सिनेमा के झकास स्टार और उनकी पर्सनल लाइफ के अनसुने पन्ने
बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता अनिल कपूर अपनी बेहतरीन एक्टिंग के साथ-साथ अपनी फिटेनस और हंसमुख अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। पर्दे पर हमेशा ऊर्जा से भरपूर दिखने वाले अनिल कपूर असल जिंदगी में एक बेहद समर्पित परिवार वाले इंसान हैं। हाल ही में उन्होंने एक रियलिटी शो के दौरान अपनी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा मजेदार वाकया साझा किया, जिसे सुनकर उनके फैंस भी हैरान रह गए और उनकी प्रेम कहानी की सादगी के मु मुरीद हो गए।
अनिल कपूर ने बताया कि उनकी जिंदगी में उनकी पत्नी सुनीता का स्थान कितना अहम है और कैसे उनकी एक शर्त ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी थी। एक समय जब अनिल कपूर अपने करियर की शुरुआती सीढ़ियां चढ़ रहे थे और संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे, तब उनकी मुलाकात सुनीता से हुई थी। सुनीता उस वक्त इंडस्ट्री की एक जानी-मानी और सफल मॉडल थीं, जबकि अनिल कपूर खुद को स्थापित करने की जद्दोजहद में जुटे हुए थे।
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सुनीता की वह अनोखी शर्त जिसने बदल दी अनिल कपूर की तकदीर
एक रियलिटी शो के दौरान कंटेस्टेंट्स से बातचीत करते हुए अनिल कपूर ने अपने रिश्ते से जुड़े उस दिलचस्प राज से पर्दा उठाया जो आज तक बहुत कम लोग जानते थे। एक्टर ने बताया कि जब उन्होंने सुनीता के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो उनकी होने वाली पत्नी ने उनके सामने एक बहुत ही दिलचस्प और स्पष्ट शर्त रख दी थी।
सुनीता ने दो टूक कह दिया था कि वह अनिल कपूर से ब्याह रचाने के लिए तभी तैयार होंगी जब उन्हें शादी के बाद कभी भी रसोई घर यानी किचन में पैर न रखना पड़े। उस जमाने के हिसाब से यह एक बेहद अनोखी मांग थी। लेकिन अनिल कपूर ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करने के बजाय अपने लिए एक प्रेरणा बना लिया।
उन्होंने सोचा कि यदि उन्हें अपनी पसंद की जीवनसंगिनी को पाना है और उन्हें हर खुशी देनी है, तो उन्हें अपनी मेहनत कई गुना बढ़ानी होगी। अनिल कपूर ने उस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाया और दिन-रात कड़ी मेहनत की, ताकि वह इतने सफल बन सकें कि उनकी पत्नी को कभी भी चूल्हा-चौका न संभालना पड़े। आज इतने साल बीत जाने के बाद भी सुनीता ने कभी किचन में कदम नहीं रखा है और अनिल कपूर ने अपना वादा पूरी शिद्दत से निभाया है।
प्रैंक कॉल से हुई थी इस फिल्मी लव स्टोरी की बेहद दिलचस्प शुरुआत
अनिल कपूर और सुनीता की प्रेम कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत साल 1973 में हुई थी, जो शादी से लगभग एक दशक पहले की बात है। उन दिनों अनिल कपूर फिल्म इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे और उनके पास काम की तलाश थी।
एक पुराने इंटरव्यू में अभिनेता ने खुद इस बात का जिक्र किया था कि उनके एक कॉमन फ्रेंड ने उन्हें सुनीता का फोन नंबर दिया था और मजाक में एक प्रैंक कॉल करने को कहा था। जैसे ही अनिल कपूर ने फोन पर सुनीता की आवाज सुनी, वह पहली ही बार में उनकी आवाज के कायल हो गए।
वह आवाज उनके दिल में ऐसी उतरी कि दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया और धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। सुनीता ने हर उतार-चढ़ाव में अनिल कपूर का साथ दिया, तब भी जब वह एक स्थापित स्टार नहीं थे। उनका यह अटूट विश्वास ही था जो इस रिश्ते को मुकाम तक ले आया।
महज 30 मिनट में हुई थी शादी और आज पूरे हो चुके हैं 42 साल
लंबे समय तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद आखिरकार साल 1984 में अनिल कपूर और सुनीता ने हमेशा के लिए एक-दूसरे का हाथ थामने का फैसला किया। उनकी शादी की रस्में किसी बड़े शाही समारोह की तरह नहीं, बल्कि बेहद सादगी और गोपनीयता के साथ पूरी हुई थीं।
शादी का पूरा कार्यक्रम महज 30 मिनट में निपट गया था। मंडप में केवल उनके माता-पिता और कुछ चुनिंदा करीबी रिश्तेदार ही मौजूद थे। उस वक्त फिल्मी दुनिया में कदम रख रहे अभिनेता के पास बहुत ज्यादा तामझाम का समय या संसाधन नहीं थे, लेकिन प्यार की गहराई ने उस सादगी को ऐतिहासिक बना दिया।
"मेरी पत्नी सुनीता ने शर्त रखी थी कि वह मुझसे तभी शादी करेंगी जब उन्हें किचन में न जाना पड़े। उनकी यह शर्त सुनने के बाद मैंने सोचा कि मुझे कड़ी मेहनत करनी होगी और इतना सफल होना पड़ेगा कि उन्हें कभी रसोई में कदम न रखना पड़े। मैंने वो जिम्मेदारी निभाई और आज तक सुनीता किचन में नहीं गई हैं।" — अनिल कपूर, बॉलीवुड अभिनेता
आज भी मिसाल है इस पावर कपल का खुशहाल पारिवारिक जीवन
आज अनिल कपूर और सुनीता की शादी को 42 साल का लंबा अरसा बीत चुका है। इतने दशकों के बाद भी उनके बीच का प्यार और सम्मान वैसा ही बना हुआ है जैसे शुरुआती दिनों में था। यह कपल आज तीन बच्चों सोनम कपूर, रिया कपूर और हर्षवर्धन कपूर के माता-पिता हैं और एक खुशहाल जिंदगी जी रहा है।
बदलते दौर में जहां रिश्तों में दूरियां आनी आम बात हो गई है, वहीं अनिल कपूर और सुनीता की यह जोड़ी नई पीढ़ी के लिए कमिटमेंट और आपसी समझ का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है। एक-दूसरे के सपनों का सम्मान करना और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहना ही इस सफल रिश्ते की असली ताकत रही है।







