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अंतर्राष्ट्रीयपढ़ने में समय: 6 मिनट

लाखों का पैकेज और कनाडा की नागरिकता छोड़ी: आखिर क्यों भारत लौटने को मजबूर हुई महिला, सामने आई बड़ी वजह

कनाडा में छह साल बिताने और लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर एक महिला के भारत लौटने का फैसला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। प्रीति बिस्निक नाम की इस महिला ने विदेशी सुख-सुविधाओं और नागरिकता को दरकिनार कर अपने माता-पिता के पास लौटने का फैसला किया है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•23 सितंबर 2026 • अपडेटेड•53
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लाखों का पैकेज और कनाडा की नागरिकता छोड़ी: आखिर क्यों भारत लौटने को मजबूर हुई महिला, सामने आई बड़ी वजह
📷 लाखों का पैकेज और कनाडा की नागरिकता छोड़ी: आखिर क्यों भारत लौटने को मजबूर हुई महिला, सामने आई बड़ी वजह — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • कनाडा में छह साल तक डेलॉइट जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी करने के बाद प्रीति बिस्निक ने भारत लौटने का साहसिक फैसला लिया है।
  • उनके पास कनाडा की नागरिकता थी और वे वहां लंबे समय तक रह सकती थीं, लेकिन उन्होंने परिवार को प्राथमिकता दी।
  • विदेश में खराब होती सेहत और बढ़ते वजन के साथ-साथ मां की सेहत उनका भारत लौटने का मुख्य कारण बनी।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें नौकरी से निकाला नहीं गया था, बल्कि उन्होंने खुद अपनी मर्जी से यह शानदार करियर छोड़ा है।

विदेश की चमक-दमक छोड़ अपनों के पास लौटने की अनूठी दास्तान

विदेशों में जाकर बसना और वहां डॉलर में कमाई करना आज की युवा पीढ़ी का सबसे बड़ा सपना बन गया है। लोग दिन-रात मेहनत करके विदेश जाने के रास्ते तलाशते हैं और जब वहां पहुंच जाते हैं, तो हर संभव प्रयास करते हैं कि वहीं की नागरिकता मिल जाए। लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि लाखों रुपये महीने कमाने और विदेशी धरती पर पक्के तौर पर बसने का हक मिलने के बाद भी कोई शख्स सब कुछ छोड़कर अपने देश वापस लौट सकता है? सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा ही मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

यह कहानी है प्रीति बिस्निक की, जिन्होंने कनाडा की आरामदायक जिंदगी, लाखों के पैकेज वाली नौकरी और वहां की नागरिकता को ठोकर मारकर वापस भारत लौटने का फैसला किया है। प्रीति का यह वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लोग यह जानने के लिए बेताब हैं कि आखिर एक इंसान किस मजबूरी या प्रेरणा के तहत इतनी बड़ी सेटल लाइफ को छोड़कर शून्य से दोबारा शुरुआत करने का फैसला करता है। इस पूरी कहानी में सिर्फ एक नौकरी छोड़ने की बात नहीं है, बल्कि यह परिवार, भावनाओं और अपनी जड़ों से जुड़ाव की एक बेहद मार्मिक दास्तान है।

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लाखों की नौकरी और कनाडा की नागरिकता का त्याग

प्रीति बिस्निक ने अपने करियर में एक बड़ा मुकाम हासिल किया था। वे कनाडा में एक बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनी डेलॉइट (Deloitte) में काम कर रही थीं। वहां उन्हें हर साल लाखों का पैकेज मिल रहा था, जिसे पाने के लिए युवा अपना पूरा जीवन लगा देते हैं। इतना ही नहीं, प्रीति के पास कनाडा की नागरिकता भी थी, जिसका मतलब था कि वे कानूनी तौर पर जब तक चाहें, उस देश में शान से रह सकती थीं। जब उन्होंने अपनी कंपनी छोड़ने का फैसला किया, तो उनके मैनेजर को भी इस बात का झटका लगा।

प्रीति बताती हैं कि उनके मैनेजर ने उन्हें नौकरी छोड़ने से रोकने की पूरी कोशिश की। मैनेजर ने उन्हें कुछ दिनों की लंबी छुट्टी (सब्बैतिक) लेने और आराम करने की सलाह दी, ताकि वे मानसिक रूप से तरोताजा होकर वापस काम पर लौट सकें। लेकिन प्रीति का मन अब विदेश में नहीं लग रहा था। उन्होंने मैनेजर के उस आकर्षक ऑफर को भी ठुकरा दिया और साफ कर दिया कि वे अब कनाडा में और अधिक समय तक नहीं रहना चाहती हैं। सोशल मीडिया पर जब लोगों ने उनसे सवाल पूछा कि क्या उन्हें वहां से डिपोर्ट किया गया है या उनके पास वीजा की कोई समस्या थी, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया कि उनके पास वहां की नागरिकता है, लेकिन उन्होंने खुद अपनी मर्जी से यह सब छोड़ा है।

विदेश में क्यों महसूस हुई अपनों की कमी?

