बैंक हड़ताल के बीच आम जनता के लिए बड़ी राहत का ऐलान
देशभर के बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बैंक कर्मचारी संगठनों द्वारा आगामी दिनों में प्रस्तावित हड़ताल को ध्यान में रखते हुए देश के प्रमुख सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है। बैंक प्रबंधन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि हड़ताल की अवधि के दौरान ग्राहकों को किसी भी प्रकार की वित्तीय असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए एटीएम से जुड़े नियमों में अस्थायी बदलाव किए गए हैं ताकि देश का आम नागरिक बिना किसी रोक-टोक के अपनी जरूरत के अनुसार नकदी प्राप्त कर सके।
भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक जैसे तमाम बड़े सरकारी वित्तीय संस्थानों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस विशेष छूट की जानकारी अपने खाताधारकों के साथ साझा की है। बैंकिंग जानकारों का मानना है कि इस कदम से उन आम लोगों को सबसे अधिक सहूलियत मिलेगी जो त्योहारी सीजन या अन्य जरूरी कामों के चलते एटीएम सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। वित्तीय संस्थानों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की भुगतान प्रणाली और नकदी की उपलब्धता पूरी तरह सुचारू बनी रहे।
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क्या है एटीएम से पैसे निकालने का मौजूदा नियम और छूट?
भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, आम तौर पर खाताधारकों को अपने बैंक के एटीएम से महीने में पांच बार मुफ्त नकद निकासी की अनुमति मिलती है। वहीं, दूसरे बैंकों के एटीएम का इस्तेमाल करने पर महानगरों या बड़े शहरों में तीन बार और छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में पांच बार मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा तय की गई है। इस तय सीमा से अधिक बार एटीएम का उपयोग करने की स्थिति में बैंकों द्वारा ग्राहकों के खाते से अतिरिक्त शुल्क काटा जाता है, जो आमतौर पर बीस रुपये से लेकर जीएसटी समेत अन्य शुल्कों तक होता है।
लेकिन बैंक यूनियनों की तरफ से घोषित आगामी हड़ताल के तीन दिनों के दौरान इस नियम में बड़ा बदलाव किया गया है। इन विशेष दिनों में यदि कोई ग्राहक अपने बैंक के अलावा किसी अन्य बैंक के एटीएम से भी पैसे निकालता है, और उसकी मुफ्त निकासी की सीमा समाप्त भी हो चुकी है, तब भी बैंक उसकी जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डालेंगे। यानी तय सीमा से ज्यादा बार एटीएम का इस्तेमाल करने पर भी किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा। यह छूट पूरी तरह से अस्थायी है और केवल हड़ताल की अवधि तक ही लागू रहेगी।
"बैंक हड़ताल के इस दौर में भी हमारे ग्राहकों की जरूरी वित्तीय सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी। हमने यह सुनिश्चित किया है कि एटीएम और डिजिटल माध्यमों से लोगों को नकदी की कोई कमी न हो।" — वरिष्ठ बैंक अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक
किन मांगों को लेकर हो रही है बैंक कर्मचारियों की हड़ताल?
बैंक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठनों के साझा मंच 'युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस' ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस प्रस्तावित हड़ताल में करीब नब्बे प्रतिशत बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल होने जा रहे हैं, जिसके चलते देश के तमाम सरकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कामकाज पर असर पड़ने की पूरी संभावना है। यूनियनों की सबसे प्रमुख और पुरानी मांग सप्ताह में केवल पांच दिन कार्य दिवस तय करने की है, ताकि कर्मचारियों को कार्य और जीवन के बीच बेहतर संतुलन मिल सके। इसके अलावा पेंशन से जुड़े मुद्दों और रिक्त पदों पर नई भर्तियों को लेकर भी लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है।
बैंक यूनियनों और सरकार के बीच कई दौर की बैठकों के बावजूद अब तक इन मुद्दों पर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है, जिसके कारण कर्मचारियों के पास आंदोलन का रास्ता चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हालांकि, हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में ताले लटकने की संभावना के बीच वित्तीय संस्थानों ने डिजिटल और वैकल्पिक बैंकिंग माध्यमों को पूरी तरह सक्रिय रखने की पूरी तैयारी कर ली है ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर कोई ब्रेक न लगे।
वैकल्पिक बैंकिंग सेवाओं का मिलेगा पूरा लाभ
यदि बैंक हड़ताल के दौरान आपको किसी जरूरी काम के लिए बैंक शाखा जाने की जरूरत पड़ जाए, तो आपको निराश होना पड़ सकता है क्योंकि भौतिक रूप से शाखाएं बंद रहेंगी। लेकिन तकनीक के इस दौर में बैंकिंग केवल कागजों और शाखाओं तक सीमित नहीं है। देश के सबसे बड़े ऋणदाता एसबीआई समेत अन्य बैंकों ने स्पष्ट किया है कि भले ही कर्मचारी हड़ताल पर हों, लेकिन उनकी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं चौबीसों घंटे निर्बाध रूप से काम करती रहेंगी। ग्राहक घर बैठे अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिए तमाम बड़े वित्तीय लेन-देन आसानी से कर सकेंगे।
इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं में मोबाइल बैंकिंग एप्लिकेशन, इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल, यूपीआई सेवाएं, व्हाट्सएप बैंकिंग और चौबीस घंटे उपलब्ध रहने वाले कस्टमर केयर सेंटर शामिल हैं। इसके अलावा ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट यानी ग्राहक सेवा केंद्र भी अपनी सेवाएं देते रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों के मजबूत होने से अब इस तरह की हड़तालों का आम जनता के रोजमर्रा के जीवन पर असर काफी हद तक कम हो गया है। फिर भी, आपातकालीन परिस्थितियों के लिए कैश की जरूरत को पहले ही पूरा कर लेना समझदारी होगी।
