नब्बे के दशक का वह जादुई दौर और आमिर खान का जलवा
हिंदी सिनेमा के इतिहास में नब्बे के दशक को रोमांस और सुरीले संगीत का स्वर्णिम काल माना जाता है। इस दौर में कई ऐसे सितारे उभरे जिन्होंने पर्दे पर अपनी अदाकारी से अमिट छाप छोड़ी। इनमें आमिर खान का नाम सबसे ऊपर आता है, जिन्होंने अपनी पहली फिल्म 'कयामत से कयामत तक' से ही युवाओं के दिलों में खास जगह बना ली थी। इसके बाद उनकी कई फिल्में आईं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए। इसी कड़ी में साल 1990 में रिलीज हुई निर्देशक इंद्र कुमार की फिल्म 'दिल' ने सिनेमाघरों में धमाल मचा दिया था।
फिल्म 'दिल' में आमिर खान के साथ माधुरी दीक्षित की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इस मूवी की कहानी जितनी दमदार थी, उससे कहीं ज्यादा इसका संगीत लोकप्रिय हुआ। फिल्म के सभी गाने उस दौर में गली-मोहल्लों से लेकर शादियों और रेडियो पर गूंजा करते थे। आज भी जब नब्बे के दशक के संगीत की बात होती है, तो 'दिल' के गानों का जिक्र सबसे पहले आता है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इस फिल्म के एक सबसे बड़े चार्टबस्टर गाने को तैयार करने में संगीतकारों और गीतकारों को कितनी मशक्कत करनी पड़ी थी।
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'मुझे नींद ना आए' गाने के पीछे की दिलचस्प कहानी
हम बात कर रहे हैं फिल्म 'दिल' के आइकॉनिक टाइटल ट्रैक 'मुझे नींद ना आए' की, जिसे बॉलीवुड के दिग्गज पार्श्व गायक उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल ने अपनी जादुई आवाज से सजाया था। यह गाना उस दौर में ऐसा सुपरहिट हुआ कि हर कोई इसकी धुन पर थिरकने लगा। इस गाने के बोल जाने-माने गीतकार समीर अनजान ने लिखे थे। एक इंटरव्यू के दौरान समीर ने इस गाने की मेकिंग से जुड़ा एक ऐसा राज खोला था, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है।
गीतकार समीर अनजान ने बताया कि इस गाने का मुखड़ा लिखना और उसे फाइनल करना किसी चुनौती से कम नहीं था। संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण इस गाने को लेकर बेहद परफेक्शनिस्ट अप्रोच अपना रही थी। वे चाहते थे कि गाने की शुरुआत इतनी दमदार हो कि सुनते ही दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाएं। यही वजह थी कि संगीतकारों और निर्देशक की संतुष्टि के लिए इस गाने के मुखड़े को एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे 20 बार बदला गया था। बार-बार बदलाव करने के बाद जब अंत में यह लाइन तय हुई, तब जाकर पूरी टीम को राहत मिली।
नदीम-श्रवण और आमिर खान की पसंद का दिलचस्प समीकरण
फिल्म 'दिल' के संगीत को लेकर पर्दे के पीछे एक और दिलचस्प वाकया जुड़ा हुआ है। जब इस फिल्म के लिए संगीतकारों के चयन की बात चल रही थी, तो आमिर खान थोड़े पसोपेश में थे। चूंकि अभिनेता ने अपनी पहली फिल्म 'कयामत से कयामत तक' के लिए आनंद-मिलिंद के साथ काम किया था और वह ब्लॉकबस्टर रही थी, इसलिए आमिर चाहते थे कि 'दिल' में भी वही संगीतकार जोड़ी रहे। लेकिन निर्देशक इंद्र कुमार की पसंद उस समय उभर रही संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण थी।
आखिरकार फिल्म में नदीम-श्रवण को ही साइन किया गया और उन्होंने अपनी धुनों से यह साबित कर दिया कि उनका चयन बिल्कुल सही था। नदीम-श्रवण की जोड़ी ने 'मुझे नींद ना आए' गाने में जो वेस्टर्न बीट्स और मेलोडी का मेल बिठाया, उसने इतिहास रच दिया। गीतकार समीर अनजान के लिखे शब्दों और उदित नारायण की रूमानी आवाज ने इस गाने में चार चांद लगा दिए। उदित नारायण की गायकी का अंदाज ऐसा था कि वह हर युवा के दिल की धड़कन बन गया।
आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शान से शामिल है यह कल्ट सॉन्ग
समय बीतने के साथ संगीत के ट्रेंड भले ही बदल गए हों, लेकिन नब्बे के दशक के इन गानों का जादू आज भी फीका नहीं पड़ा है। 'मुझे नींद ना आए' गाना आज भी जब किसी पार्टी या समारोह में बजता है, तो लोग थिरकने पर मजबूर हो जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जिस संगीत को जितनी शिद्दत और मेहनत से तैयार किया जाता है, वह उतनी ही लंबी उम्र पाता है।
"हमने फिल्म 'दिल' के गाने 'मुझे नींद ना आए' के मुखड़े को बेहतर बनाने के लिए लगभग बीस बार बदलाव किए थे। जब तक निर्देशक और संगीतकार पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो गए, तब तक काम चलता रहा।" — समीर अनजान, प्रसिद्ध गीतकार
आज तीन दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आमिर खान और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया यह गाना आज भी उतना ही ताजा लगता है। इसके पीछे समीर अनजान के लिखे खूबसूरत बोल, नदीम-श्रवण का अमर संगीत और उदित नारायण की बेमिसाल गायकी का ऐसा संगम है, जो सदियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेगा।








