नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर वन्यजीवों से जुड़े वीडियो अक्सर लोगों का ध्यान खींचते हैं। हाल ही में भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी सुशांत नंदा द्वारा शेयर किया गया एक वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस वीडियो में वन्यजीवों की दुनिया की एक ऐसी दर्दनाक और संवेदनशील सच्चाई सामने आई है, जिसे देखकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक हाथी अपने किसी मृत साथी या झुंड के सदस्य के शरीर के पास खड़ा है। उसकी शारीरिक भाषा और हाव-भाव से स्पष्ट झलकता है कि वह अपने साथी की मौत से गहरे सदमे और शोक में है। वीडियो साझा करते हुए आईएफएस अधिकारी सुशांत नंदा ने इसके साथ बेहद मार्मिक कैप्शन लिखा है— “Goodbyes simply means I will miss you till we meet again” Grieving just like us. Treat the wild with empathy. (अलविदा का सीधा मतलब है कि मैं तुमसे दोबारा मिलने तक तुम्हारी याद करूंगा। बिल्कुल हमारी तरह शोक मनाना। जंगल के साथ सहानुभूति के साथ पेश आएं।)
पृष्ठभूमि और संदर्भ: हाथियों को दुनिया के सबसे बुद्धिमान और संवेदनशील प्राणियों में गिना जाता है। वैज्ञानिक अनुसंधान और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों में अपने मृत परिजनों या साथियों के प्रति बेहद गहरा लगाव और शोक व्यक्त करने की प्रवृत्ति होती है। वे मृत शरीर के पास घंटों खड़े रह सकते हैं, उसे छूते हैं और अजीब सी आवाजें निकालकर अपना दुख जाहिर करते हैं। यह वीडियो इसी प्राकृतिक और दुर्लभ व्यवहार का एक जीवंत दस्तावेज प्रतीत होता है, हालांकि 'द फ्रीलान्स' इस विशेष घटना के सटीक समय और स्थान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया: इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भावुक हो गए हैं। खबर लिखे जाने तक इस क्लिप को हजारों बार देखा जा चुका है और इस पर सैकड़ों लाइक्स व कमेंट्स आ चुके हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यह वीडियो इंसानों को यह सिखाने के लिए काफी है कि जानवर भी भावनाएं रखते हैं और उनके साथ क्रूरता नहीं बल्कि करुणा का व्यवहार होना चाहिए। वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के लगातार हो रहे क्षरण पर भी चिंता जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दृश्य आम लोगों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन विभाग और पर्यावरणविद् लगातार यह अपील करते रहे हैं कि जंगलों और वन्यजीवों के प्रति हमारा दृष्टिकोण मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए।








