुड़े संस्मरणों को साझा करके उन्हें याद कर रहे हैं। असम के लोगों का यह जुड़ाव साबित करता है कि जुबिन सिर्फ एक गायक नहीं थे, बल्कि वे इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का एक बहुत बड़ा हिस्सा थे, जिनकी कमी को भरना कभी भी आसान नहीं होगा।
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पत्नी गरिमा गर्ग ने बयां किए अपने जज्बात, कहा- हर जगह नजर आते हैं जुबिन
एक निजी चैनल को दिए गए हालिया इंटरव्यू में जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा गर्ग ने अपने पति से जुड़े अनगिनत पहलुओं और लोगों के दिलों में उनके लिए बसे प्यार पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह स्वीकार करना अभी भी मुश्किल है कि जुबिन अब इस दुनिया में नहीं हैं। गरिमा के मुताबिक, उन्हें हर तरफ जुबिन की मौजूदगी महसूस होती है और लोग आज भी उन्हें उसी शिद्दत से याद कर रहे हैं।
गरिमा ने आगे कहा कि जिस तरह से लोग बिना किसी जाति, धर्म या वर्ग के भेदभाव के जुबिन को याद करने पहुंचे, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। लोग सिर्फ एक इंसान और एक बेहतरीन कलाकार के रूप में उनके साथ खड़े हैं। यह वही समाज और असम का सपना था जिसे जुबिन गर्ग देखना चाहते थे। वे हमेशा से एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहां इंसानियत सबसे ऊपर हो, और आज उनकी इस सोच को उनके फैंस आगे बढ़ा रहे हैं।
मुश्किलों को रचनात्मकता में बदलने की बेमिसाल कला
जुबिन गर्ग के व्यक्तित्व के बारे में बात करते हुए उनकी पत्नी ने उनके संघर्ष और सकारात्मक सोच का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अपने जीवन में जुबिन ने कई तरह की मुश्किलों और परेशानियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। जब भी वे तनाव में होते थे या किसी दुख से गुजरते थे, तो अपनी आंतरिक ऊर्जा का इस्तेमाल करके उसे रचनात्मकता में बदल देते थे।
वे अक्सर कहा करते थे कि ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, वह बस अपना रूप और रंग बदलती है। आज जुबिन हमारे बीच एक व्यापक रूप में मौजूद हैं। उनका संगीत, उनके विचार और उनके आदर्श आज भी हजारों-लाखों लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उनके संघर्षों से सीख लेकर आज के युवा आगे बढ़ रहे हैं और यही उनकी असली लीगेसी है जिसे उनके फैंस संभाल कर रख रहे हैं।
'आखिर उस दिन सिंगापुर में क्या हुआ था?' न्याय की गुहार
हालांकि जुबिन के जाने का गम तो है ही, लेकिन उनके फैंस और परिवार के मन में एक बड़ा सवाल आज भी कायम है। सिंगर की अचानक हुई मौत के बाद से ही लगातार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग उठ रही है। अब उनकी पत्नी गरिमा गर्ग ने भी इस मामले में खुलकर आवाज उठाई है और साफ कर दिया है कि वे कानूनी रूप से न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं और सच जानना चाहती हैं।
"हम जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर को सिंगापुर में आखिर उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था। हम अभी भी उस जवाब का इंतजार कर रहे हैं और हमें न्याय मिलना चाहिए। अगर जुबीन को न्याय नहीं मिलेगा, तो फिर किसे मिलेगा? फिर इसका कोई मतलब ही क्या रह जाएगा?" — गरिमा गर्ग, जुबिन गर्ग की पत्नी
गरिमा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया इस समय अदालत में चल रही है और परिवार को पूरी उम्मीद है कि इस मामले में सच्चाई सामने आएगी। असम के लोगों की भी यही इच्छा है कि उनके प्रिय गायक की मौत के कारणों का पूरी तरह से खुलासा हो। यदि सच्चाई सामने नहीं आती है, तो उनके चाहने वालों के मन में हमेशा एक कसक बनी रहेगी।
संगीत जगत में हमेशा अमर रहेंगे जुबिन गर्ग के सुर
जुबिन गर्ग का जाना असम और भारतीय संगीत उद्योग के लिए एक ऐसा घाव है जो आसानी से नहीं भर सकता। उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से न केवल असमिया गानों को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि बॉलीवुड में भी अपनी एक अलग और मजबूत छाप छोड़ी। उनके गाए गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं और शादियों से लेकर पार्टियों तक में सुने जाते हैं।
उनकी पुण्यतिथि पर यह संकल्प लिया जा रहा है कि उनके विचारों, उनकी कला और उनके द्वारा शुरू किए गए सामाजिक कार्यों को रुकने नहीं दिया जाएगा। जुबिन भले ही खामोश हो गए हैं, लेकिन उनके सुर और उनका संगीत हमेशा गूंजता रहेगा। अब देखना यह होगा कि कानूनी मोर्चे पर चल रही जांच से परिवार को कब तक वह जवाब मिलता है जिसका वे बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।






