जब भी हम हॉलीवुड फिल्मों, वेब सीरीज या सोशल मीडिया पर अमेरिका के खूबसूरत घरों की तस्वीरें देखते हैं, तो वे बेहद शानदार और आधुनिक नजर आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंदरूनी तौर पर ये घर हमारे भारतीय घरों से बिल्कुल अलग होते हैं? घर के फर्श, बाथरूम की बनावट, बिजली के सॉकेट्स से लेकर किचन में कचरा फेंकने के तरीके तक—अमेरिका में कई ऐसी चीजें सामान्य मानी जाती हैं, जो भारतीय घरों में शायद ही देखने को मिलती हैं।
हाल ही में, सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय ब्लॉगर सारिका यादव ने वहां के घरों की कुछ ऐसी ही अनसुनी और हैरान करने वाली विशेषताओं को उजागर किया है। यह वीडियो भारतीय दर्शकों के बीच उत्सुकता का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें दिखाए गए फीचर्स भारतीय रहन-सहन से पूरी तरह से जुदा हैं।
फर्श पर कारपेट और दीवारों में ईंट-गारे की जगह ड्राईवॉल
भारतीय घरों की बात करें तो यहाँ की चिलचिलाती गर्मी के कारण फर्श पर टाइल्स, संगमरमर (मार्बल) या ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि घर ठंडा रहे। इसके विपरीत, अमेरिका के अधिकांश घरों के बेडरूम और लिविंग एरिया में पूरी तरह से कारपेट बिछा होता है। हालांकि, गीले होने की संभावना के कारण किचन और बाथरूम में कारपेट नहीं लगाया जाता। अमेरिका में कड़कड़ाती ठंड के दौरान ये कारपेट पैरों को गर्म रखने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, घरों के निर्माण की बात करें तो भारत में मजबूत ईंटों, सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अमेरिका में ज्यादातर घरों का ढांचा लकड़ी का होता है। यहाँ दीवारों के भीतर लकड़ी के स्टड लगाए जाते हैं और फिर उनके ऊपर 'ड्राईवॉल' की शीट फिट की जाती है। इसी वजह से अमेरिकी घरों की दीवारों पर कील ठोकना या भारी सामान टांगना काफी सावधानी भरा काम होता है और दीवारें भी भारतीय घरों की तुलना में उतनी सख्त नहीं होती हैं।
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बाथरूम में बाथटब और किचन का 'जादुई' गार्बेज डिस्पोजल
भारतीय घरों के बाथरूम में आमतौर पर बकेट-मग (बाल्टी-मग्गे) का इस्तेमाल होता है या फिर एक सीधा शॉवर एरिया होता है। लेकिन अमेरिका में मध्यमवर्गीय घरों के बाथरूम में भी 'बाथटब' मिलना बेहद आम बात है। यहाँ लोग शॉवर के साथ-साथ टब बाथ लेना पसंद करते हैं। साथ ही, वहाँ पानी गर्म करने के लिए किचन या बाथरूम में अलग से छोटे गीजर लगाने की जरूरत नहीं होती। पूरे घर के लिए एक ही विशाल 'सेंट्रल वॉटर हीटिंग' सिस्टम होता है, जिससे सभी नलों में एक साथ गर्म पानी आता है।
किचन की बात करें तो वहाँ की सबसे अनोखी चीज है—गार्बेज डिस्पोजल सिस्टम। यह किचन सिंक के ठीक नीचे फिट किया जाता है। जब सिंक में जूठे बर्तन धोते समय खाने के छोटे टुकड़े चले जाते हैं, तो इस मोटर चालित सिस्टम को ऑन कर दिया जाता है। यह कचरे को बहुत बारीक पीसकर पानी के साथ ड्रेनेज में बहा देता है, जिससे किचन में बदबू आने या सिंक ब्लॉक होने का खतरा नहीं रहता। भारत में आमतौर पर गीला कचरा सीधे डस्टबिन में फेंका जाता है।
स्मार्ट बिजली सॉकेट और सेंट्रल हीटिंग सिस्टम
अमेरिका में बिजली के सॉकेट्स में सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। वहाँ के सॉकेट्स में भारतीय प्लग की तरह ऑन-ऑफ का अलग से कोई स्विच नहीं होता। चार्जर लगाते ही बिजली चालू हो जाती है। इसके अलावा, वहाँ बच्चों की सुरक्षा के लिए खास ऑटो-लॉकिंग सॉकेट डिज़ाइन किए जाते हैं।
तापमान नियंत्रण की बात करें तो भारतीय घरों में अलग से एयर कंडीशनर (AC) या रूम हीटर लगाए जाते हैं, लेकिन अमेरिका में 'सेंट्रल हीटिंग और कूलिंग सिस्टम' (HVAC) होता है। पूरे घर की दीवारों या फर्श में वेंट्स (Ventilations) बने होते हैं, जहाँ से गर्म या ठंडी हवा पूरे घर का तापमान एक समान बनाए रखती है। इसके साथ ही, सुरक्षा के लिहाज से हर अमेरिकी घर में स्मोक अलार्म होना अनिवार्य है, जो हल्का सा भी धुआं होने पर तेज अलार्म बजा देता है। यही वजह है कि वहाँ किचन में छौंक लगाते समय भी बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है!
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।