जब प्रीति से यह सवाल पूछा गया कि उन्होंने अपनी इतनी बेहतरीन नौकरी और विदेश का आरामदायक जीवन क्यों छोड़ा, तो उन्होंने इसके पीछे की मुख्य वजह अपने माता-पिता को बताया। प्रीति का कहना है कि उनके माता-पिता अब उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं जहां उन्हें सहारे की जरूरत है। उनकी मां को चलने-फिरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और एक बेटी होने के नाते उनका फर्ज बनता है कि वे इस मुश्किल वक्त में अपने माता-पिता के पास रहें।

"विदेश की चमक-दमक और बैंक बैलेंस अपनी जगह हैं, लेकिन जब आपके बूढ़े माता-पिता को आपकी सबसे ज्यादा जरूरत हो और आप हजारों मील दूर बैठे हों, तो वह पैसा किसी काम का नहीं रहता। मैंने अपनी जिंदगी के कुछ साल अपने करियर को दिए, अब बाकी का वक्त अपने माता-पिता की सेवा में बिताना चाहती हूं।" — प्रीति बिस्निक, पूर्व कॉर्पोरेट कर्मचारी

प्रीति का यह बयान उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो विदेश जाने की होड़ में अपने परिवार से दूर होते जा रहे हैं। आज के भागदौड़ भरे दौर में जहां लोग अपने करियर को प्राथमिकता देते हैं, वहीं प्रीति ने यह साबित कर दिया है कि रिश्तों और अपनों की कीमत दुनिया की किसी भी करेंसी से बहुत ज्यादा होती है।

सेहत पर असर और वजन बढ़ने की बड़ी चुनौती

परिवार की देखभाल के अलावा प्रीति के भारत लौटने के पीछे एक और बहुत बड़ा कारण उनकी अपनी सेहत से जुड़ा हुआ था। कनाडा जाने से पहले प्रीति की लाइफस्टाइल और फिटनेस बिल्कुल अलग थी। जब वे भारत से कनाडा शिफ्ट हुई थीं, तब उनका वजन लगभग 78 किलोग्राम था। लेकिन वहां की सिडेंट्री लाइफस्टाइल यानी कंप्यूटर के आगे घंटों बैठकर काम करने की आदत और खानपान के कारण उनका वजन तेजी से बढ़ने लगा।

कनाडा में छह साल बिताने के दौरान उनका वजन बढ़कर लगभग 100 किलोग्राम तक पहुंच गया था। विदेश में रहते हुए बढ़ते वजन ने उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर गहरा असर डाला। हालांकि उन्होंने अपनी सेहत सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की और जिम में पसीना बहाकर 10 किलो वजन कम भी किया, लेकिन वे समझ चुकी थीं कि कंप्यूटर के आगे बैठकर काम करने वाली इस कॉर्पोरेट संस्कृति से उन्हें एक लंबा ब्रेक चाहिए। कनाडा में रहते हुए उन्होंने न्यूट्रिशनिस्ट की पढ़ाई भी पूरी की, जो उनके जीवन में एक नया मोड़ लेकर आई।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता, लेकिन फैसले पर कोई पछतावा नहीं

जब लोगों ने प्रीति से पूछा कि भारत लौटने के बाद उनका अगला प्लान क्या है और वे आगे क्या करेंगी, तो उनका जवाब बेहद सहज था। उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि उन्हें फिलहाल यह नहीं पता है कि वे भारत में क्या काम करेंगी या उनका अगला बिजनेस या करियर क्या होगा। उनके पास कोई तयशुदा रोडमैप नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उनके चेहरे पर किसी भी तरह का डर या पछतावा नहीं है।

प्रीति का यह कदम दिखाता है कि जीवन में सिर्फ पैसा और करियर ही सब कुछ नहीं होता। कभी-कभी मानसिक शांति और अपनों का साथ पाना इन सभी चीजों से कहीं ज्यादा कीमती होता है। सोशल मीडिया पर उनके इस फैसले की सराहना हो रही है और लोग उनके इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं। यह कहानी उन सभी लोगों को प्रेरित करती है जो कॉर्पोरेट दुनिया की चकाचौंध में अपनी असल खुशी और अपनों को भूलते जा रहे हैं।

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