अमेरिका के साथ जंग खत्म करने को लेकर ईरान ने एक बार फिर बातचीत की दिशा में बड़े कदम बढ़ाए हैं। तेहरान ने मध्यस्थ देशों को उन शर्तों की जानकारी दी है, जिनके आधार पर वह अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत में शामिल होने को तैयार है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने एक इंटरव्यू में इन शर्तों का खुलासा किया है, जिससे वैश्विक राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
ईरान की शर्तें और मध्यस्थ देशों की भूमिका
मोहसिन रेजाई के मुताबिक, ईरान की शर्तों में सभी मोर्चों पर तत्काल जंग खत्म करना, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी धन को मुक्त करना और देश पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना शामिल है। उन्होंने बताया कि कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ इस संबंध में विचार-विमर्श लगातार जारी है और अब तेहरान अमेरिकी रुख का इंतजार कर रहा है। ईरान चाहता है कि कूटनीतिक रास्ते से इस तनाव का स्थायी समाधान निकाला जाए।
सैन्य कार्रवाई की आशंका और कड़ी चेतावनी
एक तरफ जहां बातचीत के रास्ते तलाशे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान की सरकारी मीडिया ने देश की केंद्रीय सैन्य कमान के हवाले से चेतावनी जारी की है। तेहरान को ऐसी खुफिया जानकारी मिली है कि अमेरिका कुछ क्षेत्रीय देशों के समर्थन से ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है।
ईरानी सेना ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका की ओर से कोई भी दुस्साहस किया गया, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को लगातार निशाना बनाया जाएगा। इसके अलावा, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने वाले क्षेत्रीय देशों को भी इस संघर्ष का प्रत्यक्ष पक्ष माना जाएगा।
क्षेत्रीय शांति और कूटनीतिक पहल
इन तनावपूर्ण हालातों के बीच, ईरान ने क्षेत्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने की अपनी मंशा भी जाहिर की है। सुरक्षा प्रमुख रेजाई ने बताया कि ईरान सऊदी अरब और यमन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त कराने में मदद करना चाहता है। इसके साथ ही, तेहरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद व संघर्ष को खत्म कराने में भी मध्यस्थ की सकारात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।
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