सिनेमाघरों में इतिहास रचने वाली फिल्म 'हनुमान अंश' पर आयुष्मान खुराना का बड़ा बयान
भारतीय सिनेमा जगत में इन दिनों कम बजट की फिल्मों का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। हाल ही में रिलीज हुई बायोग्राफिकल डिवोशनल फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर जो सफलता हासिल की है, उसने बड़े-बड़े निर्माताओं और निर्देशकों को भी चौंका दिया है। इस बीच अपनी आगामी फिल्म 'उड़ता तीर' को लेकर चर्चा में चल रहे लोकप्रिय अभिनेता आयुष्मान खुराना ने इस फिल्म की सफलता पर खुलकर बात की है। आयुष्मान का मानना है कि सिनेमा में बदलाव का दौर आ चुका है और अब दर्शकों को बड़े बजट के तड़क-भड़क वाले सिनेमा से ज्यादा जमीन से जुड़ी और सच्ची कहानियां पसंद आ रही हैं।
'हनुमान अंश' फिल्म ने दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई कर ली है। महज कुछ लाख रुपये के शुरुआती कलेक्शन और बेहद सीमित बजट में तैयार की गई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में जो लंबी पारी खेली है, वह वर्तमान समय में एक मिसाल बन चुकी है। आयुष्मान खुराना ने एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान इस बात पर जोर दिया कि बॉलीवुड और ग्लोबल सिनेमा को ऐसी ही साहसिक और कम लागत वाली परियोजनाओं से सीख लेनी चाहिए, जो अपनी दमदार पटकथा के दम पर बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ती हैं।
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महज 2 करोड़ के बजट में बनी 'हनुमान अंश' ने पार किया 400 करोड़ का जादुई आंकड़ा
किसी भी फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस पर टिके रहना तब और भी कठिन हो जाता है जब हर हफ्ते नई फिल्में सिनेमाघरों में दस्तक दे रही हों। लेकिन 'हनुमान अंश' ने इन सभी बाधाओं को पार करते हुए एक नया इतिहास लिखा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म का निर्माण बेहद मामूली बजट में किया गया था और शुरुआत में इसे सिनेमाघरों में काफी धीमी ओपनिंग मिली थी। शुरुआती हफ्तों में शोज की संख्या भी बहुत कम थी, लेकिन दर्शकों के बीच मौखिक प्रचार यानी वर्ड ऑफ माउथ ने ऐसा कमाल दिखाया कि फिल्म की कमाई का ग्राफ तेजी से ऊपर उठने लगा।
फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक सफर से प्रेरित है। मुख्य भूमिकाओं में शोभिनव सत्या, पूर्णिमा तिवारी, चंदन आनंद और अनिल रस्तोगी जैसे कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ी है। फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि कंटेंट मजबूत हो, तो दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए भारी-भरकम स्टारकास्ट या करोड़ों के प्रचार की आवश्यकता नहीं होती है।
हॉलीवुड की 'ओब्सेशन' और 'हनुमान अंश' की सफलता पर क्या बोले आयुष्मान खुराना
अपनी कलात्मक और लीक से हटकर फिल्में चुनने के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता आयुष्मान खुराना ने 'हनुमान अंश' के साथ-साथ हॉलीवुड की मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म 'ओब्सेशन' का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों फिल्मों की सफलता इस बात का पक्का प्रमाण है कि दर्शक अब लीक से हटकर कुछ नया देखना चाहते हैं। कम लागत में उच्च गुणवत्ता का सिनेमा तैयार करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है।
आयुष्मान ने पीटीआई के साथ हुई बातचीत में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के रचनाकारों को अब वित्तीय जोखिमों को कम करने और रचनात्मक स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए छोटे बजट के फॉर्मूले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म अपनी लागत से कई गुना अधिक मुनाफा कमाती है, तो वह पूरी इंडस्ट्री के लिए एक सकारात्मक संकेत होता है।
"सिनेमा में आज के समय में सबसे जरूरी चीज है एक सच्ची कहानी और उसे ईमानदारी से पर्दे पर उतारना। 'हनुमान अंश' और 'ओब्सेशन' जैसी फिल्में यह साबित करती हैं कि कम बजट में भी बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड बनाए जा सकते हैं, बशर्ते कंटेंट में दम हो।" — आयुष्मान खुराना, अभिनेता
लखनऊ के 'सेवा शिखर सम्मान' समारोह में फिल्म को मिला पहला बड़ा पुरस्कार
बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता दर्ज करने के बाद 'हनुमान अंश' को अब प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित किए जाने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खुशी फाउंडेशन और दिशा के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य ‘सेवा शिखर सम्मान’ समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में फिल्म को समाज में सकारात्मक संदेश देने और उत्कृष्ट सिनेमाई योगदान के लिए प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने इस उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए एक वीडियो संदेश के माध्यम से सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम की उस कड़ी मेहनत और समर्पण का नतीजा है, जो उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण सफर के दौरान दिखाई थी। यह पुरस्कार इस बात का प्रतीक है कि सार्थक और मूल्य आधारित सिनेमा को समाज में हमेशा सराहा जाता है।
सिनेमा जगत में बदलता परिदृश्य और कम बजट की फिल्मों का भविष्य
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय दर्शकों की पसंद में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लोग अब पारंपरिक फॉर्मूला फिल्मों से आगे निकलकर ऐसी कहानियों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें प्रेरित करें और वास्तविक जीवन के करीब महसूस कराएं। 'हनुमान अंश' की सफलता इस बात का सबसे ताजा उदाहरण है कि कैसे एक फिल्म बिना किसी बड़े शोर-शराबे के अपनी कहानी के दम पर दर्शकों के दिलों पर राज कर सकती है।
फिल्म जानकारों का भी यही मानना है कि आने वाले समय में निर्माता ऐसे प्रोजेक्ट्स पर अधिक निवेश करेंगे जो लागत के लिहाज से सुरक्षित हों और जिनमें प्रयोग करने की पूरी गुंजाइश हो। आयुष्मान खुराना जैसे स्थापित कलाकारों द्वारा इस सोच का समर्थन करना इस बात का संकेत है कि बॉलीवुड अब धीरे-धीरे कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा के सुनहरे दौर की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।








