बिहार की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में महिला सशक्तिकरण की गूंज
बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक खास योजना के दो दशक पूरे होने का जश्न और मंथन दोनों ही जोरों पर है। प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने राज्यभर में 'नीतीश संवाद : जीविका के 20 साल, बेमिसाल' के बैनर तले विशेष अभियानों की शुरुआत की है। इसी कड़ी में विभिन्न जिलों में संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से लेकर मैदानी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं तक की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। इस पूरी मुहिम का मुख्य उद्देश्य पिछले दो दशकों में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को रेखांकित करना और इस पूरी विकास यात्रा को जन-जन तक पहुंचाना है।
आयोजित कार्यक्रमों के दौरान उन शुरुआती दौर की चुनौतियों को भी याद किया गया, जब महिलाओं का चौखट लांघकर बाहर निकलना और अपने पैरों पर खड़ा होना बेहद कठिन माना जाता था। पार्टी नेताओं का कहना है कि वर्ष 2005 में कमान संभालने के बाद से ही सरकार ने महिला केंद्रित नीतियों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा। इसी दूरगामी सोच का परिणाम था कि आगे चलकर 'जीविका' जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा गया, जिसने आज राज्य की करोड़ों महिलाओं की तकदीर और तस्वीर दोनों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।
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जीविका योजना: कैसे बदली ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तकदीर
बिहार के गांवों और कस्बों में आज 'जीविका दीदी' केवल एक शब्द नहीं बल्कि महिला आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए राज्य की करीब 1.88 करोड़ महिलाओं को जोड़ा जा चुका है, जो आज विभिन्न प्रकार के स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से अपनी आजीविका चला रही हैं। छोटे-छोटे व्यवसायों, पशुपालन, हस्तशिल्प और कृषि से जुड़े कामों ने इन महिलाओं को वित्तीय रूप से मजबूत किया है। अब वे अपने परिवारों के आर्थिक निर्णय में बराबर की हिस्सेदार बन चुकी हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है.
समीक्षा बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में पहुंचे नेताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दो दशक पहले की स्थिति और आज के परिदृश्य में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। जिन महिलाओं को कभी अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, वे आज बैंक खातों का संचालन कर रही हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रही हैं। यह वित्तीय स्वतंत्रता केवल उनके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को भी काफी हद तक मजबूत करने का काम किया है.
"आज से बीस वर्ष पूर्व जीविका दीदियों सहित अन्य महिलाओं का घर से बाहर निकलना दुश्वार था। नीतीश कुमार ने 2005 में सत्ता संभालने के साथ महिला सशक्तिकरण का काम शुरू किया और जीविका योजना ने महिलाओं को एक नई पहचान दी है।" — विजय सिंह निषाद, जेडीयू विधायक
शराबबंदी और सुरक्षा: महिलाओं के हक में उठाए गए कड़े प्रशासनिक कदम
केवल आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के स्तर पर भी महिलाओं के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए। संवाद कार्यक्रमों के दौरान नेताओं ने इस बात को प्रमुखता से रखा कि महिलाओं के लगातार आग्रह और उनकी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए ही राज्य में पूर्ण शराबबंदी जैसे सख्त कानून को लागू किया गया था। इस एक फैसले ने ग्रामीण परिवारों में घरेलू हिंसा के मामलों में भारी कमी लाने के साथ-साथ महिलाओं को एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण माहौल प्रदान किया है.
पार्टी प्रवक्ताओं और महिला विंग की नेताओं का मानना है कि महिलाओं का समर्थन ही नीतीश सरकार की सबसे बड़ी ताकत रहा है। जब महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं और समाज में उन्हें बराबरी का सम्मान मिलता है, तो पूरा परिवार और प्रदेश स्वतः ही प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ जाता है। शराबबंदी के बाद से महिलाओं ने जिस प्रकार बढ़-चढ़कर समर्थन दिया है, वह इस बात का प्रमाण है कि जमीन पर किए गए इन प्रशासनिक बदलावों का सकारात्मक असर आम जनजीवन पर गहराई से पड़ा है।
विपक्ष पर निशाना और आगामी राजनीतिक रणनीतियों की रूपरेखा
सत्ता पक्ष के इन आयोजनों में केवल योजनाओं की तारीफ ही नहीं हुई, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की कमियों को भी खुलकर मंच से साझा किया गया। पार्टी की महिला नेत्रियों ने पुराने दौर की याद दिलाते हुए कहा कि किस तरह पिछली व्यवस्था में महिलाएं हाशिए पर थीं और उनकी सुरक्षा व अधिकारों की अनदेखी की जाती थी। वर्तमान सरकार की उपलब्धियों की तुलना पुराने दौर से करते हुए जेडीयू ने इसे 'सुशासन' का स्वर्णिम काल करार दिया है, जिसका सीधा लाभ समाज के सबसे पिछड़े तबके और महिलाओं तक पहुंचा है.
आने वाले राजनीतिक समीकरणों और चुनावों के लिहाज से भी इस तरह के जन-संवाद कार्यक्रमों को बेहद अहम माना जा रहा है। महिलाओं का एक बड़ा वर्ग जो लगातार नीतीश सरकार के पक्ष में खड़ा नजर आता है, उसे पार्टी अपने सबसे बड़े वोट बैंक के रूप में देखती है। जीविका के 20 साल पूरे होने के बहाने सरकार अपनी इस सबसे सफल योजना को जनता के बीच एक बार फिर नए सिरे से स्थापित करने की पूरी कोशिश कर रही है, ताकि ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत किया जा सके।








