नई दिल्ली/देहरादून — उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर देश की सुर्खियों में आ गया है। मृतका के पिता वीरेंद्र भंडारी ने न्याय की मांग को लेकर पांच सूत्रीय मांगें सामने रखी हैं, जिन्हें तुरंत पूरा करने की अपील की गई है। इस बीच, पीड़ित परिवार को कुछ समय के लिए पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। इस कार्रवाई के बाद से राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवार का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन और संघर्ष जारी रहेगा।
घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से कहा है कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की यह लड़ाई अब न तो कभी दबेगी और न ही रुकेगी। राहुल गांधी ने परिवार के साथ हो रहे कथित बर्ताव की कड़ी निंदा की है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस मामले में मुख्य आरोपियों और कथित वीआईपी चेहरों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिसके कारण आम जनता और परिजनों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।
पिता वीरेंद्र भंडारी की पांच प्रमुख मांगें और वीआईपी पर घमासान
पीड़ित पिता वीरेंद्र भंडारी ने अपनी पांच मांगों में मुख्य रूप से उस अज्ञात वीआईपी के नाम का खुलासा करने की मांग की है जिसका जिक्र इस हत्याकांड में बार-बार सामने आता रहा है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले के उन पहलुओं को छुपाने की कोशिश कर रहा है जो किसी बड़े रसूखदार से जुड़े हो सकते हैं। इसके अलावा, मामले की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने और दोषियों को बिना किसी देरी के कठोरतम सजा देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। पिता का यह भी कहना है कि परिवार को सुरक्षा दी जाए और मामले से जुड़े सभी सबूतों को सुरक्षित रखते हुए पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए।
दूसरी ओर, सिक्किम के राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर भी विवाद गरमाता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंकिता के माता-पिता ने चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे प्रकरण से जुड़े कुछ प्रशासनिक विवादों और नियुक्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे बड़े स्तर पर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। परिजनों का रोष इस बात को लेकर है कि इतने महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें वह न्याय नहीं मिला जिसकी वे उम्मीद कर रहे थे। उनका यह भी आरोप है कि सरकार और प्रशासन उन्हें डराने या चुप कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
हिरासत में लेने की घटना और देशभर में आंदोलन की चेतावनी
हाल ही में जब पीड़ित माता-पिता अपनी मांगों को लेकर मुखर हो रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में ले लिया था। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन इस पुलिसिया कार्रवाई ने जनता के बीच आक्रोश को और बढ़ा दिया। रिहाई के बाद पिता वीरेंद्र भंडारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार का यही रवैया रहा, तो यह आंदोलन अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे देशभर में फैलाया जाएगा। उन्होंने देश के तमाम नागरिकों और युवाओं से अपील की है कि वे अंकिता को इंसाफ दिलाने की इस मुहिम में उनके साथ जुड़ें।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया है। आम आदमी से लेकर सामाजिक संगठन तक इस मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम इस मामले की हर एक नई कड़ी और प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि पाठकों तक सच और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सबसे पहले पहुंचाई जा सके।
राजनीतिक बयानबाजी और जनता का बढ़ता आक्रोश
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, जहां विपक्ष लगातार सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है। स्थानीय लोग और विभिन्न महिला संगठन सड़कों पर उतरकर लगातार अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक बेटी की इस तरह की निर्मम हत्या के बाद भी यदि दोषियों को पूरी तरह बेनकाब नहीं किया जाता है, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है।
आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर सियासी सरगर्मी और बढ़ने के पूरे आसार हैं। पीड़ित परिवार के तेवर और कड़े होते जा रहे हैं, और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी अंतिम सांस तक न्याय के लिए लड़ते रहेंगे। द फ्रीलान्स इस संवेदनशील मामले से जुड़े हर एक अपडेट और कानूनी कार्रवाई की पल-पल की जानकारी अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा, ताकि न्याय की इस लड़ाई में कोई भी सच छिपा न रह सके।






